Tilak Kathayein – पंचांग, हिंदू कथाएँ, आरती, चालीसा और मंत्र

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दीपावली पर उल्लू और माता लक्ष्मी: चंचल मन व विवेक का रहस्य

सनातन धर्म में धन और ऐश्वर्य की अधिष्ठात्री देवी महालक्ष्मी का वाहन उल्लू (उलूक) विवेक, दृष्टि और आत्म-संयम का गहरा प्रतीक है। सामान्यतः दिन के उजाले में न देख पाने और रात्रि के घोर अंधकार में सूक्ष्म दृष्टि रखने वाला उल्लू यह संदेश देता है कि भौतिक धन मनुष्य को अंधा (अहंकारी) बना सकता है। जब तक धन के साथ विवेक और ज्ञान का संतुलन न हो, तब तक वह विनाशकारी सिद्ध होता है। दीपावली की महानिशा में उल्लू पर सवार माता लक्ष्मी का पूजन यह प्रेरणा देता है कि सांसारिक माया के अंधकार में भी मनुष्य को अपने सद्गुणों और विवेक की आंखें खुली रखनी चाहिए।

Tilak Kathayein01 Nov 2026
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धनतेरस पर यम का दीया क्यों जलाते हैं? जानिए सही विधि व रहस्य

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी (धनतेरस) की शाम को दक्षिण दिशा में मृत्यु के देवता यमराज के निमित्त जो विशेष दीपक प्रज्वलित किया जाता है, उसे 'यमदीप' (यम का दीया) कहते हैं। स्कंद पुराण और पद्म पुराण के अनुसार, धनतेरस के दिन यमराज के निमित्त चार मुखी दीपदान करने से परिवार के सदस्यों को अकाल मृत्यु, दुर्घटना और यम यातनाओं के भय से मुक्ति मिलती है। यह दीपक घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके अन्न की ढेरी पर रखा जाता है।

Tilak Kathayein27 Oct 2026

नवीनतम लेख

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त्योहार

भाई दूज 2026: यम द्वितीया कथा, तिलक मुहूर्त व यम तर्पण विधि

कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को 'भाई दूज', 'यम द्वितीया' अथवा 'भ्रातृ द्वितीया' कहा जाता है। यह पावन पर्व पांच दिवसीय दीपोत्सव का समापन दिवस है। स्कंद पुराण और भविष्योत्तर पुराण के अनुसार, इसी दिन मृत्यु के देवता यमराज अपनी बहन यमुना के सादर निमंत्रण पर उनके घर भोजन करने गए थे। बहन यमुना के प्रेम से अभिभूत होकर यमराज ने वरदान दिया था कि जो भाई इस पावन तिथि पर अपनी बहन के घर जाकर उसके हाथ का बना भोजन ग्रहण करेगा और तिलक लगवाएगा, उसे अकाल मृत्यु और यम यातना का भय नहीं रहेगा।

04 Nov 202615
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कहानियाँ

अर्जुन की 4 पत्नियां कौन थीं? द्रौपदी से उलूपी तक जानें पूरी महाभारत कथा

महाभारत में अर्जुन को महान धनुर्धर और पांडवों के प्रमुख योद्धा के रूप में जाना जाता है, लेकिन उनके **चार विवाहों** की कथा भी उतनी ही रोचक है। अर्जुन का विवाह **द्रौपदी, नागकन्या उलूपी, मणिपुर की राजकुमारी चित्रांगदा और सुभद्रा** से हुआ था। प्रत्येक विवाह के पीछे अलग परिस्थितियां, परंपराएं और महत्वपूर्ण घटनाएं जुड़ी थीं। इस लेख में जानें अर्जुन की चारों पत्नियों की कहानी, उनसे जुड़ी संतान, विवाह के कारण और महाभारत की कथा में उनके महत्वपूर्ण योगदान की सम्पूर्ण जानकारी।

