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Dashamata Vrat Katha – दशामाता व्रत
देवी की कथाएँ

दशामाता व्रत कथा | पूजा विधि, व्रत का महत्व, शुभ मुहूर्त और सम्पूर्ण कथा

दशामाता व्रत हिंदू धर्म का एक पवित्र व्रत है, जिसे परिवार की सुख-समृद्धि, सौभाग्य और संकटों से रक्षा के लिए श्रद्धापूर्वक किया जाता है। इस व्रत में माता दशामाता की पूजा, पवित्र कथा का श्रवण और विधि-विधान से व्रत का पालन विशेष फलदायी माना जाता है। इस लेख में जानें दशामाता व्रत की सम्पूर्ण कथा, पूजा विधि, व्रत नियम, शुभ मुहूर्त, उद्यापन की विधि और धार्मिक महत्व।

Tilak Kathayein27 Jul 2025
श्रावण सोमवार व्रत कथा: पूजा विधि, नियम, महत्व, उद्यापन और संपूर्ण जानकारी
ब्लॉग

श्रावण सोमवार व्रत कथा: पूजा विधि, नियम, महत्व, उद्यापन और संपूर्ण जानकारी

श्रावण सोमवार व्रत भगवान शिव को समर्पित पवित्र व्रत है। जानिए सावन सोमवार व्रत की कथा, पूजा विधि, नियम, महत्व, शिवलिंग अभिषेक, व्रत में क्या खाएं और उद्यापन की संपूर्ण विधि।

Tilak Kathayein13 Aug 2026

नवीनतम लेख

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कहानियाँ

पांडवों का जन्म कैसे हुआ? कुंती और माद्री की अद्भुत कथा | महाभारत की विचित्र कहानी

पांडवों का जन्म महाभारत की सबसे अद्भुत और महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक है। राजा पांडु को मिले एक शाप के कारण वे संतान उत्पन्न करने में असमर्थ थे। तब कुंती को ऋषि दुर्वासा से प्राप्त दिव्य मंत्र का स्मरण हुआ, जिसके माध्यम से उन्होंने देवताओं का आह्वान किया। इसी प्रकार युधिष्ठिर, भीम और अर्जुन का जन्म हुआ, जबकि माद्री ने इसी मंत्र की सहायता से अश्विनी कुमारों का आह्वान कर नकुल और सहदेव को जन्म दिया। इस लेख में जानें पांचों पांडवों के जन्म की पूरी कथा, कुंती-माद्री की भूमिका और इसके पीछे की पौराणिक मान्यता।

15 Aug 202614
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कहानियाँ

माता सीता ने किन 5 लोगों को श्राप दिया था? जानें गया की प्रसिद्ध पौराणिक कथा

सनातन परंपरा में प्रचलित **गया की प्रसिद्ध पौराणिक कथा** के अनुसार, जब भगवान श्रीराम पितृ श्राद्ध के लिए सामग्री लाने गए, तब माता सीता ने स्वयं पिंडदान किया। उस समय कुछ साक्षियों ने सत्य का साथ नहीं दिया, जिससे माता सीता ने उन्हें श्राप दिया और केवल अक्षयवट ने सत्य का समर्थन किया, जिसे उन्होंने आशीर्वाद दिया। इस लेख में जानें माता सीता ने किन 5 लोगों को श्राप दिया, श्राप के पीछे का कारण, गया श्राद्ध से जुड़ी मान्यताएं और इस कथा का धार्मिक महत्व।

14 Aug 202625
श्रावण सोमवार व्रत कथा: पूजा विधि, नियम, महत्व, उद्यापन और संपूर्ण जानकारी
ब्लॉग

श्रावण सोमवार व्रत कथा: पूजा विधि, नियम, महत्व, उद्यापन और संपूर्ण जानकारी

श्रावण सोमवार व्रत भगवान शिव को समर्पित पवित्र व्रत है। जानिए सावन सोमवार व्रत की कथा, पूजा विधि, नियम, महत्व, शिवलिंग अभिषेक, व्रत में क्या खाएं और उद्यापन की संपूर्ण विधि।

