Tilak Kathayein – पंचांग, हिंदू कथाएँ, आरती, चालीसा और मंत्र

omkareshwar-jyotirlinga-history-katha-darshan-guide
12 Jyotirlingas

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग: Omkareshwar Temple History & Guide

मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में पवित्र नर्मदा नदी के तट पर स्थित ओंकारेश्वर महादेव मंदिर भगवान शिव के 12 पावन ज्योतिर्लिंगों में चतुर्थ (चौथा) स्थान रखता है। इस पावन तीर्थ का भौगोलिक आकार प्राकृतिक रूप से ॐ (प्रणव) जैसा बना हुआ है, जिसे शिवपुरी या मान्धाता द्वीप कहा जाता है। शिव पुराण के अनुसार, इक्ष्वाकु वंश के चक्रवर्ती राजा मान्धाता की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर महादेव यहाँ ज्योति रूप में प्रकट हुए थे। ओंकारेश्वर के साथ नर्मदा पार स्थित 'ममलेश्वर' लिंग के दर्शन करने पर ही संपूर्ण ज्योतिर्लिंग यात्रा का फल पूर्ण माना जाता है।

Tilak Kathayein06 Sep 2026
आत्मा और परमात्मा – Atma aur Paramatma
ब्लॉग

Atma aur Paramatma | आत्मा और परमात्मा – सम्पूर्ण जानकारी 2026

आत्मा और परमात्मा – सम्पूर्ण जानकारी हिंदी में 2026। TilakKathayein।

Tilak Kathayein05 Apr 2026

नवीनतम लेख

asur-bhi-bhagwan-shiv-ke-bhakt-kyon-the
कथाएँ

असुरों ने भगवान शिव की भक्ति क्यों की? 4 शक्तिशाली कारण और पौराणिक कथाएं

हिंदू पुराणों में कई ऐसे असुरों का वर्णन मिलता है जिन्होंने भगवान शिव की कठोर तपस्या और अनन्य भक्ति की थी। **रावण, बाणासुर और अन्य शिव भक्त असुरों** की कथाएं बताती हैं कि महादेव की भक्ति केवल देवताओं तक सीमित नहीं थी। असुरों ने शक्ति, वरदान, ज्ञान और अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए शिव की आराधना की, लेकिन उनकी कथाओं में भक्ति और अहंकार के बीच का अंतर भी स्पष्ट दिखाई देता है। इस लेख में जानें **4 प्रमुख कारण**, जिनके कारण असुर भगवान शिव के भक्त बने और उन्हें महादेव से कौन-कौन से वरदान प्राप्त हुए।

24 Aug 2026207
bhagwan-ganesh-ka-janm-kaise-hua
कहानियाँ

भगवान गणेश का जन्म कैसे हुआ? माता पार्वती और शिव की सम्पूर्ण पौराणिक कथा

भगवान गणेश के जन्म की कथा हिंदू धर्म की सबसे प्रसिद्ध पौराणिक कथाओं में से एक है। मान्यता के अनुसार, माता पार्वती ने अपने शरीर के उबटन से गणेश जी की रचना की और उन्हें अपने द्वार की रक्षा का दायित्व सौंपा। भगवान शिव के आने पर गणेश जी ने उन्हें भीतर जाने से रोक दिया, जिसके बाद भयंकर संघर्ष हुआ और शिव जी ने उनका सिर काट दिया। माता पार्वती के आग्रह पर भगवान शिव ने हाथी का सिर लगाकर उन्हें पुनर्जीवित किया और प्रथम पूज्य होने का वरदान दिया। इस लेख में जानें गणेश जी के जन्म से लेकर उनके प्रथम पूज्य बनने तक की सम्पूर्ण कथा।

22 Aug 2026218
bhakt-surdas
भक्तमाल

भक्त सूरदास की जीवनी | जन्म, श्रीकृष्ण भक्ति, रचनाएं और सम्पूर्ण जीवन कथा

**भक्त सूरदास** हिंदी भक्ति साहित्य के महान संत, कवि और भगवान श्रीकृष्ण के अनन्य भक्त माने जाते हैं। उन्होंने अपनी रचनाओं और पदों के माध्यम से कृष्ण की बाल लीलाओं, प्रेम और भक्ति का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया। **सूरसागर** उनकी सबसे प्रसिद्ध रचनाओं में से एक है। इस लेख में जानें भक्त सूरदास का जीवन परिचय, जन्म से जुड़ी मान्यताएं, श्रीकृष्ण के प्रति उनकी भक्ति, प्रमुख रचनाएं और हिंदी भक्ति साहित्य में उनके अमूल्य योगदान की सम्पूर्ण कथा।

