Tilak Kathayein – पंचांग, हिंदू कथाएँ, आरती, चालीसा और मंत्र

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ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग: Omkareshwar Temple History & Guide

मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में पवित्र नर्मदा नदी के तट पर स्थित ओंकारेश्वर महादेव मंदिर भगवान शिव के 12 पावन ज्योतिर्लिंगों में चतुर्थ (चौथा) स्थान रखता है। इस पावन तीर्थ का भौगोलिक आकार प्राकृतिक रूप से ॐ (प्रणव) जैसा बना हुआ है, जिसे शिवपुरी या मान्धाता द्वीप कहा जाता है। शिव पुराण के अनुसार, इक्ष्वाकु वंश के चक्रवर्ती राजा मान्धाता की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर महादेव यहाँ ज्योति रूप में प्रकट हुए थे। ओंकारेश्वर के साथ नर्मदा पार स्थित 'ममलेश्वर' लिंग के दर्शन करने पर ही संपूर्ण ज्योतिर्लिंग यात्रा का फल पूर्ण माना जाता है।

Tilak Kathayein06 Sep 2026
आत्मा और परमात्मा – Atma aur Paramatma
ब्लॉग

Atma aur Paramatma | आत्मा और परमात्मा – सम्पूर्ण जानकारी 2026

आत्मा और परमात्मा – सम्पूर्ण जानकारी हिंदी में 2026। TilakKathayein।

Tilak Kathayein05 Apr 2026

नवीनतम लेख

भगवान श्रीकृष्ण का जीवन परिचय: जन्म, बाल लीलाएं, शिक्षा, भगवद्गीता और महाभारत में दिव्य भूमिका
कहानियाँ

भगवान श्रीकृष्ण का जीवन परिचय: जन्म, बाल लीलाएं, शिक्षा, भगवद्गीता और महाभारत में दिव्य भूमिका

भगवान श्रीकृष्ण विष्णु के आठवें अवतार और सनातन धर्म के सबसे पूजनीय देवताओं में से एक हैं। जानें उनके जन्म, बाल लीलाओं, महाभारत, भगवद्गीता के उपदेश और संपूर्ण जीवन परिचय के बारे में।

26 Jul 2026302
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1 श्लोक 1 – धृतराष्ट्र उवाच: धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे… | संपूर्ण अर्थ, शब्दार्थ और विस्तृत परिचय
भागवद गीता

श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1 श्लोक 1 – धृतराष्ट्र उवाच: धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे… | संपूर्ण अर्थ, शब्दार्थ और विस्तृत परिचय

भगवद्गीता का प्रथम श्लोक केवल युद्धभूमि का वर्णन नहीं है, बल्कि मानव मन, धर्म, कर्तव्य और मोह के बीच चलने वाले आंतरिक संघर्ष का भी प्रतीक है। आइए जानें इस श्लोक का गहरा अर्थ और इसका आध्यात्मिक संदेश।

26 Jul 2026167
अन्धतामिस्र नरक | Garud Puran Andhatamisra Narak in Hindi
गरुड़ पुराण

अन्धतामिस्र नरक | Garud Puran Andhatamisra Narak in Hindi

अन्धतामिस्र नरक गरुड़ पुराण में वर्णित 28 प्रमुख नरकों में दूसरा नरक है। इस नरक में उन लोगों को भेजा जाता है जो छल-कपट से किसी का जीवनसाथी, परिवार, संतान या संपत्ति छीन लेते हैं तथा दूसरों के विश्वास को तोड़कर उन्हें गहरे दुःख में डालते हैं। यहां पापी आत्माओं को घोर अंधकार में रखा जाता है, जहां यमदूत उन्हें कठोर यातनाएं देते हैं। इस लेख में जानें अन्धतामिस्र नरक का वर्णन, इसमें मिलने वाले दंड, इसके पीछे की धार्मिक मान्यता और गरुड़ पुराण में इसका महत्व।

