शतनामावली

108 Names of Lord Narayana – भगवान नारायण के 108 नाम

Tilak Kathayein25 Feb 20251,376 views📖 1 min read
भगवान नारायण के 108 नाम
भगवान नारायण के नामों का महत्व (Importance of Lord Narayan Names) भगवान नारायण, जिन्हें भगवान विष्णु के रूप में भी जाना जाता है, सृष्टि के पालनहार हैं। उनके 108 पवित्र

भगवान नारायण के नामों का महत्व (Importance of Lord Narayan’s Names)

भगवान नारायण, जिन्हें भगवान विष्णु के रूप में भी जाना जाता है, सृष्टि के पालनहार हैं। उनके 108 पवित्र नामों का जप करने से जीवन में शांति, समृद्धि, और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। यह नाम भक्तों के लिए आशीर्वाद स्वरूप हैं और आत्मिक शुद्धि में सहायक होते हैं।

108 नामों का महत्व (Why Are There 108 Names of Lord Vishnu?)

संस्कृत ग्रंथों के अनुसार, संख्या 108 को अत्यंत पवित्र माना जाता है। यह ब्रह्मांड की आध्यात्मिक एवं खगोलीय संरचना को दर्शाती है। भगवान विष्णु के 108 नामों का जाप करने से:

  • मानसिक शांति मिलती है।
  • सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।
  • जीवन की बाधाएँ दूर होती हैं।
  • मोक्ष प्राप्ति का मार्ग खुलता है।