13 Aug 202632
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ब्लॉग

श्रावण अमावस्या पूजा विधि | पितृ तर्पण, दान का महत्व, शुभ मुहूर्त और सम्पूर्ण जानकारी

**श्रावण अमावस्या** हिंदू धर्म में पितरों की शांति, भगवान शिव की कृपा और पुण्य प्राप्ति के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। इस दिन **पितृ तर्पण, स्नान, दान और विधिपूर्वक पूजा** का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक किए गए तर्पण और दान से पितृ प्रसन्न होते हैं तथा परिवार में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। इस लेख में जानें श्रावण अमावस्या की पूजा विधि, पितृ तर्पण की सही प्रक्रिया, दान का महत्व, शुभ मुहूर्त और धार्मिक मान्यताओं की सम्पूर्ण जानकारी।

13 Aug 202622
धृतराष्ट्र जन्म से अंधे क्यों थे? 100 पुत्र कैसे हुए? जानें महाभारत की सम्पूर्ण कथा
कहानियाँ

धृतराष्ट्र जन्म से अंधे क्यों थे? 100 पुत्र कैसे हुए? जानें महाभारत की सम्पूर्ण कथा

धृतराष्ट्र महाभारत के प्रमुख पात्रों में से एक थे, जिनका जन्म महर्षि वेदव्यास के वरदान से हुआ, लेकिन वे जन्म से ही नेत्रहीन थे। उनकी पत्नी गांधारी ने भी एक अद्भुत प्रक्रिया के माध्यम से **100 पुत्रों और एक पुत्री** को जन्म दिया, जिसका वर्णन महाभारत में विस्तार से मिलता है। इस लेख में जानें धृतराष्ट्र के जन्म का रहस्य, उनके अंधत्व का कारण, गांधारी को 100 पुत्र कैसे प्राप्त हुए और इस पूरी कथा का धार्मिक एवं पौराणिक महत्व।

13 Aug 202621
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1 श्लोक 3 | दुर्योधन का द्रोणाचार्य से पहला संबोधन | संपूर्ण अर्थ एवं व्याख्या
भागवद गीता

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1 श्लोक 3 | दुर्योधन का द्रोणाचार्य से पहला संबोधन | संपूर्ण अर्थ एवं व्याख्या

भगवद्गीता के प्रथम अध्याय का तीसरा श्लोक अत्यंत महत्वपूर्ण है। अब तक दुर्योधन केवल पाण्डवों की सेना को देख रहा था, लेकिन इस श्लोक में वह पहली बार अपने गुरु द्रोणाचार्य से सीधे संवाद करता है। उसके शब्दों में सम्मान दिखाई देता है, किन्तु उनके पीछे छिपी राजनीतिक बुद्धिमत्ता, मनोवैज्ञानिक दबाव और युद्धनीति भी स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।

10 Aug 202630
भीष्म पितामह को क्यों मिली थी बाणों की शय्या? जानें महाभारत की कथा
कहानियाँ

भीष्म पितामह को क्यों मिली थी बाणों की शय्या? जानें महाभारत की कथा

भीष्म पितामह महाभारत के सबसे महान योद्धाओं और धर्मनिष्ठ पात्रों में से एक थे। कुरुक्षेत्र युद्ध में अर्जुन ने शिखंडी को आगे रखकर उन पर बाणों की वर्षा की, जिससे उनका पूरा शरीर बाणों से ढक गया और वे धरती पर गिरने के बजाय **बाणों की शय्या** पर स्थित हो गए। इच्छामृत्यु के वरदान के कारण उन्होंने तत्काल प्राण त्याग नहीं किए और उत्तरायण आने तक वहीं रहकर धर्म, नीति और राजधर्म का उपदेश दिया। इस लेख में जानें भीष्म पितामह को बाणों की शय्या क्यों मिली, इसके पीछे की महाभारत कथा, शाप-वरदान और इसका गहरा आध्यात्मिक संदेश।

