
Savitri Satyavan Story – Chapter 2: Savitri Chooses Satyavan
सावित्री सत्यवान कथा का अध्याय 2 — सावित्री का सत्यवान को चुनना। सावित्री सत्यवान को अपने पति के रूप में चुनती है, जो वन में लकड़हारा है, नारद मुनि के चेतावनी के बावजूद।
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सावित्री सत्यवान कथा का अध्याय 2 — सावित्री का सत्यवान को चुनना। सावित्री सत्यवान को अपने पति के रूप में चुनती है, जो वन में लकड़हारा है, नारद मुनि के चेतावनी के बावजूद।

राधा कृष्ण प्रेम कथा का अध्याय 5 — कंस वध की भविष्यवाणी। कंस को पता चलता है कि कृष्ण ही उसकी मृत्यु का कारण बनेंगे, जिससे वह उन्हें मारने के लिए अनेक प्रयास करता है।

कुरुक्षेत्र युद्ध कथा का अध्याय 3 — सेनाओं का समागम। दोनों सेनाएँ कुरुक्षेत्र में इकट्ठी होती हैं, युद्ध के नियम निर्धारित किए जाते हैं, और योद्धा अपने-अपने पक्ष चुनते हैं।

समुद्र मंथन कथा का अध्याय 9 — सत्य की जीत। भगवान विष्णु देवताओं को अमृत पिलाते हैं, जिससे वे अमर हो जाते हैं और असुरों को पराजित करते हैं।

प्रह्लाद और हिरण्यकशिपु का अध्याय 3 — प्रह्लाद: गर्भ में ज्ञान। हिरण्यकशिपु की पत्नी कयाधु, देवर्षि नारद के आश्रम में रहती हैं जहाँ गर्भ में पल रहे प्रह्लाद को विष्णु भक्ति का ज्ञान प्राप्त होता है।
नरसिंह अवतार कथा का अध्याय 1 — हिरण्यकशिपु का उदय। हिरण्यकशिपु अपनी तपस्या से ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त करता है और शक्तिशाली बन जाता है, संसार को अपने वश में कर लेता है।

शिव पार्वती विवाह कथा का अध्याय 4 — पार्वती की परीक्षा और दृढ़ता। पार्वती की भक्ति की परीक्षा लेने के लिए शिव एक ब्राह्मण का रूप धारण करके आते हैं, लेकिन पार्वती अपनी भक्ति में अटल रहती हैं।

लंका विजय कथा का अध्याय 3 — वनवास और दंडक वन। कैकेयी के वरदान के कारण राम, सीता और लक्ष्मण को चौदह वर्ष का वनवास होता है।

सावित्री सत्यवान कथा का अध्याय 1 — सावित्री का जन्म, भविष्य की भविष्यवाणी। राजा अश्वपति और रानी मालवी की तपस्या से सावित्री का जन्म होता है, लेकिन नारद मुनि उसकी अल्पायु का भविष्य बताते हैं।

राधा कृष्ण प्रेम कथा का अध्याय 4 — वृंदावन में बढ़ता प्रेम। कृष्ण और राधा का प्रेम वृंदावन में पल्लवित होता है, जहाँ वे रासलीला और अन्य लीलाओं के माध्यम से अपने प्रेम का प्रदर्शन करते हैं।

कुरुक्षेत्र युद्ध कथा का अध्याय 2 — कृष्ण का शांति प्रस्ताव। भगवान कृष्ण शांति स्थापित करने का प्रयास करते हैं, लेकिन दुर्योधन उनके प्रस्ताव को अस्वीकार कर देता है, जिससे युद्ध अनिवार्य हो जाता है।

समुद्र मंथन कथा का अध्याय 8 — अमृत के लिए युद्ध। अमृत के लिए देवता और असुर एक भयंकर युद्ध करते हैं, भगवान विष्णु मोहिनी रूप धारण करते हैं।