24 Jul 2026154
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त्योहार

रक्षाबंधन 2026: शुभ मुहूर्त, राखी बांधने का समय, पूजा विधि और पौराणिक कथा

**रक्षाबंधन 2026** भाई-बहन के प्रेम, स्नेह और सुरक्षा के संकल्प का पवित्र पर्व है। इस दिन बहनें भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसकी सुख-समृद्धि और दीर्घायु की कामना करती हैं। रक्षाबंधन से जुड़ी कई पौराणिक कथाएं भी प्रचलित हैं, जो इस पर्व के धार्मिक महत्व को दर्शाती हैं। इस लेख में जानें रक्षाबंधन 2026 की तिथि, शुभ मुहूर्त, राखी बांधने का सही समय, भद्रा काल, पूजा विधि, राखी की थाली की सामग्री और प्रमुख पौराणिक कथाएं।

23 Jul 2026264
श्री राम स्तुति: श्री रामचंद्र कृपालु भजमन – संपूर्ण पाठ, सरल अर्थ और आध्यात्मिक महत्व
भजन

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श्री रामचंद्र कृपालु भजमन गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित भगवान श्रीराम की एक लोकप्रिय स्तुति है। जानें इसका संपूर्ण पाठ, हिंदी अर्थ, धार्मिक महत्व और पाठ के लाभ।

20 Jul 2026226
श्री राधा रानी के इन 28 नामों का करें जप, मिलेगा सुख-समृद्धि और प्रेम का आशीर्वाद
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श्री राधा रानी के 28 दिव्य नाम भक्तों के लिए अत्यंत पवित्र माने जाते हैं। जानें इन नामों का अर्थ, धार्मिक महत्व, जप विधि और राधा-कृष्ण भक्ति से मिलने वाले लाभ।

19 Jul 2026228
जन्माष्टमी 2026: पूजा अनुष्ठान, शुभ समय, व्रत कथा और श्रीकृष्ण जन्म की कहानी
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जन्माष्टमी 2026 भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का पावन पर्व है। जानें पूजा अनुष्ठान, शुभ समय, व्रत विधि, श्रीकृष्ण जन्म की कथा, पूजा सामग्री और इस पर्व के धार्मिक महत्व के बारे में।

18 Jul 2026292
हरियाली तीज 2026: तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, व्रत कथा और महत्व
देवी की कथाएँ

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हरियाली तीज 2026 का पर्व भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है। जानें हरियाली तीज की तिथि, पूजा विधि, व्रत कथा, शुभ मुहूर्त, धार्मिक महत्व और इस पावन पर्व से जुड़ी संपूर्ण जानकारी।

17 Jul 2026278
🔴 LIVE नवयौवन वेश दर्शन | Naba Jauban Darshan | Puri Jagannath Temple
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🔴 LIVE नवयौवन वेश दर्शन | Naba Jauban Darshan | Puri Jagannath Temple

पुरी जगन्नाथ मंदिर से भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के पावन 'नवयौवन वेश' के सीधे दर्शन (LIVE) करें। 14 दिनों के 'अनवसर' (एकांतवास) के बाद आज महाप्रभु स्वस्थ होकर अपने भक्तों को मनमोहक और युवा रूप में दर्शन दे रहे हैं। इस ऐतिहासिक और दिव्य पल का लाइव अपडेट यहाँ देखें।

15 Jul 2026296
श्रीजगन्नाथ सहस्रनाम स्तोत्रम्: संपूर्ण पाठ, अर्थ, महत्व और लाभ
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श्रीजगन्नाथ सहस्रनाम स्तोत्रम्: संपूर्ण पाठ, अर्थ, महत्व और लाभ

श्रीजगन्नाथ सहस्रनाम स्तोत्रम् भगवान जगन्नाथ के दिव्य हजार नामों का पवित्र स्तोत्र है। जानें इसके पाठ की विधि, धार्मिक महत्व, आध्यात्मिक लाभ और संपूर्ण स्तोत्र।

14 Jul 2026225
arud Puran Tamisra Narak | तामिस्र नरक का रहस्य
गरुड़ पुराण

Garud Puran Tamisra Narak | तामिस्र नरक का रहस्य

तामिस्र नरक गरुड़ पुराण में वर्णित 28 प्रमुख नरकों में पहला नरक माना गया है। इस नरक में उन लोगों को भेजा जाता है जो छल, चोरी, विश्वासघात और दूसरों की संपत्ति या अधिकार का अन्यायपूर्वक हरण करते हैं। यहां यमदूत पापी आत्माओं को बांधकर घसीटते हैं, उन्हें भूख-प्यास से तड़पाते हैं और बार-बार भय तथा मानसिक-शारीरिक यातनाएं देते हैं। इस लेख में जानें तामिस्र नरक का वर्णन, इसमें मिलने वाले दंड, इसके पीछे की धार्मिक मान्यता और गरुड़ पुराण में इसका महत्व।