10 Aug 202636
माता लक्ष्मी के विभिन्न स्वरूप और उनका महत्व | Maa Lakshmi Forms in Hindi
ब्लॉग

माता लक्ष्मी के विभिन्न स्वरूप और उनका महत्व | Maa Lakshmi Forms in Hindi

**माता लक्ष्मी** केवल धन और वैभव की देवी ही नहीं, बल्कि सुख, समृद्धि, ज्ञान, साहस, संतान, विजय और आध्यात्मिक उन्नति का भी प्रतीक हैं। शास्त्रों में उनके अनेक दिव्य स्वरूपों का वर्णन मिलता है, जिनमें **आदि लक्ष्मी, धन लक्ष्मी, धान्य लक्ष्मी, गज लक्ष्मी, संतान लक्ष्मी, वीर लक्ष्मी, विजय लक्ष्मी और विद्या लक्ष्मी** विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं। इस लेख में जानें माता लक्ष्मी के विभिन्न स्वरूप, उनका धार्मिक महत्व, प्रत्येक स्वरूप की विशेष कृपा और उनसे जुड़ी पौराणिक मान्यताओं की सम्पूर्ण जानकारी।

09 Aug 202645
भगवान श्रीकृष्ण के 108 नाम और उनका अर्थ | Shri Krishna 108 Names in Hindi
शतनामावली

भगवान श्रीकृष्ण के 108 नाम और उनका अर्थ | Shri Krishna 108 Names in Hindi

**भगवान श्रीकृष्ण के 108 नाम** उनके दिव्य स्वरूप, लीलाओं, गुणों और अवतार की महिमा का वर्णन करते हैं। प्रत्येक नाम का अपना आध्यात्मिक महत्व और विशेष अर्थ है, जिसका श्रद्धापूर्वक जप करने से मन को शांति, भक्ति और भगवान श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है। इस लेख में पढ़ें **श्रीकृष्ण अष्टोत्तर शतनामावली**, सभी 108 नाम उनके अर्थ सहित, नाम-जप का महत्व और उनसे मिलने वाले आध्यात्मिक लाभ।

08 Aug 202650
काकनमठ मंदिर | Kakanmath Temple History, Mystery & Architecture in Hindi
मंदिर

काकनमठ मंदिर | Kakanmath Temple History, Mystery & Architecture in Hindi

**काकनमठ मंदिर** मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में स्थित भगवान शिव को समर्पित एक प्राचीन और रहस्यमयी मंदिर है। लगभग एक हजार वर्ष पुराना यह मंदिर अपनी अनोखी वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है, क्योंकि इसकी विशाल पत्थर की संरचना बिना चूने या सीमेंट के खड़ी दिखाई देती है। लोकमान्यताओं, ऐतिहासिक महत्व और स्थापत्य कला के कारण यह मंदिर इतिहासकारों, श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है। इस लेख में जानें काकनमठ मंदिर का इतिहास, रहस्य, पौराणिक मान्यताएं, वास्तुकला, दर्शन की जानकारी और यात्रा से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य।

08 Aug 202642
भगवान शिव ने गणेश जी का सिर क्यों काटा? जानें पौराणिक कथा और रहस्य
कहानियाँ

भगवान शिव ने गणेश जी का सिर क्यों काटा? जानिए सम्पूर्ण पौराणिक कथा

**भगवान गणेश** के जन्म के बाद माता पार्वती ने उन्हें अपने द्वार की रक्षा का दायित्व सौंपा। जब भगवान शिव वहां पहुंचे और गणेश जी ने उन्हें भीतर जाने से रोका, तब दोनों के बीच संघर्ष हुआ। क्रोधित होकर भगवान शिव ने गणेश जी का सिर काट दिया। बाद में माता पार्वती के शोक और देवताओं के अनुरोध पर भगवान शिव ने एक हाथी के शिशु का सिर गणेश जी के धड़ पर स्थापित कर उन्हें पुनर्जीवित किया तथा उन्हें **प्रथम पूज्य** और **विघ्नहर्ता** का वरदान दिया। इस लेख में जानें इस पौराणिक घटना का वास्तविक कारण, शिव पुराण में वर्णित कथा और इसके गहरे आध्यात्मिक संदेश।

07 Aug 202653
राधा जी कौन थीं? क्या राधा जी माता लक्ष्मी का अवतार थीं? शास्त्रों में क्या लिखा है?
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राधा जी कौन थीं? क्या राधा जी माता लक्ष्मी का अवतार थीं? शास्त्रों में क्या लिखा है?