भगवान नारायण के 108 नाम -108 Names of Lord Narayan

विष्णुॐ विष्णवे नमः।जो परम परमेश्वर हैं
लक्ष्मीपतिॐ लक्ष्मीपतये नमः।जो देवी लक्ष्मी के पति हैं
कृष्णॐ कृष्णाय नमः।जो श्याम वर्ण से युक्त हैं
वैकुण्ठॐ वैकुण्ठाय नमः।जो वैकुण्ठ में निवास करने वाले हैं
गरुडध्वजॐ गरुडध्वजाय नमः।गरुड़ जिनकी सवारी है
परब्रह्मॐ परब्रह्मणे नमः।जो पराशक्ति परब्रह्म परमात्मा हैं
जगन्नाथॐ जगन्नाथाय नमः।जो सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड के भगवान हैं
वासुदेवॐ वासुदेवाय नमः।जो सबमें वास करने वाले हैं
त्रिविक्रमॐ त्रिविक्रमाय नमः।जो तीनों लोकों को जीतने वाले हैं
दैत्यान्तकॐ दैत्यान्तकाय नमः।जो पापियों का नाश करने वाले हैं
मधुरिपुॐ मधुरिपवे नमः।जो मधु नामक राक्षस का विनाश करने वाले हैं
तार्क्ष्यवाहनॐ तार्क्ष्यवाहनाय नमः।तार्क्ष्य अर्थात् गरुड़ जिनकी सवारी है
सनातनॐ सनातनाय नमः।जो शाश्वत प्रभु हैं
नारायणॐ नारायणाय नमः।जो सभी के आश्रय हैं
पद्मनाभॐ पद्मनाभाय नमः।जो कमल के आकार की नाभि वाले भगवान हैं
हृषीकेशॐ हृषीकेशाय नमः।जो सभी इंद्रियों के स्वामी हैं
सुधाप्रदॐ सुधाप्रदाय नमः।जो अमृत प्रदान करने वाले हैं
माधवॐ माधवाय नमः।जो ज्ञान के भण्डार हैं
पुण्डरीकाक्षॐ पुण्डरीकाक्षाय नमः।जो कमल के समान नेत्र वाले हैं
स्थितिकर्ताॐ स्थितिकर्त्रे नमः।जो जगत की स्थिति सुनिश्चित करते हैं
परात्परॐ परात्पराय नमः।जो पराशक्ति परब्रह्म परमात्मा हैं
वनमालीॐ वनमालिने नमः।जो वनपुष्पों की मालाओं को धारण करते हैं
यज्ञरूपॐ यज्ञरूपाय नमः।जो यज्ञरूपी भगवान हैं
चक्रपाणिॐ चक्रपाणये नमः।जो सुदर्शन चक्रधारी हैं
गदाधरॐ गदाधराय नमः।जो गदाधारी हैं
उपेन्द्रॐ उपेन्द्राय नमः।जो इन्द्र के भ्राता हैं
केशवॐ केशवाय नमः।जो सुन्दर बालों वाले अथवा केशी का वध करने वाले हैं
हंसॐ हंसाय नमः।हंस जिनकी सवारी है
समुद्रमथनॐ समुद्रमथनाय नमः।जो समुद्र का मन्थन करने वाले हैं
हरिॐ हरये नमः।जो प्रकृति के स्वामी हैं
गोविन्दॐ गोविन्दाय नमः।जो गायों और प्रकृति को प्रसन्न करते हैं
ब्रह्मजनकॐ ब्रह्मजनकाय नमः।जिन्होंने भगवान ब्रह्मा को उत्पन्न किया
कैटभासुरमर्दनॐ कैटभासुरमर्दनाय नमः।जिन्होंने कैटभ नामक असुर का वध किया
श्रीधरॐ श्रीधराय नमः।जिनके पास देवी लक्ष्मी हैं
कामजनकॐ कामजनकाय नमः।जो इच्छाओं को पूरा करने वाले हैं
शेषशायीॐ शेषशायिने नमः।जो शेषनाग पर विश्राम करने वाले हैं
चतुर्भुजॐ चतुर्भुजाय नमः।जो चार भुजाओं वाले हैं
पाञ्चजन्यधरॐ पाञ्चजन्यधराय नमः।जिनके पास पाञ्चजन्य नामक शङ्ख हैं
श्रीमान्ॐ श्रीमते नमः।जिनके पास श्री अर्थात् लक्ष्मी जी हैं
शार्ङ्गपाणिॐ शार्ङ्गपाणये नमः।जो धनुष धारण करने वाले हैं
जनार्दनॐ जनार्दनाय नमः।जो दयापूर्वक दूसरों की सहायता करने वाले हैं
पीताम्बरधरॐ पीताम्बरधराय नमः।जो पीले वस्त्र धारण करते हैं
देवॐ देवाय नमः।जो हम सभी के आराध्य देव हैं
सूर्यचन्द्रविलोचनॐ सूर्यचन्द्रविलोचनाय नमः।जिनकी आँखें सूर्य एवं चन्द्र के समान हैं
मत्स्यरूपॐ मत्स्यरूपाय नमः।भगवान मत्स्य जो भगवान विष्णु के अवतार हैं
कूर्मतनुॐ कूर्मतनवे नमः।भगवान कूर्म जो भगवान विष्णु के अवतार हैं
क्रोडरूपॐ क्रोडरूपाय नमः।भगवान वराह जो भगवान विष्णु के अवतार हैं
नृकेसरिॐ नृकेसरिणे नमः।भगवान नरसिंह जो भगवान विष्णु के अवतार हैं
वामनॐ वामनाय नमः।भगवान वामन जो भगवान विष्णु के अवतार हैं
भार्गवॐ भार्गवाय नमः।भगवान परशुराम जो भगवान विष्णु के अवतार हैं
रामॐ रामाय नमः।भगवान राम जो भगवान विष्णु के अवतार हैं
बलीॐ बलिने नमः।जो अत्यन्त शक्तिशाली हैं
कल्किॐ कल्किने नमः।भगवान कल्कि जो कलियुग के अन्त में भगवान विष्णु के अवतार होंगे
हयाननॐ हयाननाय नमः।भगवान हयग्रीव जो भगवान विष्णु के अवतार हैं
विश्वम्भरॐ विश्वम्भराय नमः।जो सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड के पालनहार हैं
शिशुमारॐ शिशुमाराय नमः।शिशुमार जो भगवान विष्णु का एक स्वरूप है
