Surya Dev Ki Aarti | सूर्य देव की आरती – बोल, विधि और महत्व | Tilak Kathayein - Tilak Kathayein
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Surya Dev Ki Aarti | सूर्य देव की आरती – बोल, विधि और महत्व

Tilak Kathayein12 Apr 2026122 views📖 1 min read
सूर्य देव की आरती – Surya Dev Ki Aarti
सूर्य देव की आरती – सम्पूर्ण आरती बोल, अर्थ और आरती करने की विधि। सूर्य की आरती हिंदी में।

सूर्य देव की आरती – परिचय

सूर्य देव की आरती एक स्तुति गान है जो भगवान सूर्य को समर्पित है। यह आरती सूर्य देव की पूजा के दौरान गाई जाती है। माना जाता है कि इस आरती की रचना प्राचीन ऋषियों ने की थी। यह आरती सूर्य देव की महिमा का वर्णन करती है और भक्तों को उनका आशीर्वाद प्राप्त करने में मदद करती है।

हिंदू पूजा पद्धति में आरती का महत्वपूर्ण स्थान है। यह एक प्रकार की प्रार्थना है जो दीपक, धूप और अन्य पवित्र वस्तुओं के साथ की जाती है। सूर्य देव की आरती विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह जीवन और प्रकाश के स्रोत, सूर्य भगवान को समर्पित है। इस आरती को गाने से भक्तों को ऊर्जा, स्वास्थ्य और समृद्धि प्राप्त होती है।

सूर्य देव की आरती के बोल

जय कश्यप-नन्दन, ओम जय अदिति-नन्दन,
त्रिभुवन-तिमिर-निकन्दन, भक्त-हृदय-चन्दन, ओम जय अदिति-नन्दन।

सप्त-अश्व-रथ-राजित, एक-चक्र-धारी,
दु:ख-हारी, सुख-कारी, मन-मोहन-मुरारी, ओम जय अदिति-नन्दन।

तेज-पुंज-प्रकाशा, तम-अज्ञान-नाशा,
कर्म-फल-दाता, जग-त्राता, विश्व-विधाता, ओम जय अदिति-नन्दन।

अखिल-भुवन-स्वामी, ज्योतिर्मय-नामी,
भक्त-वत्सल, सुख-सागर, अन्तर्यामी, ओम जय अदिति-नन्दन।

शरणागत-वत्सल, करुणा-निधानम्,
रोग-शोक-हारी, भय-निवारि, मुक्ति-प्रदानम्, ओम जय अदिति-नन्दन।

सूर्य-देव आरती, जो कोई नर गावे,
रोग-दरिद्र-हारी, सुख-कारी, शांति पावे, ओम जय अदिति-नन्दन।

आरती का अर्थ

पहले अंतरे का शब्दार्थ है: कश्यप के पुत्र, अदिति के पुत्र, तीनों लोकों के अंधकार को दूर करने वाले, भक्तों के हृदय को चंदन की तरह शीतल करने वाले, आपकी जय हो। इसका भावार्थ है कि सूर्य देव कश्यप और अदिति के पुत्र हैं और वे अपने प्रकाश से तीनों लोकों से अंधकार को दूर करते हैं। वे अपने भक्तों के हृदय को शीतल करते हैं और उन्हें शांति प्रदान करते हैं।

आरती का मुख्य भाव यह है कि भक्त सूर्य देव से उनकी कृपा, सुख, शांति और मुक्ति की कामना कर रहा है। वह सूर्य देव की महिमा का वर्णन करते हुए उन्हें अखिल भुवन स्वामी, ज्योतिर्मय नामी, भक्त वत्सल और करुणा निधान के रूप में स्तुति करता है। भक्त सूर्य देव से रोग, शोक और भय को दूर करने की प्रार्थना करता है।

आरती करने की विधि

आरती की थाली में दीपक, कपूर, घी, फूल, धूप, अक्षत (चावल) और कुमकुम रखें। दीपक घी का होना चाहिए और उसमें बाती जल रही होनी चाहिए। फूल ताजे होने चाहिए और धूप सुगंधित होनी चाहिए।

आरती को क्लॉकवाइज (दक्षिणावर्त) दिशा में घुमाएं। सबसे पहले भगवान के चरणों में चार बार, नाभि के पास दो बार, मुख पर एक बार और फिर पूरे शरीर पर सात बार घुमाएं। आरती करते समय, "ओम जय अदिति-नन्दन" या अन्य मंत्रों का जाप करें।

सूर्य की आरती सूर्योदय के समय (मंगला आरती) या सूर्यास्त के समय (संध्या आरती) करना उचित है। कुछ लोग इसे दोपहर में भी करते हैं।

आरती के लाभ

  • सूर्य की कृपा – सूर्य देव की आरती करने से सूर्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यह आशीर्वाद स्वास्थ्य, समृद्धि और सफलता के रूप में प्राप्त होता है।
  • घर में सुख-शांति – नियमित रूप से सूर्य देव की आरती करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जिससे सुख और शांति बनी रहती है।
  • मनोकामना पूर्ति – सूर्य देव की आरती भक्ति भाव से करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और उन्हें जीवन में सफलता मिलती है।

निष्कर्ष

सूर्य देव की आरती का दिव्य महत्व है। लाखों भक्तों द्वारा यह आरती प्रिय है, इसका पवित्र उद्गम है, और सूर्य पूजा की परंपरा में यह विशेष है क्योंकि यह प्रकाश और जीवन के स्रोत के प्रति गहरी श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करती है। यह न केवल स्तुति है, बल्कि सूर्य की ऊर्जा से जुड़ने और आंतरिक शांति प्राप्त करने का एक मार्ग है।

भक्तों को प्रेरित किया जाता है कि वे इस आरती को पूर्ण भक्ति के साथ प्रतिदिन गाएं। यह न केवल सूर्य देव को प्रसन्न करने का एक माध्यम है, बल्कि स्वयं को सकारात्मक ऊर्जा से भरने का भी एक तरीका है। जय सूर्य!

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