Tilak Kathayein पर पाएं आज का पंचांग, तिथि, हिंदू कथाएं, आरती, चालीसा, मंत्र और मंदिरों का इतिहास। जानें शुभ मुहूर्त, त्योहार और सनातन धर्म की संपूर्ण जानकारी।

Dashamata Vrat Katha – दशामाता व्रत
देवी की कथाएँ

दशामाता व्रत कथा | पूजा विधि, व्रत का महत्व, शुभ मुहूर्त और सम्पूर्ण कथा

दशामाता व्रत हिंदू धर्म का एक पवित्र व्रत है, जिसे परिवार की सुख-समृद्धि, सौभाग्य और संकटों से रक्षा के लिए श्रद्धापूर्वक किया जाता है। इस व्रत में माता दशामाता की पूजा, पवित्र कथा का श्रवण और विधि-विधान से व्रत का पालन विशेष फलदायी माना जाता है। इस लेख में जानें दशामाता व्रत की सम्पूर्ण कथा, पूजा विधि, व्रत नियम, शुभ मुहूर्त, उद्यापन की विधि और धार्मिक महत्व।

Tilak Kathayein27 Jul 2025
श्रावण सोमवार व्रत कथा: पूजा विधि, नियम, महत्व, उद्यापन और संपूर्ण जानकारी
ब्लॉग

श्रावण सोमवार व्रत कथा: पूजा विधि, नियम, महत्व, उद्यापन और संपूर्ण जानकारी

श्रावण सोमवार व्रत भगवान शिव को समर्पित पवित्र व्रत है। जानिए सावन सोमवार व्रत की कथा, पूजा विधि, नियम, महत्व, शिवलिंग अभिषेक, व्रत में क्या खाएं और उद्यापन की संपूर्ण विधि।

Tilak Kathayein13 Aug 2026

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Purushottam Maas Katha: Adhyaya 27 | पुरुषोत्तम मास कथा: अध्याय 27
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पुरुषोत्तम मास में तप और भक्ति से राजा दृढ़धन्वा और रानी गुणसुंदरी गोलोक पहुंचे। कथा स्वार्थी कदर्य ब्राह्मण के पापों, वानर योनि, और मोक्ष पर केंद्रित है। श्रीनारायण बोले, ‘इस…

08 Jan 2025512
Purushottam Maas Katha: Adhyaya 28 | पुरुषोत्तम मास कथा: अध्याय 28
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पुरुषोत्तम मास कथा: अध्याय 28

श्री नारायण बोले- चित्रगुप्त धर्मराज के वचन को सुनकर अपने योद्धाओं से बोले- यह कदर्य प्रथम बहुत समय तक अत्यन्त लोभ से ग्रस्त हुआ, बाद चोरी करना शुरू किया। इसलिये यह…

08 Jan 2025470
Purushottam Maas Katha: Adhyaya 29 – पुरुषोत्तम मास कथा: अध्याय 29
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सूर्यनारायण के अस्ताचल जाने के समय तीर्थ में जाकर अथवा गृह में ही पैर धोकर, पवित्र वस्त्र धारण कर, सायंसन्ध्या की उपासना करे। पुण्यशील-सुशील बोले, ‘हे विभो! गोलोक को चलो,…

07 Jan 2025256
Suryadev Vrat Katha: सूर्य देव की व्रत कथा
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रविवार का महत्व और सूर्य देव की पूजा

रविवार का दिन सूर्य देव को समर्पित है। मान्यता है कि अगर रविवार के दिन सूर्य देव की श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना की जाए तो मनुष्य के जीवन में सुख-समृद्धि और धन-संपत्ति…

06 Jan 2025240
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06 Jan 2025423
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26 Dec 2024247
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यह त्योहार हिन्दू कैलेंडर के चैत्र मास की नवमी तिथि को मनाया जाता है। रामलीला का आयोजन भी किया जाता है, जिसमें भगवान राम की कथा को स्थानीय अभिनेताओं द्वारा...