श्रीकरॐ श्रीकराय नमः।जो अपने भक्तों को भौतिक सुख और आध्यात्मिकता प्रदान करते है
कपिलॐ कपिलाय नमः।जो महान ऋषि कपिल हैं
ध्रुवॐ ध्रुवाय नमः।जो अपरिवर्तनशील हैं
दत्तत्रेयॐ दत्तत्रेयाय नमः।जो सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड के शिक्षक हैं
अच्युतॐ अच्युताय नमः।जिनके सामर्थ्य का कोई अन्त नहीं है
अनन्तॐ अनन्ताय नमः।जिनका कोई अन्त नहीं है
मुकुन्दॐ मुकुन्दाय नमः।जो मुक्ति प्रदान करने वाले हैं
दधिवामनॐ दधिवामनाय नमः।दधिवामन जो भगवान विष्णु के स्वरूप हैं
धन्वन्तरिॐ धन्वन्तरये नमः।जो समुद्र मंथन के बाद भगवान विष्णु के आंशिक अवतार के रूप मे प्रकट हुये
श्रीनिवासॐ श्रीनिवासाय नमः।जो देवी लक्ष्मी के स्थायी निवास हैं
प्रद्युम्नॐ प्रद्युम्नाय नमः।प्रद्युम्न जो प्रेम के देवता हैं तथा भगवान विष्णु के ही स्वरूप हैं
पुरुषोत्तमॐ पुरुषोत्तमाय नमः।जो सर्वोत्तम पुरुष हैं
श्रीवत्सकौस्तुभधरॐ श्रीवत्सकौस्तुभधराय नमः।जो श्रीवत्स चिह्न और कौस्तुभ मणि धारण करने वाले हैं
मुरारातिॐ मुरारातये नमः।जो मुरा अथवा राक्षसों के विध्वंसक हैं
अधोक्षजॐ अधोक्षजाय नमः।जो इन्द्रियों से प्राप्त होने वाले ज्ञान से परे हैं
ऋषभॐ ऋषभाय नमः।भगवान ऋषभ जो भगवान विष्णु के अवतार हैं
मोहिनीरूपधारीॐ मोहिनीरूपधारिणे नमः।जिन्होंने मोहिनी रूप में अवतार लिया
सङ्कर्षणॐ सङ्कर्षणाय नमः।भगवान बलराम जो भगवान विष्णु के अवतार हैं
पृथुॐ पृथवे नमः।राजा पृथु जो भगवान विष्णु के अवतार हैं
क्षीराब्धिशायीॐ क्षीराब्धिशायिने नमः।जो क्षीरसागर में शयन करते हैं
भूतात्माॐ भूतात्मने नमः।जो सभी प्राणियों के आत्मा हैं
अनिरुद्धॐ अनिरुद्धाय नमः।जो अजेय, निर्विरोध, अनियन्त्रित और बिना बाधाओं वाले हैं
भक्तवत्सलॐ भक्तवत्सलाय नमः।जो अपने भक्तों से अगाध प्रेम रखते हैं
नरॐ नराय नमः।जो पथप्रदर्शक हैं
गजेन्द्रवरदॐ गजेन्द्रवरदाय नमः।जिन्होंने गजेन्द्र को आशीर्वाद दिया
त्रिधामॐ त्रिधाम्ने नमः।जो तीनों लोकों में विद्यमान हैं
भूतभावनॐ भूतभावनाय नमः।जो पृथ्वी आदि भूतों के उत्पत्ति तथा वृद्धि कर्ता हैं
श्वेतद्वीपसुवास्तव्यॐ श्वेतद्वीपसुवास्तव्याय नमः।जो श्वेतद्वीप में निवास करते हैं
सनकादिमुनिध्येयॐ सनकादिमुनिध्येयाय नमः।जो सनकादि मुनियों के द्वारा भी ध्येय हैं
भगवान्ॐ भगवते नमः।जो परम पिता परमेश्वर हैं
शङ्करप्रियॐ शङ्करप्रियाय नमः।जो भगवान शङ्कर को प्रिय हैं
नीलकान्तॐ नीलकान्ताय नमः।जो नील वर्ण की आभा वाले हैं
धराकान्तॐ धराकान्ताय नमः।जो पृथ्वी का पालन पोषण करते हैं
वेदात्माॐ वेदात्मने नमः।जो स्वयं वेदस्वरूप हैं
बादरायणॐ बादरायणाय नमः।श्री वेदव्यास जी जो भगवान विष्णु के अवतार हैं
भागीरथीजन्मभूमिपादपद्मॐ भागीरथीजन्मभूमिपादपद्माय नमः।जिनके चरणों से गंगा की उत्पत्ति हुयी
सतां प्रभुॐ सतां प्रभवे नमः।जो सज्जनों के स्वामी हैं
स्वभुॐ स्वभुवे नमः।जो स्वयं उत्पन्न हैं तथा संसार का पालन करते हैं
विभुॐ विभवे नमः।जो सर्वत्र व्याप्त हैं
घनश्यामॐ घनश्यामाय नमः।भगवान कृष्ण जो भगवान विष्णु के अवतार हैं
जगत्कारणॐ जगत्कारणाय नमः।जो सम्पूर्ण जगत के कारणस्वरूप हैं
अव्ययॐ अव्ययाय नमः।जो अजेय और अविनाशी परमात्मा हैं
बुद्धावतारॐ बुद्धावताराय नमः।भगवान बुद्ध जो भगवान विष्णु के अवतार हैं
शान्तात्माॐ शान्तात्मने नमः।जो अत्यन्त शान्त और निर्मल हैं
लीलामानुषविग्रहॐ लीलामानुषविग्रहाय नमः।जो मनुष्य के रूप में अवतार लेकर लीला करते हैं
दामोदरॐ दामोदराय नमः।भगवान कृष्ण जिन्हें माता यशोदा ओखल से बाँध नहीं पायी थीं
विराड्रूपॐ विराड्रूपाय नमः।भगवान कृष्ण जिन्होंने विराट रूप का दर्शन दिया
भूतभव्यभवत्प्रभुॐ भूतभव्यभवत्प्रभवे नमः।जो भूत, भविष्य और वर्तमान सभी में व्याप्त हैं
आदिदेवॐ आदिदेवाय नमः।जो देवों में आदि देव हैं
देवदेवॐ देवदेवाय नमः।जो देवों के देव हैं
प्रह्लादपरिपालकॐ प्रह्लादपरिपालकाय नमः।जिन्होंने भक्त प्रह्लाद की रक्षा की
श्रीमहाविष्णुॐ श्रीमहाविष्णवे नमः।जो श्री महाविष्णु हैं

