Tilak Kathayein – पंचांग, हिंदू कथाएँ, आरती, चालीसा और मंत्र

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ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग: Omkareshwar Temple History & Guide

मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में पवित्र नर्मदा नदी के तट पर स्थित ओंकारेश्वर महादेव मंदिर भगवान शिव के 12 पावन ज्योतिर्लिंगों में चतुर्थ (चौथा) स्थान रखता है। इस पावन तीर्थ का भौगोलिक आकार प्राकृतिक रूप से ॐ (प्रणव) जैसा बना हुआ है, जिसे शिवपुरी या मान्धाता द्वीप कहा जाता है। शिव पुराण के अनुसार, इक्ष्वाकु वंश के चक्रवर्ती राजा मान्धाता की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर महादेव यहाँ ज्योति रूप में प्रकट हुए थे। ओंकारेश्वर के साथ नर्मदा पार स्थित 'ममलेश्वर' लिंग के दर्शन करने पर ही संपूर्ण ज्योतिर्लिंग यात्रा का फल पूर्ण माना जाता है।

Tilak Kathayein06 Sep 2026
आत्मा और परमात्मा – Atma aur Paramatma
ब्लॉग

Atma aur Paramatma | आत्मा और परमात्मा – सम्पूर्ण जानकारी 2026

आत्मा और परमात्मा – सम्पूर्ण जानकारी हिंदी में 2026। TilakKathayein।

Tilak Kathayein05 Apr 2026

नवीनतम लेख

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ब्लॉग

भगवद्गीता के 7 श्लोक जो आत्मविश्वास और स्वयं पर भरोसा करना सिखाते हैं

**भगवद्गीता** केवल आध्यात्मिक ज्ञान का ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन की कठिन परिस्थितियों में सही मार्ग दिखाने वाला दिव्य संदेश है। कुरुक्षेत्र में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को ऐसे अनेक उपदेश दिए, जो आज भी आत्मविश्वास, कर्म, धैर्य और स्वयं पर विश्वास रखने की प्रेरणा देते हैं। इस लेख में जानें **भगवद्गीता के 7 शक्तिशाली श्लोक**, उनके सरल हिंदी अर्थ और जीवन में मिलने वाली ऐसी सीखें, जो कठिन समय में अपने निर्णय और क्षमता पर भरोसा करना सिखाती हैं।

17 Sep 2026107
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त्योहार

गणेश चतुर्थी व्रत कथा: जानिए संपूर्ण पौराणिक कथा, पूजा विधि और व्रत का महत्व

गणेश चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित प्रमुख हिंदू पर्व है। इस दिन श्रद्धालु व्रत रखकर विधि-विधान से गणपति की पूजा करते हैं और व्रत कथा का श्रवण करते हैं। मान्यता है कि गणेश जी की पूजा करने से जीवन में आने वाले विघ्न दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। इस लेख में जानिए गणेश चतुर्थी व्रत की पौराणिक कथा, पूजा विधि, व्रत के नियम और धार्मिक महत्व।

13 Sep 202696
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ब्लॉग

गणेश जी को प्रथम पूज्य क्यों कहा जाता है? जानें पूरी पौराणिक कथा और रहस्य

हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य या पूजा की शुरुआत अक्सर **भगवान गणेश के स्मरण** से की जाती है। इसके पीछे गणेश जी और उनके भाई कार्तिकेय से जुड़ी एक प्रसिद्ध पौराणिक कथा है, जिसमें दोनों के बीच संसार की परिक्रमा करने की प्रतियोगिता हुई थी। गणेश जी ने बुद्धि और माता-पिता के प्रति अपनी श्रद्धा का परिचय देते हुए शिव-पार्वती की परिक्रमा की और विजयी हुए। प्रसन्न होकर उन्हें प्रथम पूज्य होने का वरदान मिला। इस लेख में जानें गणेश जी की प्रथम पूजा का कारण, पूरी पौराणिक कथा और इसके पीछे छिपा गहरा आध्यात्मिक संदेश।

