Tilak Kathayein – पंचांग, हिंदू कथाएँ, आरती, चालीसा और मंत्र

पितृ पक्ष 2026 में दक्षिण दिशा की ओर मुख कर जल और काले तिल से तर्पण करते श्रद्धालु
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पितृ पक्ष 2026: श्राद्ध की तिथियां, तर्पण विधि और पितृ दोष निवारण के अचूक उपाय

पितृ पक्ष क्या है – सम्पूर्ण जानकारी हिंदी में 2026। TilakKathayein।

Tilak Kathayein06 Apr 2026
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ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग: Omkareshwar Temple History & Guide

मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में पवित्र नर्मदा नदी के तट पर स्थित ओंकारेश्वर महादेव मंदिर भगवान शिव के 12 पावन ज्योतिर्लिंगों में चतुर्थ (चौथा) स्थान रखता है। इस पावन तीर्थ का भौगोलिक आकार प्राकृतिक रूप से ॐ (प्रणव) जैसा बना हुआ है, जिसे शिवपुरी या मान्धाता द्वीप कहा जाता है। शिव पुराण के अनुसार, इक्ष्वाकु वंश के चक्रवर्ती राजा मान्धाता की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर महादेव यहाँ ज्योति रूप में प्रकट हुए थे। ओंकारेश्वर के साथ नर्मदा पार स्थित 'ममलेश्वर' लिंग के दर्शन करने पर ही संपूर्ण ज्योतिर्लिंग यात्रा का फल पूर्ण माना जाता है।

Tilak Kathayein06 Sep 2026

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लक्ष्मण 14 वर्ष तक क्यों नहीं सोए? जानिए निद्रा देवी का रहस्य

रामायण के अनुसार, 14 वर्ष के वनवास के दौरान भगवान राम और माता सीता की निरंतर सेवा व रक्षा करने के लिए लक्ष्मण ने निद्रा देवी से 14 वर्षों तक न सोने का वरदान मांगा था। निद्रा देवी की शर्त के अनुसार, लक्ष्मण के हिस्से की 14 वर्ष की नींद उनकी पत्नी उर्मिला ने अयोध्या के राजमहल में सोकर पूरी की। नींद पर विजय पाने के कारण ही लक्ष्मण 'गुड़ाकेश' कहलाए और इसी वरदान के बल पर वे ब्रह्मचारी व अनिद्राधारी रहकर अजेय योद्धा मेघनाद (इंद्रजीत) का वध कर सके।

24 Sep 202613
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घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग: Grishneshwar Temple Guide & Katha

महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) में प्रसिद्ध एलोरा गुफाओं के समीप स्थित घृष्णेश्वर (घुश्मेश्वर) महादेव मंदिर भगवान शिव के 12 पावन ज्योतिर्लिंगों में 12वां (अंतिम) ज्योतिर्लिंग है। शिव पुराण के अनुसार, अपनी परम भक्त 'घुश्मा' की अनन्य निष्ठा और भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उसके मृत पुत्र को पुनर्जीवित किया था तथा उसके विनम्र अनुरोध पर सदैव के लिए यहाँ 'घुश्मेश्वर/घृष्णेश्वर' ज्योतिर्लिंग के रूप में स्थापित हुए। लाल पत्थरों से निर्मित यह भव्य मंदिर मोक्षदायिनी ऊर्जा और अटूट भक्ति का पावन प्रतीक है।

22 Sep 202635
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एकादशी व्रत कथा

Parivartini Ekadashi 2026: Date, Parana Time & Vrat Katha

भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को 'परिवर्तिनी एकादशी', 'पार्श्व एकादशी' अथवा 'वामन एकादशी' कहा जाता है। चतुर्मास के शयन काल के दौरान इसी पावन तिथि पर क्षीरसागर में योगनिद्रा में लीन भगवान श्रीहरि विष्णु करवट बदलते हैं, इसलिए इसे परिवर्तिनी एकादशी कहते हैं। ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार, इसी दिन भगवान विष्णु ने वामन अवतार धारण कर दैत्यराज बलि के अहंकार का दमन किया था। इस दिन भगवान वामन की पूजा और व्रत रखने से वाजपेय यज्ञ के समान पुण्य प्राप्त होता है तथा समस्त पापों का क्षय होता है।