03 Nov 202618
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कथाएँ

गोवर्धन पूजा 2026: अन्नकूट भोग, पूजा विधि व इंद्र मानमर्दन कथा

कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को 'गोवर्धन पूजा' एवं 'अन्नकूट महोत्सव' मनाया जाता है। श्रीमद्भागवत महापुराण के अनुसार, द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण ने देवराज इंद्र के मिथ्या अहंकार का मान-मर्दन करने और ब्रजवासियों को प्रकृति (पर्वत, वृक्ष, गाय एवं जल) की प्रत्यक्ष पूजा की ओर उन्मुख करने के लिए अपनी कनिष्ठिका (छोटी) उंगली पर विशाल गोवर्धन पर्वत को 7 दिनों तक उठाए रखा था। इस पावन अवसर पर घर के आंगन में गाय के गोबर से गिरिराज गोवर्धन की आकृति बनाकर पूजा की जाती है और भगवान को विविध प्रकार के अन्न, शाक व मिष्ठान्न से युक्त 'अन्नकूट' व '56 भोग' अर्पित किए जाते हैं।

02 Nov 202618
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दीपावली पर उल्लू और माता लक्ष्मी: चंचल मन व विवेक का रहस्य

सनातन धर्म में धन और ऐश्वर्य की अधिष्ठात्री देवी महालक्ष्मी का वाहन उल्लू (उलूक) विवेक, दृष्टि और आत्म-संयम का गहरा प्रतीक है। सामान्यतः दिन के उजाले में न देख पाने और रात्रि के घोर अंधकार में सूक्ष्म दृष्टि रखने वाला उल्लू यह संदेश देता है कि भौतिक धन मनुष्य को अंधा (अहंकारी) बना सकता है। जब तक धन के साथ विवेक और ज्ञान का संतुलन न हो, तब तक वह विनाशकारी सिद्ध होता है। दीपावली की महानिशा में उल्लू पर सवार माता लक्ष्मी का पूजन यह प्रेरणा देता है कि सांसारिक माया के अंधकार में भी मनुष्य को अपने सद्गुणों और विवेक की आंखें खुली रखनी चाहिए।

01 Nov 202628
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कृष्ण की 16,108 पत्नियाँ क्यों थीं? असली कहानी और शास्त्रों में वर्णित रहस्य

**श्रीकृष्ण की 16,108 पत्नियों** की कथा हिंदू धर्म की सबसे चर्चित और अक्सर गलत समझी जाने वाली कथाओं में से एक है। शास्त्रीय परंपरा के अनुसार, नारकासुर के वध के बाद कृष्ण ने उसकी कैद से मुक्त हुई **16,100 महिलाओं** को सामाजिक अपमान से बचाने के लिए स्वीकार किया। इसके अतिरिक्त उनकी **8 प्रमुख रानियाँ** थीं, जिन्हें अष्टभार्या कहा जाता है। इस लेख में जानें 16,108 संख्या का रहस्य, नारकासुर की पूरी कथा और श्रीकृष्ण के इन विवाहों का धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व।

31 Oct 202633
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धनतेरस पर यम का दीया क्यों जलाते हैं? जानिए सही विधि व रहस्य

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी (धनतेरस) की शाम को दक्षिण दिशा में मृत्यु के देवता यमराज के निमित्त जो विशेष दीपक प्रज्वलित किया जाता है, उसे 'यमदीप' (यम का दीया) कहते हैं। स्कंद पुराण और पद्म पुराण के अनुसार, धनतेरस के दिन यमराज के निमित्त चार मुखी दीपदान करने से परिवार के सदस्यों को अकाल मृत्यु, दुर्घटना और यम यातनाओं के भय से मुक्ति मिलती है। यह दीपक घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके अन्न की ढेरी पर रखा जाता है।

27 Oct 202657
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शरद पूनम: खीर रखने का समय, पूजा विधि व पौराणिक कथा

हिन्दू पंचांग के अनुसार आश्विन शुक्ल पूर्णिमा को 'शरद पूर्णिमा' या 'शरद पूनम' (कोजागरी पूर्णिमा) कहा जाता है। मान्यता है कि इस पावन रात्रि को चंद्रमा पृथ्वी के सर्वाधिक निकट होता है और अपनी संपूर्ण 16 कलाओं से अमृत की किरणें बरसाता है। इस रात खुले आकाश के नीचे गाय के दूध और चावल से बनी खीर (गुजरात में दूध-पौंआ) रखने की परंपरा है। मध्यरात्रि में धन की देवी माता लक्ष्मी "को जागर्ति" (कौन जाग रहा है?) पूछते हुए पृथ्वी पर विचरण करती हैं और जागरण करने वाले भक्तों को अखंड ऐश्वर्य का वरदान देती हैं।