राधा रानी केवल भगवान श्रीकृष्ण की परम भक्त ही नहीं, बल्कि अनेक वैष्णव परंपराओं में उन्हें भगवान की **आनंद शक्ति (ह्लादिनी शक्ति)** का साक्षात् स्वरूप माना गया है। वहीं कुछ शास्त्रीय परंपराएं उन्हें माता लक्ष्मी से अभिन्न या उनका दिव्य स्वरूप भी बताती हैं। इस लेख में जानें राधा जी कौन थीं, क्या वे वास्तव में माता लक्ष्मी का अवतार थीं, तथा **ब्रह्मवैवर्त पुराण, देवी भागवत, गौड़ीय वैष्णव ग्रंथों और अन्य शास्त्रीय संदर्भों** में उनके स्वरूप का क्या वर्णन मिलता है।

06 Aug 202667
Stuti - Namo Chandike Ho Chamund Mata | नमो चंडिके हो चामुंड माता

Stuti - Namo Chandike Ho Chamund Mata | नमो चंडिके हो चामुंड माता

'नमो चंडिके, नमो चामुंडाय नमः' मंत्र जाप से शक्ति और सुरक्षा मिलती है, जो दुर्गा सप्तशती में वर्णित है और देवी चामुंडा के दिव्य स्वरूप की आराधना द्वारा आध्यात्मिक उन्नति और विघ्न निवारण का मार्ग प्रशस्त करता है.

26 May 2026177
ॐ जय जगदीश हरे

Om Jai Jagdish Hare | ॐ जय जगदीश हरे

ॐ जय जगदीश हरे आरती भगवान विष्णु को समर्पित है, जिसकी सरल विधि और भक्तिपूर्ण गायन से आध्यात्मिक शांति मिलती है। यह आरती घर में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है।

09 May 2026199
जय अम्बे गौरी

Jai Ambe Gauri | जय अम्बे गौरी

जय अम्बे गौरी आरती के बोल माता दुर्गा की स्तुति हैं, जिसे विधिपूर्वक गाने से भक्तों को आध्यात्मिक शांति और मनोकामना पूर्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यह शक्तिशाली आरती नवरात्रि में विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है और इसका जप भव बाधाओं को दूर करता है।

09 May 2026247
श्री राम स्तुति: श्री रामचंद्र कृपालु भजमन – संपूर्ण पाठ, सरल अर्थ और आध्यात्मिक महत्व

श्री राम स्तुति: श्री रामचंद्र कृपालु भजमन – संपूर्ण पाठ, सरल अर्थ और आध्यात्मिक महत्व

श्री रामचंद्र कृपालु भजमन गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित भगवान श्रीराम की एक लोकप्रिय स्तुति है। जानें इसका संपूर्ण पाठ, हिंदी अर्थ, धार्मिक महत्व और पाठ के लाभ।

20 Jul 202684
हे दुःख भंजन मारुती नंदन | हनुमान भजन लिरिक्स और महत्व

हे दुःख भंजन मारुती नंदन | हनुमान भजन लिरिक्स और महत्व

हे दुःख भंजन मारुती नंदन" भगवान हनुमान जी को समर्पित एक प्रसिद्ध भक्तिमय भजन है। इस भजन में भक्त पवनपुत्र हनुमान जी से दुखों को दूर करने, शक्ति और साहस प्रदान करने की प्रार्थना करता है। पढ़ें हनुमान भजन के सुंदर बोल और इसका महत्व।