20 Sep 202638
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कहानियाँ

माता सीता का जन्म कैसे हुआ? एक श्राप से जुड़ी रहस्यमयी पौराणिक कथा

**माता सीता के जन्म** को लेकर रामायण और विभिन्न पुराणिक परंपराओं में अलग-अलग कथाएं मिलती हैं। एक प्रसिद्ध मान्यता में उनका संबंध **वेदवती** से जोड़ा जाता है, जिन्होंने भगवान विष्णु को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी और रावण के कारण अपने जीवन का अंत कर पुनर्जन्म लेने का संकल्प किया था। आगे चलकर सीता जी का प्राकट्य राजा जनक को खेत में हल चलाते समय हुआ। इस लेख में जानें वेदवती की कथा, श्राप और पुनर्जन्म से जुड़ी मान्यता तथा माता सीता के दिव्य जन्म का रहस्य।

19 Sep 202647
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भगवद्गीता के 7 श्लोक जो आत्मविश्वास और स्वयं पर भरोसा करना सिखाते हैं

**भगवद्गीता** केवल आध्यात्मिक ज्ञान का ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन की कठिन परिस्थितियों में सही मार्ग दिखाने वाला दिव्य संदेश है। कुरुक्षेत्र में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को ऐसे अनेक उपदेश दिए, जो आज भी आत्मविश्वास, कर्म, धैर्य और स्वयं पर विश्वास रखने की प्रेरणा देते हैं। इस लेख में जानें **भगवद्गीता के 7 शक्तिशाली श्लोक**, उनके सरल हिंदी अर्थ और जीवन में मिलने वाली ऐसी सीखें, जो कठिन समय में अपने निर्णय और क्षमता पर भरोसा करना सिखाती हैं।

17 Sep 202639
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त्योहार

गणेश चतुर्थी व्रत कथा: जानिए संपूर्ण पौराणिक कथा, पूजा विधि और व्रत का महत्व

गणेश चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित प्रमुख हिंदू पर्व है। इस दिन श्रद्धालु व्रत रखकर विधि-विधान से गणपति की पूजा करते हैं और व्रत कथा का श्रवण करते हैं। मान्यता है कि गणेश जी की पूजा करने से जीवन में आने वाले विघ्न दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। इस लेख में जानिए गणेश चतुर्थी व्रत की पौराणिक कथा, पूजा विधि, व्रत के नियम और धार्मिक महत्व।

13 Sep 202655
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गणेश जी को प्रथम पूज्य क्यों कहा जाता है? जानें पूरी पौराणिक कथा और रहस्य

हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य या पूजा की शुरुआत अक्सर **भगवान गणेश के स्मरण** से की जाती है। इसके पीछे गणेश जी और उनके भाई कार्तिकेय से जुड़ी एक प्रसिद्ध पौराणिक कथा है, जिसमें दोनों के बीच संसार की परिक्रमा करने की प्रतियोगिता हुई थी। गणेश जी ने बुद्धि और माता-पिता के प्रति अपनी श्रद्धा का परिचय देते हुए शिव-पार्वती की परिक्रमा की और विजयी हुए। प्रसन्न होकर उन्हें प्रथम पूज्य होने का वरदान मिला। इस लेख में जानें गणेश जी की प्रथम पूजा का कारण, पूरी पौराणिक कथा और इसके पीछे छिपा गहरा आध्यात्मिक संदेश।