11 Sep 2026118
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कहानियाँ

कर्ण की कहानी हजारों साल पहले कैसे शुरू हुई? महाभारत से जुड़ा रहस्यमयी रहस्य

**कर्ण** महाभारत के सबसे रहस्यमयी और महान योद्धाओं में से एक थे, लेकिन उनकी कहानी केवल कुरुक्षेत्र युद्ध से शुरू नहीं होती। उनके जन्म, सूर्यदेव से संबंध, कुंती के रहस्य और जीवन में मिले शाप-वरदानों ने उनके भाग्य को जन्म से ही प्रभावित किया। विभिन्न पौराणिक परंपराओं में कर्ण से जुड़े पूर्वजन्म और प्राचीन घटनाओं की भी अलग-अलग मान्यताएं मिलती हैं। इस लेख में जानें कर्ण की कहानी की शुरुआत, उनके जन्म का रहस्य, सूर्यदेव से दिव्य संबंध और महाभारत से जुड़े उन पौराणिक प्रसंगों को, जिन्होंने उनके जीवन की दिशा तय की।

09 Sep 202699
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12 Jyotirlingas

वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग: Baidyanath Dham Guide & Katha

झारखंड के देवघर में स्थित बाबा बैद्यनाथ (वैद्यनाथ) मंदिर भगवान शिव के 12 पवित्र ज्योतिर्लिंगों में से एक है, जिसे 'कामना लिंग' के नाम से भी जाना जाता है। शिव पुराण के अनुसार, लंकापति रावण ने महादेव को लंका ले जाने के लिए यहाँ अपने दस शीश काटकर घोर तपस्या की थी। भगवान शिव ने प्रकट होकर उसके शीश पुनः जोड़ दिए और एक कुशल वैद्य की तरह उसकी चिकित्सा की, जिससे इस धाम का नाम 'वैद्यनाथ' पड़ा। सावन के पावन मास में सुल्तानगंज से गंगाजल लाकर बाबा धाम में जलाभिषेक करने का विशेष धार्मिक महत्व है।

07 Sep 2026171
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12 Jyotirlingas

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग: Omkareshwar Temple History & Guide

मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में पवित्र नर्मदा नदी के तट पर स्थित ओंकारेश्वर महादेव मंदिर भगवान शिव के 12 पावन ज्योतिर्लिंगों में चतुर्थ (चौथा) स्थान रखता है। इस पावन तीर्थ का भौगोलिक आकार प्राकृतिक रूप से ॐ (प्रणव) जैसा बना हुआ है, जिसे शिवपुरी या मान्धाता द्वीप कहा जाता है। शिव पुराण के अनुसार, इक्ष्वाकु वंश के चक्रवर्ती राजा मान्धाता की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर महादेव यहाँ ज्योति रूप में प्रकट हुए थे। ओंकारेश्वर के साथ नर्मदा पार स्थित 'ममलेश्वर' लिंग के दर्शन करने पर ही संपूर्ण ज्योतिर्लिंग यात्रा का फल पूर्ण माना जाता है।

06 Sep 2026190
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त्योहार

जन्माष्टमी 2026: श्रीकृष्ण को माखन-मिश्री क्यों प्रिय है? पौराणिक कथा और रहस्य

**जन्माष्टमी 2026** पर भगवान श्रीकृष्ण को माखन-मिश्री का भोग लगाने की परंपरा विशेष रूप से लोकप्रिय है। बाल गोपाल की माखन चोरी की लीलाएं उनकी बालसुलभ चंचलता और भक्तों के प्रति प्रेम को दर्शाती हैं। माखन को प्रेम और सरलता का प्रतीक माना जाता है, जबकि मिश्री मिठास और शुद्ध भाव का प्रतीक मानी जाती है। इस लेख में जानें श्रीकृष्ण को माखन-मिश्री क्यों प्रिय मानी जाती है, इससे जुड़ी पौराणिक कथा, धार्मिक महत्व और जन्माष्टमी पर भोग लगाने की परंपरा।