20 Aug 2026166
mahabharata-7-lessons-that-still-apply-today
कहानियाँ

महाभारत की 7 सीख जो आज भी जीवन बदल सकती हैं | जीवन की बड़ी सीख

महाभारत केवल युद्ध की कहानी नहीं, बल्कि जीवन, रिश्तों, धर्म, कर्म और सही निर्णय लेने की गहरी सीख देने वाला महाकाव्य है। इसमें श्रीकृष्ण, पांडवों, कौरवों और अन्य पात्रों के जीवन से ऐसी अनेक शिक्षाएं मिलती हैं जो आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं। इस लेख में जानें **महाभारत की 7 महत्वपूर्ण सीख**, जो कठिन परिस्थितियों में सही मार्ग चुनने, कर्म को समझने, रिश्तों को निभाने और जीवन में धर्म का पालन करने की प्रेरणा देती हैं।

19 Aug 2026146
bhagwan-shiv-ke-12-jyotirlingon-ka-mahatva
अन्य कथाएँ

12 ज्योतिर्लिंग कौन-कौन से हैं? भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों का महत्व और कथा

हिंदू धर्म में भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण तीर्थस्थल माने जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन स्थानों पर भगवान शिव स्वयं ज्योतिर्लिंग स्वरूप में विराजमान हैं। सोमनाथ से लेकर रामेश्वरम तक प्रत्येक ज्योतिर्लिंग की अपनी अनोखी पौराणिक कथा, धार्मिक मान्यता और आध्यात्मिक विशेषता है। इस लेख में जानें 12 ज्योतिर्लिंगों के नाम, स्थान, पौराणिक कथाएं, धार्मिक महत्व और इनके दर्शन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी।

18 Aug 2026246
नाग पंचमी 2026: नाग देवता को क्या चढ़ाएं और क्या नहीं? पूजा के 7 जरूरी नियम
ब्लॉग

नाग पंचमी 2026: शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और पौराणिक कथा

नाग पंचमी 2026 हिंदू धर्म का महत्वपूर्ण पर्व है, जिसमें नाग देवता की पूजा कर सुख-समृद्धि, परिवार की रक्षा और भगवान शिव की कृपा की कामना की जाती है। इस दिन पूजा में क्या अर्पित करना चाहिए और किन चीजों से बचना चाहिए, इसे लेकर कई धार्मिक मान्यताएं हैं। इस लेख में जानें नाग पंचमी की पूजा विधि, पूजा सामग्री, 7 जरूरी नियम, क्या करें और क्या न करें, शुभ मुहूर्त और नाग देवता की पूजा का धार्मिक महत्व।

16 Aug 2026235
angkor-wat-travel-guide
मंदिर

अंगकोर वाट यात्रा गाइड | इतिहास, टिकट, समय, कैसे पहुंचें और घूमने की पूरी जानकारी

अंगकोर वाट कंबोडिया के सिएम रीप में स्थित दुनिया के सबसे प्रसिद्ध प्राचीन मंदिर परिसरों में से एक है। विशाल मंदिरों, अद्भुत खमेर वास्तुकला, ऐतिहासिक महत्व और धार्मिक विरासत के कारण यह हिंदू और विश्व धरोहर प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण है। इस संपूर्ण यात्रा गाइड में जानें अंगकोर वाट का इतिहास, प्रमुख मंदिर, टिकट और प्रवेश व्यवस्था, घूमने का सही समय, कैसे पहुंचें, स्थानीय परिवहन, अनुमानित यात्रा खर्च और यात्रा के दौरान ध्यान रखने वाली जरूरी बातें।

16 Aug 2026157
pandavon-ka-janm-katha
कहानियाँ

पांडवों का जन्म कैसे हुआ? कुंती और माद्री की अद्भुत कथा | महाभारत की विचित्र कहानी