11 Sep 202665
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कहानियाँ

कर्ण की कहानी हजारों साल पहले कैसे शुरू हुई? महाभारत से जुड़ा रहस्यमयी रहस्य

**कर्ण** महाभारत के सबसे रहस्यमयी और महान योद्धाओं में से एक थे, लेकिन उनकी कहानी केवल कुरुक्षेत्र युद्ध से शुरू नहीं होती। उनके जन्म, सूर्यदेव से संबंध, कुंती के रहस्य और जीवन में मिले शाप-वरदानों ने उनके भाग्य को जन्म से ही प्रभावित किया। विभिन्न पौराणिक परंपराओं में कर्ण से जुड़े पूर्वजन्म और प्राचीन घटनाओं की भी अलग-अलग मान्यताएं मिलती हैं। इस लेख में जानें कर्ण की कहानी की शुरुआत, उनके जन्म का रहस्य, सूर्यदेव से दिव्य संबंध और महाभारत से जुड़े उन पौराणिक प्रसंगों को, जिन्होंने उनके जीवन की दिशा तय की।

09 Sep 202665
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12 Jyotirlingas

वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग: Baidyanath Dham Guide & Katha

झारखंड के देवघर में स्थित बाबा बैद्यनाथ (वैद्यनाथ) मंदिर भगवान शिव के 12 पवित्र ज्योतिर्लिंगों में से एक है, जिसे 'कामना लिंग' के नाम से भी जाना जाता है। शिव पुराण के अनुसार, लंकापति रावण ने महादेव को लंका ले जाने के लिए यहाँ अपने दस शीश काटकर घोर तपस्या की थी। भगवान शिव ने प्रकट होकर उसके शीश पुनः जोड़ दिए और एक कुशल वैद्य की तरह उसकी चिकित्सा की, जिससे इस धाम का नाम 'वैद्यनाथ' पड़ा। सावन के पावन मास में सुल्तानगंज से गंगाजल लाकर बाबा धाम में जलाभिषेक करने का विशेष धार्मिक महत्व है।

07 Sep 202688
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12 Jyotirlingas

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग: Omkareshwar Temple History & Guide

मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में पवित्र नर्मदा नदी के तट पर स्थित ओंकारेश्वर महादेव मंदिर भगवान शिव के 12 पावन ज्योतिर्लिंगों में चतुर्थ (चौथा) स्थान रखता है। इस पावन तीर्थ का भौगोलिक आकार प्राकृतिक रूप से ॐ (प्रणव) जैसा बना हुआ है, जिसे शिवपुरी या मान्धाता द्वीप कहा जाता है। शिव पुराण के अनुसार, इक्ष्वाकु वंश के चक्रवर्ती राजा मान्धाता की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर महादेव यहाँ ज्योति रूप में प्रकट हुए थे। ओंकारेश्वर के साथ नर्मदा पार स्थित 'ममलेश्वर' लिंग के दर्शन करने पर ही संपूर्ण ज्योतिर्लिंग यात्रा का फल पूर्ण माना जाता है।

06 Sep 202690
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त्योहार

जन्माष्टमी 2026: श्रीकृष्ण को माखन-मिश्री क्यों प्रिय है? पौराणिक कथा और रहस्य

**जन्माष्टमी 2026** पर भगवान श्रीकृष्ण को माखन-मिश्री का भोग लगाने की परंपरा विशेष रूप से लोकप्रिय है। बाल गोपाल की माखन चोरी की लीलाएं उनकी बालसुलभ चंचलता और भक्तों के प्रति प्रेम को दर्शाती हैं। माखन को प्रेम और सरलता का प्रतीक माना जाता है, जबकि मिश्री मिठास और शुद्ध भाव का प्रतीक मानी जाती है। इस लेख में जानें श्रीकृष्ण को माखन-मिश्री क्यों प्रिय मानी जाती है, इससे जुड़ी पौराणिक कथा, धार्मिक महत्व और जन्माष्टमी पर भोग लगाने की परंपरा।