12 Jul 2026206
Chaitanya Mahaprabhu Biography in Hindi | सम्पूर्ण जीवन कथा
भक्तमाल

Chaitanya Mahaprabhu Biography in Hindi | सम्पूर्ण जीवन कथा

चैतन्य महाप्रभु 15वीं–16वीं शताब्दी के महान संत, समाज सुधारक और गौड़ीय वैष्णव संप्रदाय के प्रवर्तक थे। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के नाम-संकीर्तन और प्रेम-भक्ति का संदेश पूरे भारत में फैलाया। इस लेख में जानें चैतन्य महाप्रभु का जीवन परिचय, जन्म, आध्यात्मिक यात्रा, प्रमुख शिक्षाएं, धार्मिक योगदान और कृष्ण भक्ति आंदोलन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका।

11 Jul 2026266
Stuti - Namo Chandike Ho Chamund Mata | नमो चंडिके हो चामुंड माता

Stuti - Namo Chandike Ho Chamund Mata | नमो चंडिके हो चामुंड माता

'नमो चंडिके, नमो चामुंडाय नमः' मंत्र जाप से शक्ति और सुरक्षा मिलती है, जो दुर्गा सप्तशती में वर्णित है और देवी चामुंडा के दिव्य स्वरूप की आराधना द्वारा आध्यात्मिक उन्नति और विघ्न निवारण का मार्ग प्रशस्त करता है.

26 May 2026311
ॐ जय जगदीश हरे

Om Jai Jagdish Hare | ॐ जय जगदीश हरे

ॐ जय जगदीश हरे आरती भगवान विष्णु को समर्पित है, जिसकी सरल विधि और भक्तिपूर्ण गायन से आध्यात्मिक शांति मिलती है। यह आरती घर में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है।

09 May 2026334
जय अम्बे गौरी

Jai Ambe Gauri | जय अम्बे गौरी

जय अम्बे गौरी आरती के बोल माता दुर्गा की स्तुति हैं, जिसे विधिपूर्वक गाने से भक्तों को आध्यात्मिक शांति और मनोकामना पूर्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यह शक्तिशाली आरती नवरात्रि में विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है और इसका जप भव बाधाओं को दूर करता है।

09 May 2026451
श्री राम स्तुति: श्री रामचंद्र कृपालु भजमन – संपूर्ण पाठ, सरल अर्थ और आध्यात्मिक महत्व

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श्री रामचंद्र कृपालु भजमन गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित भगवान श्रीराम की एक लोकप्रिय स्तुति है। जानें इसका संपूर्ण पाठ, हिंदी अर्थ, धार्मिक महत्व और पाठ के लाभ।

20 Jul 2026226
हे दुःख भंजन मारुती नंदन | हनुमान भजन लिरिक्स और महत्व

हे दुःख भंजन मारुती नंदन | हनुमान भजन लिरिक्स और महत्व

हे दुःख भंजन मारुती नंदन" भगवान हनुमान जी को समर्पित एक प्रसिद्ध भक्तिमय भजन है। इस भजन में भक्त पवनपुत्र हनुमान जी से दुखों को दूर करने, शक्ति और साहस प्रदान करने की प्रार्थना करता है। पढ़ें हनुमान भजन के सुंदर बोल और इसका महत्व।

27 Jun 2026392
उठो सोने वालों सबेरा हुआ है | वंशीधर शुक्ल का प्रेरणादायक देशभक्ति भजन<

उठो सोने वालों सबेरा हुआ है | वंशीधर शुक्ल का प्रेरणादायक देशभक्ति भजन

"उठो सोने वालों सबेरा हुआ है" वंशीधर शुक्ल द्वारा रचित एक प्रेरणादायक देशभक्ति भजन है। इस भजन में नई सुबह, आशा, जागृति और देश प्रेम का संदेश दिया गया है। पढ़ें इस प्रसिद्ध भजन के बोल, भावार्थ और इससे मिलने वाली प्रेरणा।

21 Jun 2026344
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धनतेरस पर यम का दीया क्यों जलाते हैं? जानिए सही विधि व रहस्य