27 Jun 2026220
उठो सोने वालों सबेरा हुआ है | वंशीधर शुक्ल का प्रेरणादायक देशभक्ति भजन<

उठो सोने वालों सबेरा हुआ है | वंशीधर शुक्ल का प्रेरणादायक देशभक्ति भजन

"उठो सोने वालों सबेरा हुआ है" वंशीधर शुक्ल द्वारा रचित एक प्रेरणादायक देशभक्ति भजन है। इस भजन में नई सुबह, आशा, जागृति और देश प्रेम का संदेश दिया गया है। पढ़ें इस प्रसिद्ध भजन के बोल, भावार्थ और इससे मिलने वाली प्रेरणा।

21 Jun 2026184
श्रावण सोमवार व्रत कथा: पूजा विधि, नियम, महत्व, उद्यापन और संपूर्ण जानकारी

श्रावण सोमवार व्रत कथा: पूजा विधि, नियम, महत्व, उद्यापन और संपूर्ण जानकारी

श्रावण सोमवार व्रत भगवान शिव को समर्पित पवित्र व्रत है। जानिए सावन सोमवार व्रत की कथा, पूजा विधि, नियम, महत्व, शिवलिंग अभिषेक, व्रत में क्या खाएं और उद्यापन की संपूर्ण विधि।

13 Aug 202632
shravan-maas-ka-mahatva-bhagwan-shiv-ki-kripa

श्रावण अमावस्या पूजा विधि | पितृ तर्पण, दान का महत्व, शुभ मुहूर्त और सम्पूर्ण जानकारी

**श्रावण अमावस्या** हिंदू धर्म में पितरों की शांति, भगवान शिव की कृपा और पुण्य प्राप्ति के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। इस दिन **पितृ तर्पण, स्नान, दान और विधिपूर्वक पूजा** का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक किए गए तर्पण और दान से पितृ प्रसन्न होते हैं तथा परिवार में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। इस लेख में जानें श्रावण अमावस्या की पूजा विधि, पितृ तर्पण की सही प्रक्रिया, दान का महत्व, शुभ मुहूर्त और धार्मिक मान्यताओं की सम्पूर्ण जानकारी।

13 Aug 202622
माता लक्ष्मी के विभिन्न स्वरूप और उनका महत्व | Maa Lakshmi Forms in Hindi

माता लक्ष्मी के विभिन्न स्वरूप और उनका महत्व | Maa Lakshmi Forms in Hindi

**माता लक्ष्मी** केवल धन और वैभव की देवी ही नहीं, बल्कि सुख, समृद्धि, ज्ञान, साहस, संतान, विजय और आध्यात्मिक उन्नति का भी प्रतीक हैं। शास्त्रों में उनके अनेक दिव्य स्वरूपों का वर्णन मिलता है, जिनमें **आदि लक्ष्मी, धन लक्ष्मी, धान्य लक्ष्मी, गज लक्ष्मी, संतान लक्ष्मी, वीर लक्ष्मी, विजय लक्ष्मी और विद्या लक्ष्मी** विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं। इस लेख में जानें माता लक्ष्मी के विभिन्न स्वरूप, उनका धार्मिक महत्व, प्रत्येक स्वरूप की विशेष कृपा और उनसे जुड़ी पौराणिक मान्यताओं की सम्पूर्ण जानकारी।

09 Aug 202645
राधा जी कौन थीं? क्या राधा जी माता लक्ष्मी का अवतार थीं? शास्त्रों में क्या लिखा है?

राधा जी कौन थीं? क्या राधा जी माता लक्ष्मी का अवतार थीं? शास्त्रों में क्या लिखा है?