03 Sep 202673
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ब्लॉग

शीतला सातम 2026: Shitala Satam Date, Muhurat & Guide

सनातन धर्म में शीतला सातम (शीतला सप्तमी) आरोग्य, स्वच्छता और संक्रामक रोगों से रक्षा का पावन लोकपर्व है, जो मुख्य रूप से गुजरात और पश्चिमी भारत में श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाता है। वर्ष 2026 में शीतला सातम 3 सितंबर 2026 (गुरुवार) को मनाई जाएगी, जबकि इससे एक दिन पूर्व 2 सितंबर 2026 को रांधण छठ पर भोजन पकाया जाएगा। इस दिन घर में अग्नि या चूल्हा जलाना वर्जित होता है और माता शीतला को एक दिन पूर्व बना ठंडा (बासोड़ा) भोजन अर्पित कर प्रसाद रूप में ग्रहण किया जाता है।

02 Sep 202684
Stuti - Namo Chandike Ho Chamund Mata | नमो चंडिके हो चामुंड माता

Stuti - Namo Chandike Ho Chamund Mata | नमो चंडिके हो चामुंड माता

'नमो चंडिके, नमो चामुंडाय नमः' मंत्र जाप से शक्ति और सुरक्षा मिलती है, जो दुर्गा सप्तशती में वर्णित है और देवी चामुंडा के दिव्य स्वरूप की आराधना द्वारा आध्यात्मिक उन्नति और विघ्न निवारण का मार्ग प्रशस्त करता है.

26 May 2026250
ॐ जय जगदीश हरे

Om Jai Jagdish Hare | ॐ जय जगदीश हरे

ॐ जय जगदीश हरे आरती भगवान विष्णु को समर्पित है, जिसकी सरल विधि और भक्तिपूर्ण गायन से आध्यात्मिक शांति मिलती है। यह आरती घर में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है।

09 May 2026270
जय अम्बे गौरी

Jai Ambe Gauri | जय अम्बे गौरी

जय अम्बे गौरी आरती के बोल माता दुर्गा की स्तुति हैं, जिसे विधिपूर्वक गाने से भक्तों को आध्यात्मिक शांति और मनोकामना पूर्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यह शक्तिशाली आरती नवरात्रि में विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है और इसका जप भव बाधाओं को दूर करता है।

09 May 2026378
श्री राम स्तुति: श्री रामचंद्र कृपालु भजमन – संपूर्ण पाठ, सरल अर्थ और आध्यात्मिक महत्व

श्री राम स्तुति: श्री रामचंद्र कृपालु भजमन – संपूर्ण पाठ, सरल अर्थ और आध्यात्मिक महत्व

श्री रामचंद्र कृपालु भजमन गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित भगवान श्रीराम की एक लोकप्रिय स्तुति है। जानें इसका संपूर्ण पाठ, हिंदी अर्थ, धार्मिक महत्व और पाठ के लाभ।

20 Jul 2026147
हे दुःख भंजन मारुती नंदन | हनुमान भजन लिरिक्स और महत्व

हे दुःख भंजन मारुती नंदन | हनुमान भजन लिरिक्स और महत्व

हे दुःख भंजन मारुती नंदन" भगवान हनुमान जी को समर्पित एक प्रसिद्ध भक्तिमय भजन है। इस भजन में भक्त पवनपुत्र हनुमान जी से दुखों को दूर करने, शक्ति और साहस प्रदान करने की प्रार्थना करता है। पढ़ें हनुमान भजन के सुंदर बोल और इसका महत्व।

27 Jun 2026336
उठो सोने वालों सबेरा हुआ है | वंशीधर शुक्ल का प्रेरणादायक देशभक्ति भजन<

उठो सोने वालों सबेरा हुआ है | वंशीधर शुक्ल का प्रेरणादायक देशभक्ति भजन

"उठो सोने वालों सबेरा हुआ है" वंशीधर शुक्ल द्वारा रचित एक प्रेरणादायक देशभक्ति भजन है। इस भजन में नई सुबह, आशा, जागृति और देश प्रेम का संदेश दिया गया है। पढ़ें इस प्रसिद्ध भजन के बोल, भावार्थ और इससे मिलने वाली प्रेरणा।

21 Jun 2026274
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लक्ष्मण 14 वर्ष तक क्यों नहीं सोए? जानिए निद्रा देवी का रहस्य