पांडवों का जन्म महाभारत की सबसे अद्भुत और महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक है। राजा पांडु को मिले एक शाप के कारण वे संतान उत्पन्न करने में असमर्थ थे। तब कुंती को ऋषि दुर्वासा से प्राप्त दिव्य मंत्र का स्मरण हुआ, जिसके माध्यम से उन्होंने देवताओं का आह्वान किया। इसी प्रकार युधिष्ठिर, भीम और अर्जुन का जन्म हुआ, जबकि माद्री ने इसी मंत्र की सहायता से अश्विनी कुमारों का आह्वान कर नकुल और सहदेव को जन्म दिया। इस लेख में जानें पांचों पांडवों के जन्म की पूरी कथा, कुंती-माद्री की भूमिका और इसके पीछे की पौराणिक मान्यता।

15 Aug 2026289
mata-sita-ne-kin-5-logon-ko-shrap-diya
कहानियाँ

माता सीता ने किन 5 लोगों को श्राप दिया था? जानें गया की प्रसिद्ध पौराणिक कथा

सनातन परंपरा में प्रचलित **गया की प्रसिद्ध पौराणिक कथा** के अनुसार, जब भगवान श्रीराम पितृ श्राद्ध के लिए सामग्री लाने गए, तब माता सीता ने स्वयं पिंडदान किया। उस समय कुछ साक्षियों ने सत्य का साथ नहीं दिया, जिससे माता सीता ने उन्हें श्राप दिया और केवल अक्षयवट ने सत्य का समर्थन किया, जिसे उन्होंने आशीर्वाद दिया। इस लेख में जानें माता सीता ने किन 5 लोगों को श्राप दिया, श्राप के पीछे का कारण, गया श्राद्ध से जुड़ी मान्यताएं और इस कथा का धार्मिक महत्व।

14 Aug 2026187
श्रावण सोमवार व्रत कथा: पूजा विधि, नियम, महत्व, उद्यापन और संपूर्ण जानकारी
ब्लॉग

श्रावण सोमवार व्रत कथा: पूजा विधि, नियम, महत्व, उद्यापन और संपूर्ण जानकारी

श्रावण सोमवार व्रत भगवान शिव को समर्पित पवित्र व्रत है। जानिए सावन सोमवार व्रत की कथा, पूजा विधि, नियम, महत्व, शिवलिंग अभिषेक, व्रत में क्या खाएं और उद्यापन की संपूर्ण विधि।

13 Aug 2026217
shravan-maas-ka-mahatva-bhagwan-shiv-ki-kripa
ब्लॉग

श्रावण अमावस्या पूजा विधि | पितृ तर्पण, दान का महत्व, शुभ मुहूर्त और सम्पूर्ण जानकारी

**श्रावण अमावस्या** हिंदू धर्म में पितरों की शांति, भगवान शिव की कृपा और पुण्य प्राप्ति के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। इस दिन **पितृ तर्पण, स्नान, दान और विधिपूर्वक पूजा** का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक किए गए तर्पण और दान से पितृ प्रसन्न होते हैं तथा परिवार में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। इस लेख में जानें श्रावण अमावस्या की पूजा विधि, पितृ तर्पण की सही प्रक्रिया, दान का महत्व, शुभ मुहूर्त और धार्मिक मान्यताओं की सम्पूर्ण जानकारी।

13 Aug 2026169
धृतराष्ट्र जन्म से अंधे क्यों थे? 100 पुत्र कैसे हुए? जानें महाभारत की सम्पूर्ण कथा
कहानियाँ

धृतराष्ट्र जन्म से अंधे क्यों थे? 100 पुत्र कैसे हुए? जानें महाभारत की सम्पूर्ण कथा

धृतराष्ट्र महाभारत के प्रमुख पात्रों में से एक थे, जिनका जन्म महर्षि वेदव्यास के वरदान से हुआ, लेकिन वे जन्म से ही नेत्रहीन थे। उनकी पत्नी गांधारी ने भी एक अद्भुत प्रक्रिया के माध्यम से **100 पुत्रों और एक पुत्री** को जन्म दिया, जिसका वर्णन महाभारत में विस्तार से मिलता है। इस लेख में जानें धृतराष्ट्र के जन्म का रहस्य, उनके अंधत्व का कारण, गांधारी को 100 पुत्र कैसे प्राप्त हुए और इस पूरी कथा का धार्मिक एवं पौराणिक महत्व।