25 Oct 202671
सभी पापों के बाद भी शकुनि को स्वर्ग क्यों मिला? जानिए रहस्य
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सभी पापों के बाद भी शकुनि को स्वर्ग क्यों मिला? जानिए रहस्य

महाभारत के 'स्वर्गारोहण पर्व' के अनुसार, शकुनि को स्वर्ग मिलने के तीन प्रमुख कारण हैं। पहला, उसने कुरुक्षेत्र की पावन भूमि पर क्षत्रिय धर्म का पालन करते हुए सहदेव के विरुद्ध सम्मुख लड़कर वीरगति प्राप्त की थी। दूसरा, कर्मफल के शास्त्रीय नियम के अनुसार, जिस जीव के पाप अधिक और पुण्य बहुत कम होते हैं, उसे अपने अल्प पुण्यों का भोग करने के लिए पहले कुछ समय के लिए स्वर्ग प्राप्त होता है, जिसके समाप्त होने पर वह दीर्घकालीन नरक में जाता है। तीसरा, यह युधिष्ठिर के अहंकार और द्वेष की शुद्धि के लिए देवराज इंद्र और धर्मराज द्वारा रची गई एक मायावी परीक्षा थी।

25 Oct 202670
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कहानियाँ

5 अप्सराओं का उद्धार: जब अर्जुन ने तोड़ा मगरमच्छ का श्राप

महाभारत के अनुसार, अपने 12 वर्ष के तीर्थाटन के दौरान अर्जुन ने दक्षिण के पंच तीर्थों में प्रवेश कर मगरमच्छ रूपी पाँचों शापित अप्सराओं (वर्गा, सौरभेयी, समीची, बुद्बुदा और लता) को जल से बाहर खींचकर उनका उद्धार किया। एक ऋषि के 100 वर्ष पुराने श्राप से मुक्त होकर वे पुनः अपने दिव्य रूप में लौट आईं, जिसके बाद ये पवित्र सरोवर 'नारी तीर्थ' के नाम से प्रसिद्ध हुए।

24 Oct 202675
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कथाएँ

भीष्म पितामह को इच्छामृत्यु का वरदान कैसे मिला? जानें महाभारत की कथा

**भीष्म पितामह**, जिन्हें जन्म के समय देवव्रत कहा जाता था, अपनी महान प्रतिज्ञा और त्याग के लिए प्रसिद्ध हैं। जब उन्होंने अपने पिता राजा शांतनु के सुख और सत्यवती से उनके विवाह के लिए आजीवन ब्रह्मचर्य तथा हस्तिनापुर के सिंहासन पर अपना अधिकार छोड़ने की भयंकर प्रतिज्ञा ली, तब शांतनु उनसे अत्यंत प्रसन्न हुए। उन्होंने देवव्रत को ऐसा वरदान दिया कि **मृत्यु उनकी इच्छा के अधीन रहेगी**। इसी कारण भीष्म युद्धभूमि में बाणों की शय्या पर पड़े रहने के बाद भी अपनी इच्छानुसार प्राण त्याग सके। इस लेख में जानें इच्छामृत्यु के वरदान की पूरी कथा और इसका महाभारत में महत्व।

18 Oct 202694
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गरुड़ पुराण

रौरव नरक क्या है? जानिए रुरु जीव, भयानक सजा और गरुड़ पुराण की सीख | Tilak Kathayein

रौरव नरक (Raurava Narak) गरुड़ पुराण और श्रीमद्भागवत पुराण में वर्णित सबसे भयानक और कष्टदायी नरकों में से एक है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, नरक का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि जीवात्मा को उसके किए गए दुष्कर्मों का प्रायश्चित कराकर शुद्धि की ओर ले जाना है।

03 Oct 2026110
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गरुड़ पुराण की कथाएं आज क्यों जरूरी हैं? जानिए महत्व व सीख

गरुड़ पुराण केवल मृत्यु उपरांत की यात्रा या नरक की यातनाओं का विवरण नहीं है, बल्कि यह वर्तमान जीवन में नैतिकता, दया, और सदाचार से जीने का एक आध्यात्मिक मार्गदर्शक है। आधुनिक युग में जब भौतिक सुखों के पीछे भागते हुए लोग नैतिक मूल्य भूल रहे हैं, तब गरुड़ पुराण का 'कर्मफल का सिद्धांत' मनुष्य को जिम्मेदार, संवेदनशील और न्यायप्रिय बनने की गहरी सीख देता है।