03 Sep 2026112
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ब्लॉग

शीतला सातम 2026: Shitala Satam Date, Muhurat & Guide

सनातन धर्म में शीतला सातम (शीतला सप्तमी) आरोग्य, स्वच्छता और संक्रामक रोगों से रक्षा का पावन लोकपर्व है, जो मुख्य रूप से गुजरात और पश्चिमी भारत में श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाता है। वर्ष 2026 में शीतला सातम 3 सितंबर 2026 (गुरुवार) को मनाई जाएगी, जबकि इससे एक दिन पूर्व 2 सितंबर 2026 को रांधण छठ पर भोजन पकाया जाएगा। इस दिन घर में अग्नि या चूल्हा जलाना वर्जित होता है और माता शीतला को एक दिन पूर्व बना ठंडा (बासोड़ा) भोजन अर्पित कर प्रसाद रूप में ग्रहण किया जाता है।

02 Sep 2026136
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मंदिर

पशुपतिनाथ मंदिर: इतिहास, रहस्य, दर्शन समय व यात्रा गाइड

नेपाल के काठमांडू में बागमती नदी के तट पर स्थित पशुपतिनाथ मंदिर भगवान शिव के सबसे पवित्र और प्राचीन धामों में से एक है, जिसे यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा प्राप्त है। यह मंदिर भगवान शिव के 'पशुपति' (समस्त जीवों के रक्षक) स्वरूप को समर्पित है, जहाँ स्थापित अद्वितीय पंचमुखी शिवलिंग के चार मुख चारों दिशाओं और पांचवां मुख ऊर्ध्व दिशा (आकाश) का प्रतीक हैं। मान्यता है कि केदारनाथ में शिव के पृष्ठ भाग और पशुपतिनाथ में उनके अग्र भाग (मुख) के दर्शन होते हैं।

30 Aug 2026206
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कहानियाँ

द्रौपदी और कृष्ण की राखी की कहानी | महाभारत में दोनों के रिश्ते का सच

**द्रौपदी और श्रीकृष्ण का रिश्ता** महाभारत की सबसे भावनात्मक कथाओं में से एक है। लोकप्रिय मान्यता में द्रौपदी द्वारा कृष्ण को राखी बांधने की कथा सुनाई जाती है, लेकिन मूल महाभारत में राखी बांधने का स्पष्ट वर्णन नहीं मिलता। महाभारत में एक प्रसिद्ध प्रसंग है जिसमें कृष्ण की उंगली से रक्त निकलने पर द्रौपदी कपड़े का टुकड़ा बांधती हैं और कृष्ण उनके इस स्नेह का ऋण चुकाने का वचन देते हैं। इस लेख में जानें दोनों के रिश्ते का वास्तविक स्वरूप और राखी की लोकप्रिय कथा के पीछे की मान्यता।

28 Aug 2026178
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ब्लॉग

7 शक्तिशाली नाग और उनके दिव्य संबंध | नाग देवताओं की रहस्यमयी पौराणिक कथाएं

हिंदू धर्म और पुराणों में नागों को केवल सर्प नहीं, बल्कि शक्तिशाली दिव्य प्राणियों के रूप में वर्णित किया गया है। **शेषनाग, वासुकी, तक्षक, कर्कोटक और अन्य प्रमुख नागों** का संबंध भगवान विष्णु, भगवान शिव, समुद्र मंथन और अनेक पौराणिक घटनाओं से जुड़ा है। प्रत्येक नाग की अपनी अलग शक्ति, कथा और धार्मिक महत्व है। इस लेख में जानें **7 शक्तिशाली नागों** की अद्भुत कहानियां, उनके दिव्य संबंध और हिंदू धर्म में उनके विशेष स्थान से जुड़े रोचक पौराणिक रहस्य।

28 Aug 2026156
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कथाएँ

4 Yugas Explained in Hindi | चार युगों की उत्पत्ति और रहस्य

हिंदू धर्मग्रंथों में समय को एक चक्र के रूप में समझाया गया है, जिसमें **सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर युग और कलियुग** क्रम से आते हैं। प्रत्येक युग में धर्म, मानव जीवन और नैतिक मूल्यों की स्थिति अलग बताई गई है। पुराणों में इन युगों की अवधि, विशेषताओं और एक युग से दूसरे युग में परिवर्तन का विस्तृत वर्णन मिलता है। इस लेख में जानें चारों युगों की उत्पत्ति, उनका क्रम, अवधि, धर्म के क्रमिक परिवर्तन और इस रहस्यमयी युगचक्र से जुड़ी पौराणिक मान्यताओं की सम्पूर्ण जानकारी।