🕉

आज का पंचांग 28 जुलाई 2026

शुभ मुहूर्त, चोघड़िया, राशिफल और ग्रह स्थिति की पूरी जानकारी के लिए

शेयर करें:

संबंधित लेख

ॐ जय जगदीश हरे
आरती

Om Jai Jagdish Hare | ॐ जय जगदीश हरे

ॐ जय जगदीश हरे आरती भगवान विष्णु को समर्पित है, जिसकी सरल विधि और भक्तिपूर्ण गायन से आध्यात्मिक शांति मिलती है। यह आरती घर में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है।

09 May 2026169
गरुड़ पुराण
ग्रंथ

गरुड़ पुराण – अध्याय 5: मोक्ष और भक्ति

गरुड़ पुराण का अध्याय 5 — मोक्ष और भक्ति। यह अध्याय मोक्ष प्राप्त करने के मार्ग, भगवान विष्णु की भक्ति के महत्व और ज्ञान की प्राप्ति पर जोर देकर गरुड़ पुराण का समापन करता है।

13 Apr 2026446
गरुड़ पुराण
ग्रंथ

गरुड़ पुराण – अध्याय 4: पुनर्जन्म और कर्म

गरुड़ पुराण का अध्याय 4 — पुनर्जन्म और कर्म। यह अध्याय कर्म के सिद्धांत और पुनर्जन्म के चक्र पर केंद्रित है, जिसमें अच्छे और बुरे कर्मों के परिणाम विस्तार से बताए गए हैं।

13 Apr 2026316
गरुड़ पुराण
ग्रंथ

गरुड़ पुराण – अध्याय 3: मृतकों के लिए कर्मकाण्ड

गरुड़ पुराण का अध्याय 3 — मृतकों के लिए कर्मकाण्ड। यह अध्याय मृतकों के लिए किए जाने वाले विभिन्न अनुष्ठानों, जैसे कि श्राद्ध और पिंडदान के महत्व पर प्रकाश डालता है, जिससे आत्मा को शांति मिलती है।

13 Apr 2026314
गरुड़ पुराण
ग्रंथ

गरुड़ पुराण – अध्याय 2: मृत्यु के बाद की यात्रा

गरुड़ पुराण का अध्याय 2 — मृत्यु के बाद की यात्रा। इस अध्याय में मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा का वर्णन है, जिसमें यमलोक का मार्ग और विभिन्न प्रकार की यातनाएँ शामिल हैं।

13 Apr 2026334
Garuda Purana - Chapter 1
ग्रंथ

गरुड़ पुराण – अध्याय 1: गरुड़ के प्रश्न, विष्णु के उत्तर

गरुड़ पुराण का अध्याय 1 — गरुड़ के प्रश्न, विष्णु के उत्तर। गरुड़ भगवान विष्णु से जीवन, मृत्यु, पुनर्जन्म और मोक्ष से संबंधित प्रश्न पूछते हैं, जिससे गरुड़ पुराण की शुरुआत होती है।

13 Apr 2026419