
Parivartini Ekadashi 2026: Date, Parana Time & Vrat Katha
भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को 'परिवर्तिनी एकादशी', 'पार्श्व एकादशी' अथवा 'वामन एकादशी' कहा जाता है। चतुर्मास के शयन काल के दौरान इसी पावन तिथि पर क्षीरसागर में योगनिद्रा में लीन भगवान श्रीहरि विष्णु करवट बदलते हैं, इसलिए इसे परिवर्तिनी एकादशी कहते हैं। ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार, इसी दिन भगवान विष्णु ने वामन अवतार धारण कर दैत्यराज बलि के अहंकार का दमन किया था। इस दिन भगवान वामन की पूजा और व्रत रखने से वाजपेय यज्ञ के समान पुण्य प्राप्त होता है तथा समस्त पापों का क्षय होता है।

गणेश जी को प्रथम पूज्य क्यों कहा जाता है? जानें पूरी पौराणिक कथा और रहस्य
हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य या पूजा की शुरुआत अक्सर **भगवान गणेश के स्मरण** से की जाती है। इसके पीछे गणेश जी और उनके भाई कार्तिकेय से जुड़ी एक प्रसिद्ध पौराणिक कथा है, जिसमें दोनों के बीच संसार की परिक्रमा करने की प्रतियोगिता हुई थी। गणेश जी ने बुद्धि और माता-पिता के प्रति अपनी श्रद्धा का परिचय देते हुए शिव-पार्वती की परिक्रमा की और विजयी हुए। प्रसन्न होकर उन्हें प्रथम पूज्य होने का वरदान मिला। इस लेख में जानें गणेश जी की प्रथम पूजा का कारण, पूरी पौराणिक कथा और इसके पीछे छिपा गहरा आध्यात्मिक संदेश।


