रामायण के अनुसार, 14 वर्ष के वनवास के दौरान भगवान राम और माता सीता की निरंतर सेवा व रक्षा करने के लिए लक्ष्मण ने निद्रा देवी से 14 वर्षों तक न सोने का वरदान मांगा था। निद्रा देवी की शर्त के अनुसार, लक्ष्मण के हिस्से की 14 वर्ष की नींद उनकी पत्नी उर्मिला ने अयोध्या के राजमहल में सोकर पूरी की। नींद पर विजय पाने के कारण ही लक्ष्मण 'गुड़ाकेश' कहलाए और इसी वरदान के बल पर वे ब्रह्मचारी व अनिद्राधारी रहकर अजेय योद्धा मेघनाद (इंद्रजीत) का वध कर सके।

24 Sep 202613
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भगवद्गीता के 7 श्लोक जो आत्मविश्वास और स्वयं पर भरोसा करना सिखाते हैं

**भगवद्गीता** केवल आध्यात्मिक ज्ञान का ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन की कठिन परिस्थितियों में सही मार्ग दिखाने वाला दिव्य संदेश है। कुरुक्षेत्र में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को ऐसे अनेक उपदेश दिए, जो आज भी आत्मविश्वास, कर्म, धैर्य और स्वयं पर विश्वास रखने की प्रेरणा देते हैं। इस लेख में जानें **भगवद्गीता के 7 शक्तिशाली श्लोक**, उनके सरल हिंदी अर्थ और जीवन में मिलने वाली ऐसी सीखें, जो कठिन समय में अपने निर्णय और क्षमता पर भरोसा करना सिखाती हैं।

17 Sep 202639
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गणेश जी को प्रथम पूज्य क्यों कहा जाता है? जानें पूरी पौराणिक कथा और रहस्य

हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य या पूजा की शुरुआत अक्सर **भगवान गणेश के स्मरण** से की जाती है। इसके पीछे गणेश जी और उनके भाई कार्तिकेय से जुड़ी एक प्रसिद्ध पौराणिक कथा है, जिसमें दोनों के बीच संसार की परिक्रमा करने की प्रतियोगिता हुई थी। गणेश जी ने बुद्धि और माता-पिता के प्रति अपनी श्रद्धा का परिचय देते हुए शिव-पार्वती की परिक्रमा की और विजयी हुए। प्रसन्न होकर उन्हें प्रथम पूज्य होने का वरदान मिला। इस लेख में जानें गणेश जी की प्रथम पूजा का कारण, पूरी पौराणिक कथा और इसके पीछे छिपा गहरा आध्यात्मिक संदेश।

11 Sep 202665
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शीतला सातम 2026: Shitala Satam Date, Muhurat & Guide

सनातन धर्म में शीतला सातम (शीतला सप्तमी) आरोग्य, स्वच्छता और संक्रामक रोगों से रक्षा का पावन लोकपर्व है, जो मुख्य रूप से गुजरात और पश्चिमी भारत में श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाता है। वर्ष 2026 में शीतला सातम 3 सितंबर 2026 (गुरुवार) को मनाई जाएगी, जबकि इससे एक दिन पूर्व 2 सितंबर 2026 को रांधण छठ पर भोजन पकाया जाएगा। इस दिन घर में अग्नि या चूल्हा जलाना वर्जित होता है और माता शीतला को एक दिन पूर्व बना ठंडा (बासोड़ा) भोजन अर्पित कर प्रसाद रूप में ग्रहण किया जाता है।

02 Sep 202684
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4 Yugas Explained in Hindi | चार युगों की उत्पत्ति और रहस्य

हिंदू धर्मग्रंथों में समय को एक चक्र के रूप में समझाया गया है, जिसमें **सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर युग और कलियुग** क्रम से आते हैं। प्रत्येक युग में धर्म, मानव जीवन और नैतिक मूल्यों की स्थिति अलग बताई गई है। पुराणों में इन युगों की अवधि, विशेषताओं और एक युग से दूसरे युग में परिवर्तन का विस्तृत वर्णन मिलता है। इस लेख में जानें चारों युगों की उत्पत्ति, उनका क्रम, अवधि, धर्म के क्रमिक परिवर्तन और इस रहस्यमयी युगचक्र से जुड़ी पौराणिक मान्यताओं की सम्पूर्ण जानकारी।