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी (धनतेरस) की शाम को दक्षिण दिशा में मृत्यु के देवता यमराज के निमित्त जो विशेष दीपक प्रज्वलित किया जाता है, उसे 'यमदीप' (यम का दीया) कहते हैं। स्कंद पुराण और पद्म पुराण के अनुसार, धनतेरस के दिन यमराज के निमित्त चार मुखी दीपदान करने से परिवार के सदस्यों को अकाल मृत्यु, दुर्घटना और यम यातनाओं के भय से मुक्ति मिलती है। यह दीपक घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके अन्न की ढेरी पर रखा जाता है।

27 Oct 202620
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शरद पूनम: खीर रखने का समय, पूजा विधि व पौराणिक कथा

हिन्दू पंचांग के अनुसार आश्विन शुक्ल पूर्णिमा को 'शरद पूर्णिमा' या 'शरद पूनम' (कोजागरी पूर्णिमा) कहा जाता है। मान्यता है कि इस पावन रात्रि को चंद्रमा पृथ्वी के सर्वाधिक निकट होता है और अपनी संपूर्ण 16 कलाओं से अमृत की किरणें बरसाता है। इस रात खुले आकाश के नीचे गाय के दूध और चावल से बनी खीर (गुजरात में दूध-पौंआ) रखने की परंपरा है। मध्यरात्रि में धन की देवी माता लक्ष्मी "को जागर्ति" (कौन जाग रहा है?) पूछते हुए पृथ्वी पर विचरण करती हैं और जागरण करने वाले भक्तों को अखंड ऐश्वर्य का वरदान देती हैं।

25 Oct 202646
सभी पापों के बाद भी शकुनि को स्वर्ग क्यों मिला? जानिए रहस्य

सभी पापों के बाद भी शकुनि को स्वर्ग क्यों मिला? जानिए रहस्य

महाभारत के 'स्वर्गारोहण पर्व' के अनुसार, शकुनि को स्वर्ग मिलने के तीन प्रमुख कारण हैं। पहला, उसने कुरुक्षेत्र की पावन भूमि पर क्षत्रिय धर्म का पालन करते हुए सहदेव के विरुद्ध सम्मुख लड़कर वीरगति प्राप्त की थी। दूसरा, कर्मफल के शास्त्रीय नियम के अनुसार, जिस जीव के पाप अधिक और पुण्य बहुत कम होते हैं, उसे अपने अल्प पुण्यों का भोग करने के लिए पहले कुछ समय के लिए स्वर्ग प्राप्त होता है, जिसके समाप्त होने पर वह दीर्घकालीन नरक में जाता है। तीसरा, यह युधिष्ठिर के अहंकार और द्वेष की शुद्धि के लिए देवराज इंद्र और धर्मराज द्वारा रची गई एक मायावी परीक्षा थी।

25 Oct 202639
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गरुड़ पुराण की कथाएं आज क्यों जरूरी हैं? जानिए महत्व व सीख

गरुड़ पुराण केवल मृत्यु उपरांत की यात्रा या नरक की यातनाओं का विवरण नहीं है, बल्कि यह वर्तमान जीवन में नैतिकता, दया, और सदाचार से जीने का एक आध्यात्मिक मार्गदर्शक है। आधुनिक युग में जब भौतिक सुखों के पीछे भागते हुए लोग नैतिक मूल्य भूल रहे हैं, तब गरुड़ पुराण का 'कर्मफल का सिद्धांत' मनुष्य को जिम्मेदार, संवेदनशील और न्यायप्रिय बनने की गहरी सीख देता है।

30 Sep 202686
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भीष्म पितामह को इच्छामृत्यु का वरदान कैसे मिला? जानें महाभारत की कथा

**भीष्म पितामह**, जिन्हें जन्म के समय देवव्रत कहा जाता था, अपनी महान प्रतिज्ञा और त्याग के लिए प्रसिद्ध हैं। जब उन्होंने अपने पिता राजा शांतनु के सुख और सत्यवती से उनके विवाह के लिए आजीवन ब्रह्मचर्य तथा हस्तिनापुर के सिंहासन पर अपना अधिकार छोड़ने की भयंकर प्रतिज्ञा ली, तब शांतनु उनसे अत्यंत प्रसन्न हुए। उन्होंने देवव्रत को ऐसा वरदान दिया कि **मृत्यु उनकी इच्छा के अधीन रहेगी**। इसी कारण भीष्म युद्धभूमि में बाणों की शय्या पर पड़े रहने के बाद भी अपनी इच्छानुसार प्राण त्याग सके। इस लेख में जानें इच्छामृत्यु के वरदान की पूरी कथा और इसका महाभारत में महत्व।