13 Aug 2026241
Stuti - Namo Chandike Ho Chamund Mata | नमो चंडिके हो चामुंड माता

Stuti - Namo Chandike Ho Chamund Mata | नमो चंडिके हो चामुंड माता

'नमो चंडिके, नमो चामुंडाय नमः' मंत्र जाप से शक्ति और सुरक्षा मिलती है, जो दुर्गा सप्तशती में वर्णित है और देवी चामुंडा के दिव्य स्वरूप की आराधना द्वारा आध्यात्मिक उन्नति और विघ्न निवारण का मार्ग प्रशस्त करता है.

26 May 2026311
ॐ जय जगदीश हरे

Om Jai Jagdish Hare | ॐ जय जगदीश हरे

ॐ जय जगदीश हरे आरती भगवान विष्णु को समर्पित है, जिसकी सरल विधि और भक्तिपूर्ण गायन से आध्यात्मिक शांति मिलती है। यह आरती घर में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है।

09 May 2026334
जय अम्बे गौरी

Jai Ambe Gauri | जय अम्बे गौरी

जय अम्बे गौरी आरती के बोल माता दुर्गा की स्तुति हैं, जिसे विधिपूर्वक गाने से भक्तों को आध्यात्मिक शांति और मनोकामना पूर्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यह शक्तिशाली आरती नवरात्रि में विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है और इसका जप भव बाधाओं को दूर करता है।

09 May 2026451
श्री राम स्तुति: श्री रामचंद्र कृपालु भजमन – संपूर्ण पाठ, सरल अर्थ और आध्यात्मिक महत्व

श्री राम स्तुति: श्री रामचंद्र कृपालु भजमन – संपूर्ण पाठ, सरल अर्थ और आध्यात्मिक महत्व

श्री रामचंद्र कृपालु भजमन गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित भगवान श्रीराम की एक लोकप्रिय स्तुति है। जानें इसका संपूर्ण पाठ, हिंदी अर्थ, धार्मिक महत्व और पाठ के लाभ।

20 Jul 2026226
हे दुःख भंजन मारुती नंदन | हनुमान भजन लिरिक्स और महत्व

हे दुःख भंजन मारुती नंदन | हनुमान भजन लिरिक्स और महत्व

हे दुःख भंजन मारुती नंदन" भगवान हनुमान जी को समर्पित एक प्रसिद्ध भक्तिमय भजन है। इस भजन में भक्त पवनपुत्र हनुमान जी से दुखों को दूर करने, शक्ति और साहस प्रदान करने की प्रार्थना करता है। पढ़ें हनुमान भजन के सुंदर बोल और इसका महत्व।

27 Jun 2026392
उठो सोने वालों सबेरा हुआ है | वंशीधर शुक्ल का प्रेरणादायक देशभक्ति भजन<

उठो सोने वालों सबेरा हुआ है | वंशीधर शुक्ल का प्रेरणादायक देशभक्ति भजन

"उठो सोने वालों सबेरा हुआ है" वंशीधर शुक्ल द्वारा रचित एक प्रेरणादायक देशभक्ति भजन है। इस भजन में नई सुबह, आशा, जागृति और देश प्रेम का संदेश दिया गया है। पढ़ें इस प्रसिद्ध भजन के बोल, भावार्थ और इससे मिलने वाली प्रेरणा।

21 Jun 2026344
dhanteras-yam-ka-diya-katha-vidhi-niam

धनतेरस पर यम का दीया क्यों जलाते हैं? जानिए सही विधि व रहस्य

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी (धनतेरस) की शाम को दक्षिण दिशा में मृत्यु के देवता यमराज के निमित्त जो विशेष दीपक प्रज्वलित किया जाता है, उसे 'यमदीप' (यम का दीया) कहते हैं। स्कंद पुराण और पद्म पुराण के अनुसार, धनतेरस के दिन यमराज के निमित्त चार मुखी दीपदान करने से परिवार के सदस्यों को अकाल मृत्यु, दुर्घटना और यम यातनाओं के भय से मुक्ति मिलती है। यह दीपक घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके अन्न की ढेरी पर रखा जाता है।