राधा रानी केवल भगवान श्रीकृष्ण की परम भक्त ही नहीं, बल्कि अनेक वैष्णव परंपराओं में उन्हें भगवान की **आनंद शक्ति (ह्लादिनी शक्ति)** का साक्षात् स्वरूप माना गया है। वहीं कुछ शास्त्रीय परंपराएं उन्हें माता लक्ष्मी से अभिन्न या उनका दिव्य स्वरूप भी बताती हैं। इस लेख में जानें राधा जी कौन थीं, क्या वे वास्तव में माता लक्ष्मी का अवतार थीं, तथा **ब्रह्मवैवर्त पुराण, देवी भागवत, गौड़ीय वैष्णव ग्रंथों और अन्य शास्त्रीय संदर्भों** में उनके स्वरूप का क्या वर्णन मिलता है।

06 Aug 202667
भगवान जगन्नाथ का परिचय | इतिहास, पौराणिक कथा, स्वरूप एवं महत्व

भगवान जगन्नाथ का परिचय | इतिहास, पौराणिक कथा, स्वरूप एवं महत्व

भगवान जगन्नाथ भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य स्वरूप माने जाते हैं और ओडिशा के पुरी में स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर विश्वभर के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है।

02 Jul 2026342
माँ धूमावती उत्पत्ति कथा

Dhumavati Utpatti Katha | माँ धूमावती उत्पत्ति कथा

धूमावती उत्पत्ति कथा, पाठ विधि और लाभों को जानकर आप इस देवी के रहस्यमय स्वरूप को समझ सकते हैं और जीवन की बाधाओं से मुक्ति पा सकते हैं। संपूर्ण कथा, विधि और लाभों का विस्तृत विवरण आपको माँ धूमावती की कृपा प्राप्त करने का मार्ग दिखाएगा।

23 Jun 2026133
कालाष्टमी व्रत – अध्याय 5: भक्ति का फल और सीख

कालाष्टमी व्रत – अध्याय 5: भक्ति का फल और सीख

कालाष्टमी व्रत का अध्याय 5 — भक्ति का फल और सीख। यह अंतिम अध्याय बताता है कि कालाष्टमी व्रत रखने से प्राप्त होने वाले परिणाम और इससे मिली सीख क्या है।

08 Jun 2026158
कालाष्टमी व्रत – अध्याय 4: दिव्य हस्तक्षेप और आशीर्वाद

कालाष्टमी व्रत – अध्याय 4: दिव्य हस्तक्षेप और आशीर्वाद

कालाष्टमी व्रत का अध्याय 4 — दिव्य हस्तक्षेप और आशीर्वाद। अध्याय चार में, भगवान भैरव भक्त की अटूट भक्ति से प्रसन्न होते हैं और उसे अपना आशीर्वाद देते हैं।

08 Jun 2026115

🕉 पंचांग ज्ञान

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पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कालगणना की प्राचीन पद्धति है, जो तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण — इन पाँच अंगों पर आधारित है। इससे शुभ मुहूर्त, व्रत-त्योहार और दैनिक ग्रह स्थिति का पता चलता है।

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तिथि क्या है?

तिथि चंद्रमा और सूर्य के बीच के कोणीय अंतर से तय होती है। एक माह में 30 तिथियाँ होती हैं — 15 शुक्ल पक्ष और 15 कृष्ण पक्ष में। व्रत-पूजा के लिए सही तिथि जानना आवश्यक है।

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नक्षत्र क्या है?

नक्षत्र आकाश में चंद्रमा के पथ के 27 भाग हैं। चंद्रमा प्रतिदिन एक नक्षत्र बदलता है, और प्रत्येक नक्षत्र का अपना देवता व स्वभाव होता है जो दिन की ऊर्जा को प्रभावित करता है।

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राहु काल क्या है?

राहु काल दिन का वह अशुभ समयखंड है जब नया कार्य, विवाह, यात्रा या महत्वपूर्ण निर्णय नहीं लेने चाहिए। यह हर दिन और हर शहर में अलग समय पर आता है।

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शुभ मुहूर्त क्या है?

शुभ मुहूर्त वह समय है जब तिथि, नक्षत्र, योग और करण अनुकूल स्थिति में हों। ब्रह्म मुहूर्त, अभिजित और गोधूलि मुहूर्त इसके प्रमुख उदाहरण हैं।

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चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया दिन और रात को 8-8 भागों में बाँटकर शुभ-अशुभ समय बताने की पद्धति है। अमृत, शुभ और लाभ चौघड़िया सबसे शुभ माने जाते हैं।

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