26 Aug 2026166
Stuti - Namo Chandike Ho Chamund Mata | नमो चंडिके हो चामुंड माता

Stuti - Namo Chandike Ho Chamund Mata | नमो चंडिके हो चामुंड माता

'नमो चंडिके, नमो चामुंडाय नमः' मंत्र जाप से शक्ति और सुरक्षा मिलती है, जो दुर्गा सप्तशती में वर्णित है और देवी चामुंडा के दिव्य स्वरूप की आराधना द्वारा आध्यात्मिक उन्नति और विघ्न निवारण का मार्ग प्रशस्त करता है.

26 May 2026311
ॐ जय जगदीश हरे

Om Jai Jagdish Hare | ॐ जय जगदीश हरे

ॐ जय जगदीश हरे आरती भगवान विष्णु को समर्पित है, जिसकी सरल विधि और भक्तिपूर्ण गायन से आध्यात्मिक शांति मिलती है। यह आरती घर में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है।

09 May 2026334
जय अम्बे गौरी

Jai Ambe Gauri | जय अम्बे गौरी

जय अम्बे गौरी आरती के बोल माता दुर्गा की स्तुति हैं, जिसे विधिपूर्वक गाने से भक्तों को आध्यात्मिक शांति और मनोकामना पूर्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यह शक्तिशाली आरती नवरात्रि में विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है और इसका जप भव बाधाओं को दूर करता है।

09 May 2026451
श्री राम स्तुति: श्री रामचंद्र कृपालु भजमन – संपूर्ण पाठ, सरल अर्थ और आध्यात्मिक महत्व

श्री राम स्तुति: श्री रामचंद्र कृपालु भजमन – संपूर्ण पाठ, सरल अर्थ और आध्यात्मिक महत्व

श्री रामचंद्र कृपालु भजमन गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित भगवान श्रीराम की एक लोकप्रिय स्तुति है। जानें इसका संपूर्ण पाठ, हिंदी अर्थ, धार्मिक महत्व और पाठ के लाभ।

20 Jul 2026226
हे दुःख भंजन मारुती नंदन | हनुमान भजन लिरिक्स और महत्व

हे दुःख भंजन मारुती नंदन | हनुमान भजन लिरिक्स और महत्व

हे दुःख भंजन मारुती नंदन" भगवान हनुमान जी को समर्पित एक प्रसिद्ध भक्तिमय भजन है। इस भजन में भक्त पवनपुत्र हनुमान जी से दुखों को दूर करने, शक्ति और साहस प्रदान करने की प्रार्थना करता है। पढ़ें हनुमान भजन के सुंदर बोल और इसका महत्व।

27 Jun 2026392
उठो सोने वालों सबेरा हुआ है | वंशीधर शुक्ल का प्रेरणादायक देशभक्ति भजन<

उठो सोने वालों सबेरा हुआ है | वंशीधर शुक्ल का प्रेरणादायक देशभक्ति भजन

"उठो सोने वालों सबेरा हुआ है" वंशीधर शुक्ल द्वारा रचित एक प्रेरणादायक देशभक्ति भजन है। इस भजन में नई सुबह, आशा, जागृति और देश प्रेम का संदेश दिया गया है। पढ़ें इस प्रसिद्ध भजन के बोल, भावार्थ और इससे मिलने वाली प्रेरणा।

21 Jun 2026344
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धनतेरस पर यम का दीया क्यों जलाते हैं? जानिए सही विधि व रहस्य

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी (धनतेरस) की शाम को दक्षिण दिशा में मृत्यु के देवता यमराज के निमित्त जो विशेष दीपक प्रज्वलित किया जाता है, उसे 'यमदीप' (यम का दीया) कहते हैं। स्कंद पुराण और पद्म पुराण के अनुसार, धनतेरस के दिन यमराज के निमित्त चार मुखी दीपदान करने से परिवार के सदस्यों को अकाल मृत्यु, दुर्घटना और यम यातनाओं के भय से मुक्ति मिलती है। यह दीपक घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके अन्न की ढेरी पर रखा जाता है।