30 Sep 2026102
Stuti - Namo Chandike Ho Chamund Mata | नमो चंडिके हो चामुंड माता

Stuti - Namo Chandike Ho Chamund Mata | नमो चंडिके हो चामुंड माता

'नमो चंडिके, नमो चामुंडाय नमः' मंत्र जाप से शक्ति और सुरक्षा मिलती है, जो दुर्गा सप्तशती में वर्णित है और देवी चामुंडा के दिव्य स्वरूप की आराधना द्वारा आध्यात्मिक उन्नति और विघ्न निवारण का मार्ग प्रशस्त करता है.

26 May 2026328
ॐ जय जगदीश हरे

Om Jai Jagdish Hare | ॐ जय जगदीश हरे

ॐ जय जगदीश हरे आरती भगवान विष्णु को समर्पित है, जिसकी सरल विधि और भक्तिपूर्ण गायन से आध्यात्मिक शांति मिलती है। यह आरती घर में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है।

09 May 2026347
जय अम्बे गौरी

Jai Ambe Gauri | जय अम्बे गौरी

जय अम्बे गौरी आरती के बोल माता दुर्गा की स्तुति हैं, जिसे विधिपूर्वक गाने से भक्तों को आध्यात्मिक शांति और मनोकामना पूर्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यह शक्तिशाली आरती नवरात्रि में विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है और इसका जप भव बाधाओं को दूर करता है।

09 May 2026466
श्री राम स्तुति: श्री रामचंद्र कृपालु भजमन – संपूर्ण पाठ, सरल अर्थ और आध्यात्मिक महत्व

श्री राम स्तुति: श्री रामचंद्र कृपालु भजमन – संपूर्ण पाठ, सरल अर्थ और आध्यात्मिक महत्व

श्री रामचंद्र कृपालु भजमन गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित भगवान श्रीराम की एक लोकप्रिय स्तुति है। जानें इसका संपूर्ण पाठ, हिंदी अर्थ, धार्मिक महत्व और पाठ के लाभ।

20 Jul 2026239
हे दुःख भंजन मारुती नंदन | हनुमान भजन लिरिक्स और महत्व

हे दुःख भंजन मारुती नंदन | हनुमान भजन लिरिक्स और महत्व

हे दुःख भंजन मारुती नंदन" भगवान हनुमान जी को समर्पित एक प्रसिद्ध भक्तिमय भजन है। इस भजन में भक्त पवनपुत्र हनुमान जी से दुखों को दूर करने, शक्ति और साहस प्रदान करने की प्रार्थना करता है। पढ़ें हनुमान भजन के सुंदर बोल और इसका महत्व।

27 Jun 2026408
उठो सोने वालों सबेरा हुआ है | वंशीधर शुक्ल का प्रेरणादायक देशभक्ति भजन<

उठो सोने वालों सबेरा हुआ है | वंशीधर शुक्ल का प्रेरणादायक देशभक्ति भजन

"उठो सोने वालों सबेरा हुआ है" वंशीधर शुक्ल द्वारा रचित एक प्रेरणादायक देशभक्ति भजन है। इस भजन में नई सुबह, आशा, जागृति और देश प्रेम का संदेश दिया गया है। पढ़ें इस प्रसिद्ध भजन के बोल, भावार्थ और इससे मिलने वाली प्रेरणा।

21 Jun 2026359
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दीपावली पर उल्लू और माता लक्ष्मी: चंचल मन व विवेक का रहस्य

सनातन धर्म में धन और ऐश्वर्य की अधिष्ठात्री देवी महालक्ष्मी का वाहन उल्लू (उलूक) विवेक, दृष्टि और आत्म-संयम का गहरा प्रतीक है। सामान्यतः दिन के उजाले में न देख पाने और रात्रि के घोर अंधकार में सूक्ष्म दृष्टि रखने वाला उल्लू यह संदेश देता है कि भौतिक धन मनुष्य को अंधा (अहंकारी) बना सकता है। जब तक धन के साथ विवेक और ज्ञान का संतुलन न हो, तब तक वह विनाशकारी सिद्ध होता है। दीपावली की महानिशा में उल्लू पर सवार माता लक्ष्मी का पूजन यह प्रेरणा देता है कि सांसारिक माया के अंधकार में भी मनुष्य को अपने सद्गुणों और विवेक की आंखें खुली रखनी चाहिए।