27 Oct 202620
sharad-purnima-kheer-puja-vidhi-katha

शरद पूनम: खीर रखने का समय, पूजा विधि व पौराणिक कथा

हिन्दू पंचांग के अनुसार आश्विन शुक्ल पूर्णिमा को 'शरद पूर्णिमा' या 'शरद पूनम' (कोजागरी पूर्णिमा) कहा जाता है। मान्यता है कि इस पावन रात्रि को चंद्रमा पृथ्वी के सर्वाधिक निकट होता है और अपनी संपूर्ण 16 कलाओं से अमृत की किरणें बरसाता है। इस रात खुले आकाश के नीचे गाय के दूध और चावल से बनी खीर (गुजरात में दूध-पौंआ) रखने की परंपरा है। मध्यरात्रि में धन की देवी माता लक्ष्मी "को जागर्ति" (कौन जाग रहा है?) पूछते हुए पृथ्वी पर विचरण करती हैं और जागरण करने वाले भक्तों को अखंड ऐश्वर्य का वरदान देती हैं।

25 Oct 202646
सभी पापों के बाद भी शकुनि को स्वर्ग क्यों मिला? जानिए रहस्य

सभी पापों के बाद भी शकुनि को स्वर्ग क्यों मिला? जानिए रहस्य

महाभारत के 'स्वर्गारोहण पर्व' के अनुसार, शकुनि को स्वर्ग मिलने के तीन प्रमुख कारण हैं। पहला, उसने कुरुक्षेत्र की पावन भूमि पर क्षत्रिय धर्म का पालन करते हुए सहदेव के विरुद्ध सम्मुख लड़कर वीरगति प्राप्त की थी। दूसरा, कर्मफल के शास्त्रीय नियम के अनुसार, जिस जीव के पाप अधिक और पुण्य बहुत कम होते हैं, उसे अपने अल्प पुण्यों का भोग करने के लिए पहले कुछ समय के लिए स्वर्ग प्राप्त होता है, जिसके समाप्त होने पर वह दीर्घकालीन नरक में जाता है। तीसरा, यह युधिष्ठिर के अहंकार और द्वेष की शुद्धि के लिए देवराज इंद्र और धर्मराज द्वारा रची गई एक मायावी परीक्षा थी।

25 Oct 202639
why-garuda-purana-story-still-matters-today

गरुड़ पुराण की कथाएं आज क्यों जरूरी हैं? जानिए महत्व व सीख

गरुड़ पुराण केवल मृत्यु उपरांत की यात्रा या नरक की यातनाओं का विवरण नहीं है, बल्कि यह वर्तमान जीवन में नैतिकता, दया, और सदाचार से जीने का एक आध्यात्मिक मार्गदर्शक है। आधुनिक युग में जब भौतिक सुखों के पीछे भागते हुए लोग नैतिक मूल्य भूल रहे हैं, तब गरुड़ पुराण का 'कर्मफल का सिद्धांत' मनुष्य को जिम्मेदार, संवेदनशील और न्यायप्रिय बनने की गहरी सीख देता है।

30 Sep 202686
bhishma-pitamah-ichha-mrityu-varadan

भीष्म पितामह को इच्छामृत्यु का वरदान कैसे मिला? जानें महाभारत की कथा

**भीष्म पितामह**, जिन्हें जन्म के समय देवव्रत कहा जाता था, अपनी महान प्रतिज्ञा और त्याग के लिए प्रसिद्ध हैं। जब उन्होंने अपने पिता राजा शांतनु के सुख और सत्यवती से उनके विवाह के लिए आजीवन ब्रह्मचर्य तथा हस्तिनापुर के सिंहासन पर अपना अधिकार छोड़ने की भयंकर प्रतिज्ञा ली, तब शांतनु उनसे अत्यंत प्रसन्न हुए। उन्होंने देवव्रत को ऐसा वरदान दिया कि **मृत्यु उनकी इच्छा के अधीन रहेगी**। इसी कारण भीष्म युद्धभूमि में बाणों की शय्या पर पड़े रहने के बाद भी अपनी इच्छानुसार प्राण त्याग सके। इस लेख में जानें इच्छामृत्यु के वरदान की पूरी कथा और इसका महाभारत में महत्व।