27 Oct 202620
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शरद पूनम: खीर रखने का समय, पूजा विधि व पौराणिक कथा

हिन्दू पंचांग के अनुसार आश्विन शुक्ल पूर्णिमा को 'शरद पूर्णिमा' या 'शरद पूनम' (कोजागरी पूर्णिमा) कहा जाता है। मान्यता है कि इस पावन रात्रि को चंद्रमा पृथ्वी के सर्वाधिक निकट होता है और अपनी संपूर्ण 16 कलाओं से अमृत की किरणें बरसाता है। इस रात खुले आकाश के नीचे गाय के दूध और चावल से बनी खीर (गुजरात में दूध-पौंआ) रखने की परंपरा है। मध्यरात्रि में धन की देवी माता लक्ष्मी "को जागर्ति" (कौन जाग रहा है?) पूछते हुए पृथ्वी पर विचरण करती हैं और जागरण करने वाले भक्तों को अखंड ऐश्वर्य का वरदान देती हैं।

25 Oct 202646
सभी पापों के बाद भी शकुनि को स्वर्ग क्यों मिला? जानिए रहस्य

सभी पापों के बाद भी शकुनि को स्वर्ग क्यों मिला? जानिए रहस्य

महाभारत के 'स्वर्गारोहण पर्व' के अनुसार, शकुनि को स्वर्ग मिलने के तीन प्रमुख कारण हैं। पहला, उसने कुरुक्षेत्र की पावन भूमि पर क्षत्रिय धर्म का पालन करते हुए सहदेव के विरुद्ध सम्मुख लड़कर वीरगति प्राप्त की थी। दूसरा, कर्मफल के शास्त्रीय नियम के अनुसार, जिस जीव के पाप अधिक और पुण्य बहुत कम होते हैं, उसे अपने अल्प पुण्यों का भोग करने के लिए पहले कुछ समय के लिए स्वर्ग प्राप्त होता है, जिसके समाप्त होने पर वह दीर्घकालीन नरक में जाता है। तीसरा, यह युधिष्ठिर के अहंकार और द्वेष की शुद्धि के लिए देवराज इंद्र और धर्मराज द्वारा रची गई एक मायावी परीक्षा थी।

25 Oct 202639
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गरुड़ पुराण की कथाएं आज क्यों जरूरी हैं? जानिए महत्व व सीख

गरुड़ पुराण केवल मृत्यु उपरांत की यात्रा या नरक की यातनाओं का विवरण नहीं है, बल्कि यह वर्तमान जीवन में नैतिकता, दया, और सदाचार से जीने का एक आध्यात्मिक मार्गदर्शक है। आधुनिक युग में जब भौतिक सुखों के पीछे भागते हुए लोग नैतिक मूल्य भूल रहे हैं, तब गरुड़ पुराण का 'कर्मफल का सिद्धांत' मनुष्य को जिम्मेदार, संवेदनशील और न्यायप्रिय बनने की गहरी सीख देता है।

30 Sep 202686
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भीष्म पितामह को इच्छामृत्यु का वरदान कैसे मिला? जानें महाभारत की कथा

**भीष्म पितामह**, जिन्हें जन्म के समय देवव्रत कहा जाता था, अपनी महान प्रतिज्ञा और त्याग के लिए प्रसिद्ध हैं। जब उन्होंने अपने पिता राजा शांतनु के सुख और सत्यवती से उनके विवाह के लिए आजीवन ब्रह्मचर्य तथा हस्तिनापुर के सिंहासन पर अपना अधिकार छोड़ने की भयंकर प्रतिज्ञा ली, तब शांतनु उनसे अत्यंत प्रसन्न हुए। उन्होंने देवव्रत को ऐसा वरदान दिया कि **मृत्यु उनकी इच्छा के अधीन रहेगी**। इसी कारण भीष्म युद्धभूमि में बाणों की शय्या पर पड़े रहने के बाद भी अपनी इच्छानुसार प्राण त्याग सके। इस लेख में जानें इच्छामृत्यु के वरदान की पूरी कथा और इसका महाभारत में महत्व।