18 Oct 202674
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4 Yugas Explained in Hindi | चार युगों की उत्पत्ति और रहस्य

हिंदू धर्मग्रंथों में समय को एक चक्र के रूप में समझाया गया है, जिसमें **सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर युग और कलियुग** क्रम से आते हैं। प्रत्येक युग में धर्म, मानव जीवन और नैतिक मूल्यों की स्थिति अलग बताई गई है। पुराणों में इन युगों की अवधि, विशेषताओं और एक युग से दूसरे युग में परिवर्तन का विस्तृत वर्णन मिलता है। इस लेख में जानें चारों युगों की उत्पत्ति, उनका क्रम, अवधि, धर्म के क्रमिक परिवर्तन और इस रहस्यमयी युगचक्र से जुड़ी पौराणिक मान्यताओं की सम्पूर्ण जानकारी।

26 Aug 2026166
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असुरों ने भगवान शिव की भक्ति क्यों की? 4 शक्तिशाली कारण और पौराणिक कथाएं

हिंदू पुराणों में कई ऐसे असुरों का वर्णन मिलता है जिन्होंने भगवान शिव की कठोर तपस्या और अनन्य भक्ति की थी। **रावण, बाणासुर और अन्य शिव भक्त असुरों** की कथाएं बताती हैं कि महादेव की भक्ति केवल देवताओं तक सीमित नहीं थी। असुरों ने शक्ति, वरदान, ज्ञान और अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए शिव की आराधना की, लेकिन उनकी कथाओं में भक्ति और अहंकार के बीच का अंतर भी स्पष्ट दिखाई देता है। इस लेख में जानें **4 प्रमुख कारण**, जिनके कारण असुर भगवान शिव के भक्त बने और उन्हें महादेव से कौन-कौन से वरदान प्राप्त हुए।

24 Aug 2026207
भगवान जगन्नाथ का परिचय | इतिहास, पौराणिक कथा, स्वरूप एवं महत्व

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भगवान जगन्नाथ भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य स्वरूप माने जाते हैं और ओडिशा के पुरी में स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर विश्वभर के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है।

02 Jul 2026546

🕉 पंचांग ज्ञान

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पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कालगणना की प्राचीन पद्धति है, जो तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण — इन पाँच अंगों पर आधारित है। इससे शुभ मुहूर्त, व्रत-त्योहार और दैनिक ग्रह स्थिति का पता चलता है।

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तिथि क्या है?

तिथि चंद्रमा और सूर्य के बीच के कोणीय अंतर से तय होती है। एक माह में 30 तिथियाँ होती हैं — 15 शुक्ल पक्ष और 15 कृष्ण पक्ष में। व्रत-पूजा के लिए सही तिथि जानना आवश्यक है।

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नक्षत्र क्या है?

नक्षत्र आकाश में चंद्रमा के पथ के 27 भाग हैं। चंद्रमा प्रतिदिन एक नक्षत्र बदलता है, और प्रत्येक नक्षत्र का अपना देवता व स्वभाव होता है जो दिन की ऊर्जा को प्रभावित करता है।

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राहु काल क्या है?

राहु काल दिन का वह अशुभ समयखंड है जब नया कार्य, विवाह, यात्रा या महत्वपूर्ण निर्णय नहीं लेने चाहिए। यह हर दिन और हर शहर में अलग समय पर आता है।

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शुभ मुहूर्त क्या है?

शुभ मुहूर्त वह समय है जब तिथि, नक्षत्र, योग और करण अनुकूल स्थिति में हों। ब्रह्म मुहूर्त, अभिजित और गोधूलि मुहूर्त इसके प्रमुख उदाहरण हैं।

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चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया दिन और रात को 8-8 भागों में बाँटकर शुभ-अशुभ समय बताने की पद्धति है। अमृत, शुभ और लाभ चौघड़िया सबसे शुभ माने जाते हैं।

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