18 Oct 202674
char-yugon-ki-rachna-kaise-hui

4 Yugas Explained in Hindi | चार युगों की उत्पत्ति और रहस्य

हिंदू धर्मग्रंथों में समय को एक चक्र के रूप में समझाया गया है, जिसमें **सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर युग और कलियुग** क्रम से आते हैं। प्रत्येक युग में धर्म, मानव जीवन और नैतिक मूल्यों की स्थिति अलग बताई गई है। पुराणों में इन युगों की अवधि, विशेषताओं और एक युग से दूसरे युग में परिवर्तन का विस्तृत वर्णन मिलता है। इस लेख में जानें चारों युगों की उत्पत्ति, उनका क्रम, अवधि, धर्म के क्रमिक परिवर्तन और इस रहस्यमयी युगचक्र से जुड़ी पौराणिक मान्यताओं की सम्पूर्ण जानकारी।

26 Aug 2026166
asur-bhi-bhagwan-shiv-ke-bhakt-kyon-the

असुरों ने भगवान शिव की भक्ति क्यों की? 4 शक्तिशाली कारण और पौराणिक कथाएं

हिंदू पुराणों में कई ऐसे असुरों का वर्णन मिलता है जिन्होंने भगवान शिव की कठोर तपस्या और अनन्य भक्ति की थी। **रावण, बाणासुर और अन्य शिव भक्त असुरों** की कथाएं बताती हैं कि महादेव की भक्ति केवल देवताओं तक सीमित नहीं थी। असुरों ने शक्ति, वरदान, ज्ञान और अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए शिव की आराधना की, लेकिन उनकी कथाओं में भक्ति और अहंकार के बीच का अंतर भी स्पष्ट दिखाई देता है। इस लेख में जानें **4 प्रमुख कारण**, जिनके कारण असुर भगवान शिव के भक्त बने और उन्हें महादेव से कौन-कौन से वरदान प्राप्त हुए।

24 Aug 2026207
भगवान जगन्नाथ का परिचय | इतिहास, पौराणिक कथा, स्वरूप एवं महत्व

भगवान जगन्नाथ का परिचय | इतिहास, पौराणिक कथा, स्वरूप एवं महत्व

भगवान जगन्नाथ भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य स्वरूप माने जाते हैं और ओडिशा के पुरी में स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर विश्वभर के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है।

02 Jul 2026546

🕉 पंचांग ज्ञान

🕉

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कालगणना की प्राचीन पद्धति है, जो तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण — इन पाँच अंगों पर आधारित है। इससे शुभ मुहूर्त, व्रत-त्योहार और दैनिक ग्रह स्थिति का पता चलता है।

और जानें →
🌙

तिथि क्या है?

तिथि चंद्रमा और सूर्य के बीच के कोणीय अंतर से तय होती है। एक माह में 30 तिथियाँ होती हैं — 15 शुक्ल पक्ष और 15 कृष्ण पक्ष में। व्रत-पूजा के लिए सही तिथि जानना आवश्यक है।

और जानें →
⭐

नक्षत्र क्या है?

नक्षत्र आकाश में चंद्रमा के पथ के 27 भाग हैं। चंद्रमा प्रतिदिन एक नक्षत्र बदलता है, और प्रत्येक नक्षत्र का अपना देवता व स्वभाव होता है जो दिन की ऊर्जा को प्रभावित करता है।

और जानें →
⚠️

राहु काल क्या है?

राहु काल दिन का वह अशुभ समयखंड है जब नया कार्य, विवाह, यात्रा या महत्वपूर्ण निर्णय नहीं लेने चाहिए। यह हर दिन और हर शहर में अलग समय पर आता है।

और जानें →
✨

शुभ मुहूर्त क्या है?

शुभ मुहूर्त वह समय है जब तिथि, नक्षत्र, योग और करण अनुकूल स्थिति में हों। ब्रह्म मुहूर्त, अभिजित और गोधूलि मुहूर्त इसके प्रमुख उदाहरण हैं।

और जानें →
🌞

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया दिन और रात को 8-8 भागों में बाँटकर शुभ-अशुभ समय बताने की पद्धति है। अमृत, शुभ और लाभ चौघड़िया सबसे शुभ माने जाते हैं।

और जानें →