18 Oct 202674
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4 Yugas Explained in Hindi | चार युगों की उत्पत्ति और रहस्य

हिंदू धर्मग्रंथों में समय को एक चक्र के रूप में समझाया गया है, जिसमें **सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर युग और कलियुग** क्रम से आते हैं। प्रत्येक युग में धर्म, मानव जीवन और नैतिक मूल्यों की स्थिति अलग बताई गई है। पुराणों में इन युगों की अवधि, विशेषताओं और एक युग से दूसरे युग में परिवर्तन का विस्तृत वर्णन मिलता है। इस लेख में जानें चारों युगों की उत्पत्ति, उनका क्रम, अवधि, धर्म के क्रमिक परिवर्तन और इस रहस्यमयी युगचक्र से जुड़ी पौराणिक मान्यताओं की सम्पूर्ण जानकारी।

26 Aug 2026166
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असुरों ने भगवान शिव की भक्ति क्यों की? 4 शक्तिशाली कारण और पौराणिक कथाएं

हिंदू पुराणों में कई ऐसे असुरों का वर्णन मिलता है जिन्होंने भगवान शिव की कठोर तपस्या और अनन्य भक्ति की थी। **रावण, बाणासुर और अन्य शिव भक्त असुरों** की कथाएं बताती हैं कि महादेव की भक्ति केवल देवताओं तक सीमित नहीं थी। असुरों ने शक्ति, वरदान, ज्ञान और अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए शिव की आराधना की, लेकिन उनकी कथाओं में भक्ति और अहंकार के बीच का अंतर भी स्पष्ट दिखाई देता है। इस लेख में जानें **4 प्रमुख कारण**, जिनके कारण असुर भगवान शिव के भक्त बने और उन्हें महादेव से कौन-कौन से वरदान प्राप्त हुए।

24 Aug 2026207
भगवान जगन्नाथ का परिचय | इतिहास, पौराणिक कथा, स्वरूप एवं महत्व

भगवान जगन्नाथ का परिचय | इतिहास, पौराणिक कथा, स्वरूप एवं महत्व

भगवान जगन्नाथ भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य स्वरूप माने जाते हैं और ओडिशा के पुरी में स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर विश्वभर के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है।

02 Jul 2026546

🕉 पंचांग ज्ञान

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पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कालगणना की प्राचीन पद्धति है, जो तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण — इन पाँच अंगों पर आधारित है। इससे शुभ मुहूर्त, व्रत-त्योहार और दैनिक ग्रह स्थिति का पता चलता है।

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तिथि क्या है?

तिथि चंद्रमा और सूर्य के बीच के कोणीय अंतर से तय होती है। एक माह में 30 तिथियाँ होती हैं — 15 शुक्ल पक्ष और 15 कृष्ण पक्ष में। व्रत-पूजा के लिए सही तिथि जानना आवश्यक है।

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नक्षत्र क्या है?

नक्षत्र आकाश में चंद्रमा के पथ के 27 भाग हैं। चंद्रमा प्रतिदिन एक नक्षत्र बदलता है, और प्रत्येक नक्षत्र का अपना देवता व स्वभाव होता है जो दिन की ऊर्जा को प्रभावित करता है।

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राहु काल क्या है?

राहु काल दिन का वह अशुभ समयखंड है जब नया कार्य, विवाह, यात्रा या महत्वपूर्ण निर्णय नहीं लेने चाहिए। यह हर दिन और हर शहर में अलग समय पर आता है।

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शुभ मुहूर्त क्या है?

शुभ मुहूर्त वह समय है जब तिथि, नक्षत्र, योग और करण अनुकूल स्थिति में हों। ब्रह्म मुहूर्त, अभिजित और गोधूलि मुहूर्त इसके प्रमुख उदाहरण हैं।

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चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया दिन और रात को 8-8 भागों में बाँटकर शुभ-अशुभ समय बताने की पद्धति है। अमृत, शुभ और लाभ चौघड़िया सबसे शुभ माने जाते हैं।

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