01 Nov 202627
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कृष्ण की 16,108 पत्नियाँ क्यों थीं? असली कहानी और शास्त्रों में वर्णित रहस्य

**श्रीकृष्ण की 16,108 पत्नियों** की कथा हिंदू धर्म की सबसे चर्चित और अक्सर गलत समझी जाने वाली कथाओं में से एक है। शास्त्रीय परंपरा के अनुसार, नारकासुर के वध के बाद कृष्ण ने उसकी कैद से मुक्त हुई **16,100 महिलाओं** को सामाजिक अपमान से बचाने के लिए स्वीकार किया। इसके अतिरिक्त उनकी **8 प्रमुख रानियाँ** थीं, जिन्हें अष्टभार्या कहा जाता है। इस लेख में जानें 16,108 संख्या का रहस्य, नारकासुर की पूरी कथा और श्रीकृष्ण के इन विवाहों का धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व।

31 Oct 202631
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धनतेरस पर यम का दीया क्यों जलाते हैं? जानिए सही विधि व रहस्य

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी (धनतेरस) की शाम को दक्षिण दिशा में मृत्यु के देवता यमराज के निमित्त जो विशेष दीपक प्रज्वलित किया जाता है, उसे 'यमदीप' (यम का दीया) कहते हैं। स्कंद पुराण और पद्म पुराण के अनुसार, धनतेरस के दिन यमराज के निमित्त चार मुखी दीपदान करने से परिवार के सदस्यों को अकाल मृत्यु, दुर्घटना और यम यातनाओं के भय से मुक्ति मिलती है। यह दीपक घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके अन्न की ढेरी पर रखा जाता है।

27 Oct 202656
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शरद पूनम: खीर रखने का समय, पूजा विधि व पौराणिक कथा

हिन्दू पंचांग के अनुसार आश्विन शुक्ल पूर्णिमा को 'शरद पूर्णिमा' या 'शरद पूनम' (कोजागरी पूर्णिमा) कहा जाता है। मान्यता है कि इस पावन रात्रि को चंद्रमा पृथ्वी के सर्वाधिक निकट होता है और अपनी संपूर्ण 16 कलाओं से अमृत की किरणें बरसाता है। इस रात खुले आकाश के नीचे गाय के दूध और चावल से बनी खीर (गुजरात में दूध-पौंआ) रखने की परंपरा है। मध्यरात्रि में धन की देवी माता लक्ष्मी "को जागर्ति" (कौन जाग रहा है?) पूछते हुए पृथ्वी पर विचरण करती हैं और जागरण करने वाले भक्तों को अखंड ऐश्वर्य का वरदान देती हैं।

25 Oct 202670
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गोवर्धन पूजा 2026: अन्नकूट भोग, पूजा विधि व इंद्र मानमर्दन कथा

कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को 'गोवर्धन पूजा' एवं 'अन्नकूट महोत्सव' मनाया जाता है। श्रीमद्भागवत महापुराण के अनुसार, द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण ने देवराज इंद्र के मिथ्या अहंकार का मान-मर्दन करने और ब्रजवासियों को प्रकृति (पर्वत, वृक्ष, गाय एवं जल) की प्रत्यक्ष पूजा की ओर उन्मुख करने के लिए अपनी कनिष्ठिका (छोटी) उंगली पर विशाल गोवर्धन पर्वत को 7 दिनों तक उठाए रखा था। इस पावन अवसर पर घर के आंगन में गाय के गोबर से गिरिराज गोवर्धन की आकृति बनाकर पूजा की जाती है और भगवान को विविध प्रकार के अन्न, शाक व मिष्ठान्न से युक्त 'अन्नकूट' व '56 भोग' अर्पित किए जाते हैं।

02 Nov 202617
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भीष्म पितामह को इच्छामृत्यु का वरदान कैसे मिला? जानें महाभारत की कथा

