
दीपावली पर उल्लू और माता लक्ष्मी: चंचल मन व विवेक का रहस्य
सनातन धर्म में धन और ऐश्वर्य की अधिष्ठात्री देवी महालक्ष्मी का वाहन उल्लू (उलूक) विवेक, दृष्टि और आत्म-संयम का गहरा प्रतीक है। सामान्यतः दिन के उजाले में न देख पाने और रात्रि के घोर अंधकार में सूक्ष्म दृष्टि रखने वाला उल्लू यह संदेश देता है कि भौतिक धन मनुष्य को अंधा (अहंकारी) बना सकता है। जब तक धन के साथ विवेक और ज्ञान का संतुलन न हो, तब तक वह विनाशकारी सिद्ध होता है। दीपावली की महानिशा में उल्लू पर सवार माता लक्ष्मी का पूजन यह प्रेरणा देता है कि सांसारिक माया के अंधकार में भी मनुष्य को अपने सद्गुणों और विवेक की आंखें खुली रखनी चाहिए।

धनतेरस पर यम का दीया क्यों जलाते हैं? जानिए सही विधि व रहस्य
कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी (धनतेरस) की शाम को दक्षिण दिशा में मृत्यु के देवता यमराज के निमित्त जो विशेष दीपक प्रज्वलित किया जाता है, उसे 'यमदीप' (यम का दीया) कहते हैं। स्कंद पुराण और पद्म पुराण के अनुसार, धनतेरस के दिन यमराज के निमित्त चार मुखी दीपदान करने से परिवार के सदस्यों को अकाल मृत्यु, दुर्घटना और यम यातनाओं के भय से मुक्ति मिलती है। यह दीपक घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके अन्न की ढेरी पर रखा जाता है।