26 Aug 2026110
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असुरों ने भगवान शिव की भक्ति क्यों की? 4 शक्तिशाली कारण और पौराणिक कथाएं

हिंदू पुराणों में कई ऐसे असुरों का वर्णन मिलता है जिन्होंने भगवान शिव की कठोर तपस्या और अनन्य भक्ति की थी। **रावण, बाणासुर और अन्य शिव भक्त असुरों** की कथाएं बताती हैं कि महादेव की भक्ति केवल देवताओं तक सीमित नहीं थी। असुरों ने शक्ति, वरदान, ज्ञान और अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए शिव की आराधना की, लेकिन उनकी कथाओं में भक्ति और अहंकार के बीच का अंतर भी स्पष्ट दिखाई देता है। इस लेख में जानें **4 प्रमुख कारण**, जिनके कारण असुर भगवान शिव के भक्त बने और उन्हें महादेव से कौन-कौन से वरदान प्राप्त हुए।

24 Aug 2026130
भगवान जगन्नाथ का परिचय | इतिहास, पौराणिक कथा, स्वरूप एवं महत्व

भगवान जगन्नाथ का परिचय | इतिहास, पौराणिक कथा, स्वरूप एवं महत्व

भगवान जगन्नाथ भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य स्वरूप माने जाते हैं और ओडिशा के पुरी में स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर विश्वभर के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है।

02 Jul 2026482
माँ धूमावती उत्पत्ति कथा

Dhumavati Utpatti Katha | माँ धूमावती उत्पत्ति कथा

धूमावती उत्पत्ति कथा, पाठ विधि और लाभों को जानकर आप इस देवी के रहस्यमय स्वरूप को समझ सकते हैं और जीवन की बाधाओं से मुक्ति पा सकते हैं। संपूर्ण कथा, विधि और लाभों का विस्तृत विवरण आपको माँ धूमावती की कृपा प्राप्त करने का मार्ग दिखाएगा।

23 Jun 2026215

🕉 पंचांग ज्ञान

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पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कालगणना की प्राचीन पद्धति है, जो तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण — इन पाँच अंगों पर आधारित है। इससे शुभ मुहूर्त, व्रत-त्योहार और दैनिक ग्रह स्थिति का पता चलता है।

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तिथि क्या है?

तिथि चंद्रमा और सूर्य के बीच के कोणीय अंतर से तय होती है। एक माह में 30 तिथियाँ होती हैं — 15 शुक्ल पक्ष और 15 कृष्ण पक्ष में। व्रत-पूजा के लिए सही तिथि जानना आवश्यक है।

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नक्षत्र क्या है?

नक्षत्र आकाश में चंद्रमा के पथ के 27 भाग हैं। चंद्रमा प्रतिदिन एक नक्षत्र बदलता है, और प्रत्येक नक्षत्र का अपना देवता व स्वभाव होता है जो दिन की ऊर्जा को प्रभावित करता है।

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राहु काल क्या है?

राहु काल दिन का वह अशुभ समयखंड है जब नया कार्य, विवाह, यात्रा या महत्वपूर्ण निर्णय नहीं लेने चाहिए। यह हर दिन और हर शहर में अलग समय पर आता है।

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शुभ मुहूर्त क्या है?

शुभ मुहूर्त वह समय है जब तिथि, नक्षत्र, योग और करण अनुकूल स्थिति में हों। ब्रह्म मुहूर्त, अभिजित और गोधूलि मुहूर्त इसके प्रमुख उदाहरण हैं।

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🌞

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया दिन और रात को 8-8 भागों में बाँटकर शुभ-अशुभ समय बताने की पद्धति है। अमृत, शुभ और लाभ चौघड़िया सबसे शुभ माने जाते हैं।

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