**भीष्म पितामह**, जिन्हें जन्म के समय देवव्रत कहा जाता था, अपनी महान प्रतिज्ञा और त्याग के लिए प्रसिद्ध हैं। जब उन्होंने अपने पिता राजा शांतनु के सुख और सत्यवती से उनके विवाह के लिए आजीवन ब्रह्मचर्य तथा हस्तिनापुर के सिंहासन पर अपना अधिकार छोड़ने की भयंकर प्रतिज्ञा ली, तब शांतनु उनसे अत्यंत प्रसन्न हुए। उन्होंने देवव्रत को ऐसा वरदान दिया कि **मृत्यु उनकी इच्छा के अधीन रहेगी**। इसी कारण भीष्म युद्धभूमि में बाणों की शय्या पर पड़े रहने के बाद भी अपनी इच्छानुसार प्राण त्याग सके। इस लेख में जानें इच्छामृत्यु के वरदान की पूरी कथा और इसका महाभारत में महत्व।

18 Oct 202693
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4 Yugas Explained in Hindi | चार युगों की उत्पत्ति और रहस्य

हिंदू धर्मग्रंथों में समय को एक चक्र के रूप में समझाया गया है, जिसमें **सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर युग और कलियुग** क्रम से आते हैं। प्रत्येक युग में धर्म, मानव जीवन और नैतिक मूल्यों की स्थिति अलग बताई गई है। पुराणों में इन युगों की अवधि, विशेषताओं और एक युग से दूसरे युग में परिवर्तन का विस्तृत वर्णन मिलता है। इस लेख में जानें चारों युगों की उत्पत्ति, उनका क्रम, अवधि, धर्म के क्रमिक परिवर्तन और इस रहस्यमयी युगचक्र से जुड़ी पौराणिक मान्यताओं की सम्पूर्ण जानकारी।

26 Aug 2026181
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असुरों ने भगवान शिव की भक्ति क्यों की? 4 शक्तिशाली कारण और पौराणिक कथाएं

हिंदू पुराणों में कई ऐसे असुरों का वर्णन मिलता है जिन्होंने भगवान शिव की कठोर तपस्या और अनन्य भक्ति की थी। **रावण, बाणासुर और अन्य शिव भक्त असुरों** की कथाएं बताती हैं कि महादेव की भक्ति केवल देवताओं तक सीमित नहीं थी। असुरों ने शक्ति, वरदान, ज्ञान और अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए शिव की आराधना की, लेकिन उनकी कथाओं में भक्ति और अहंकार के बीच का अंतर भी स्पष्ट दिखाई देता है। इस लेख में जानें **4 प्रमुख कारण**, जिनके कारण असुर भगवान शिव के भक्त बने और उन्हें महादेव से कौन-कौन से वरदान प्राप्त हुए।

24 Aug 2026229

🕉 पंचांग ज्ञान

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पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कालगणना की प्राचीन पद्धति है, जो तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण — इन पाँच अंगों पर आधारित है। इससे शुभ मुहूर्त, व्रत-त्योहार और दैनिक ग्रह स्थिति का पता चलता है।

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तिथि क्या है?

तिथि चंद्रमा और सूर्य के बीच के कोणीय अंतर से तय होती है। एक माह में 30 तिथियाँ होती हैं — 15 शुक्ल पक्ष और 15 कृष्ण पक्ष में। व्रत-पूजा के लिए सही तिथि जानना आवश्यक है।

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नक्षत्र क्या है?

नक्षत्र आकाश में चंद्रमा के पथ के 27 भाग हैं। चंद्रमा प्रतिदिन एक नक्षत्र बदलता है, और प्रत्येक नक्षत्र का अपना देवता व स्वभाव होता है जो दिन की ऊर्जा को प्रभावित करता है।

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राहु काल क्या है?

राहु काल दिन का वह अशुभ समयखंड है जब नया कार्य, विवाह, यात्रा या महत्वपूर्ण निर्णय नहीं लेने चाहिए। यह हर दिन और हर शहर में अलग समय पर आता है।

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शुभ मुहूर्त क्या है?

शुभ मुहूर्त वह समय है जब तिथि, नक्षत्र, योग और करण अनुकूल स्थिति में हों। ब्रह्म मुहूर्त, अभिजित और गोधूलि मुहूर्त इसके प्रमुख उदाहरण हैं।

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🌞

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया दिन और रात को 8-8 भागों में बाँटकर शुभ-अशुभ समय बताने की पद्धति है। अमृत, शुभ और लाभ चौघड़िया सबसे शुभ माने जाते हैं।

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