Jai Ambe Gauri Aarti: Lyrics, Meaning, and Benefits - Tilak Kathayein
आरती

Jai Ambe Gauri | जय अम्बे गौरी

Tilak Kathayein09 May 2026229 views📖 1 min read
जय अम्बे गौरी
जय अम्बे गौरी आरती के बोल माता दुर्गा की स्तुति हैं, जिसे विधिपूर्वक गाने से भक्तों को आध्यात्मिक शांति और मनोकामना पूर्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यह शक्तिशाली आरती नवरात्रि में विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है और इसका जप भव बाधाओं को दूर करता है।

जय अम्बे गौरी – परिचय

जय अम्बे गौरी एक प्रसिद्ध और अत्यंत श्रद्धेय आरती है जो माँ दुर्गा को समर्पित है। यह आरती आमतौर पर नवरात्रि, दुर्गा पूजा और अन्य धार्मिक अवसरों पर गाई जाती है। माना जाता है कि यह आरती देवी दुर्गा की स्तुति में रची गई है और भक्त उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए इसका पाठ करते हैं। इस आरती के रचयिता के बारे में निश्चित जानकारी उपलब्ध नहीं है, लेकिन यह सदियों से हिंदू परिवारों में एक अभिन्न अंग रही है।

हिंदू पूजा पद्धति में आरती का महत्वपूर्ण स्थान है। यह एक प्रतीकात्मक क्रिया है जिसमें भक्त दीपक, धूप और कपूर के माध्यम से अपनी श्रद्धा और प्रेम को भगवान को अर्पित करते हैं। जय अम्बे गौरी आरती विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह माँ दुर्गा की शक्ति, करुणा और मातृत्व को व्यक्त करती है। यह भक्तों को देवी माँ से जुड़ने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने का एक शक्तिशाली माध्यम है।

जय अम्बे गौरी के बोल

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥

मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को।
उज्ज्वल से दोउ नैना, चन्द्रवदन नीको॥

कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजे।
रक्त पुष्प गल माला, कण्ठन पर साजे॥

केहरि वाहन राजत, खड्ग कृपाण धारी।
सुर-नर-मुनि जन सेवत, तिनके दुखहारी॥

कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती।
कोटिक चन्द्र दिवाकर, राजत ज्योति॥

शुम्भ निशुम्भ बिदारे, महिषासुर घाती।
धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती॥

चण्ड मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे।
मधु कैटभ दोउ मारे, सुर भय दूर करे॥

ब्रह्माणी रुद्राणी तुम कमला रानी।
आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी॥

चौसठ योगिनी गावत, नृत्य करत भैरों।
बाजत ताल मृदंगा, और बाजत डमरू॥

तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता।
भक्तन की दुख हरता, सुख सम्पति करता॥

भुजा चार अति शोभित, वर मुद्रा धारी।
मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी॥

कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।
श्री मालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति॥

श्री अम्बेजी की आरती, जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख सम्पति पावे॥

आरती का अर्थ

पहले अंतरे "जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी। तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥" का अर्थ है - हे अम्बे गौरी, हे माँ श्यामा गौरी आपकी जय हो। हरि (विष्णु), ब्रह्मा और शिव, तीनों देवता दिन रात आपका ध्यान करते हैं। इस पंक्ति में माँ दुर्गा के सौंदर्य, शक्ति और ब्रह्मांडीय महत्व का वर्णन किया गया है।

आरती का मुख्य भाव माँ दुर्गा की महिमा का गान करना और उनसे अपनी श्रद्धा, प्रेम और भक्ति अर्पित करना है। भक्त माँ दुर्गा से सुख, शांति, समृद्धि और सुरक्षा की कामना करता है। यह आरती माँ दुर्गा को प्रसन्न करने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने का एक शक्तिशाली उपाय है। आरती में भक्त अपनी इच्छाओं को व्यक्त करते हैं और देवी माँ के प्रति समर्पण दिखाते हैं।

आरती करने की विधि

आरती की थाली में दीपक (घी या तेल का), कपूर, फूल, धूप और कुमकुम रखें। कुछ लोग जल का पात्र और चावल भी रखते हैं। थाली को सुंदर ढंग से सजाया जाता है।

आरती को भगवान की मूर्ति के सामने खड़े होकर घुमाएं। आमतौर पर, आरती को चार बार चरणों के पास, दो बार नाभि के पास, एक बार चेहरे के पास और सात बार पूरे शरीर के चारों ओर घुमाया जाता है। आरती करते समय "जय अम्बे गौरी" या अन्य मंत्रों का जाप करें। भाव से और बिना जल्दबाजी के आरती करनी चाहिए।

दुर्गा की आरती सुबह (मंगला आरती), दोपहर (संध्या आरती) या रात (शयन आरती) में की जा सकती है। मंगला आरती आमतौर पर सूर्योदय से पहले, संध्या आरती सूर्यास्त के समय और शयन आरती सोने से पहले की जाती है। प्रत्येक आरती का अपना महत्व है और इसे उचित समय पर करने से विशेष लाभ मिलता है।

आरती के लाभ

  • दुर्गा की कृपा – आरती करने से माँ दुर्गा प्रसन्न होती हैं और अपना आशीर्वाद प्रदान करती हैं। उनकी कृपा से भक्तों के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।
  • घर में सुख-शांति – नियमित रूप से आरती करने से घर का वातावरण शुद्ध होता है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। इससे घर में सुख-शांति बनी रहती है।
  • मनोकामना पूर्ति – श्रद्धा और भक्ति से आरती करने से माँ दुर्गा भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करती हैं। यह एक शक्तिशाली उपाय है जिससे जीवन में सफलता और आनंद प्राप्त होता है।

निष्कर्ष

जय अम्बे गौरी का दिव्य महत्व अतुलनीय है। यह आरती लाखों लोगों द्वारा पसंद की जाती है क्योंकि यह सरलता और गहन भक्ति का मिश्रण है। दुर्गा पूजा की परम्परा में, यह न केवल एक स्तुति है, बल्कि माँ दुर्गा के प्रति प्रेम और समर्पण का प्रतीक भी है, जो इसे अत्यंत विशेष बनाता है।

सभी भक्तों को प्रेरित किया जाता है कि वे इस आरती को प्रतिदिन गाएं। यह माँ दुर्गा के साथ जुड़ने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने का एक सरल और शक्तिशाली तरीका है। जय दुर्गा!

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