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केदारनाथ मंदिर भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। जानें मंदिर का इतिहास, यात्रा मार्ग, दर्शन, पूजा, खुलने और बंद होने की तिथि तथा धार्मिक महत्व।

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'नमो चंडिके, नमो चामुंडाय नमः' मंत्र जाप से शक्ति और सुरक्षा मिलती है, जो दुर्गा सप्तशती में वर्णित है और देवी चामुंडा के दिव्य स्वरूप की आराधना द्वारा आध्यात्मिक उन्नति और विघ्न निवारण का मार्ग प्रशस्त करता है.

26 May 2026173
ॐ जय जगदीश हरे

Om Jai Jagdish Hare | ॐ जय जगदीश हरे

ॐ जय जगदीश हरे आरती भगवान विष्णु को समर्पित है, जिसकी सरल विधि और भक्तिपूर्ण गायन से आध्यात्मिक शांति मिलती है। यह आरती घर में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है।

09 May 2026193
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Jai Ambe Gauri | जय अम्बे गौरी

जय अम्बे गौरी आरती के बोल माता दुर्गा की स्तुति हैं, जिसे विधिपूर्वक गाने से भक्तों को आध्यात्मिक शांति और मनोकामना पूर्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यह शक्तिशाली आरती नवरात्रि में विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है और इसका जप भव बाधाओं को दूर करता है।

09 May 2026243
श्री राम स्तुति: श्री रामचंद्र कृपालु भजमन – संपूर्ण पाठ, सरल अर्थ और आध्यात्मिक महत्व

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श्री रामचंद्र कृपालु भजमन गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित भगवान श्रीराम की एक लोकप्रिय स्तुति है। जानें इसका संपूर्ण पाठ, हिंदी अर्थ, धार्मिक महत्व और पाठ के लाभ।

20 Jul 202679
हे दुःख भंजन मारुती नंदन | हनुमान भजन लिरिक्स और महत्व

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27 Jun 2026213
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13 Aug 202618
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श्रावण अमावस्या पूजा विधि | पितृ तर्पण, दान का महत्व, शुभ मुहूर्त और सम्पूर्ण जानकारी

**श्रावण अमावस्या** हिंदू धर्म में पितरों की शांति, भगवान शिव की कृपा और पुण्य प्राप्ति के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। इस दिन **पितृ तर्पण, स्नान, दान और विधिपूर्वक पूजा** का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक किए गए तर्पण और दान से पितृ प्रसन्न होते हैं तथा परिवार में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। इस लेख में जानें श्रावण अमावस्या की पूजा विधि, पितृ तर्पण की सही प्रक्रिया, दान का महत्व, शुभ मुहूर्त और धार्मिक मान्यताओं की सम्पूर्ण जानकारी।

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माता लक्ष्मी के विभिन्न स्वरूप और उनका महत्व | Maa Lakshmi Forms in Hindi

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**माता लक्ष्मी** केवल धन और वैभव की देवी ही नहीं, बल्कि सुख, समृद्धि, ज्ञान, साहस, संतान, विजय और आध्यात्मिक उन्नति का भी प्रतीक हैं। शास्त्रों में उनके अनेक दिव्य स्वरूपों का वर्णन मिलता है, जिनमें **आदि लक्ष्मी, धन लक्ष्मी, धान्य लक्ष्मी, गज लक्ष्मी, संतान लक्ष्मी, वीर लक्ष्मी, विजय लक्ष्मी और विद्या लक्ष्मी** विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं। इस लेख में जानें माता लक्ष्मी के विभिन्न स्वरूप, उनका धार्मिक महत्व, प्रत्येक स्वरूप की विशेष कृपा और उनसे जुड़ी पौराणिक मान्यताओं की सम्पूर्ण जानकारी।

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राधा जी कौन थीं? क्या राधा जी माता लक्ष्मी का अवतार थीं? शास्त्रों में क्या लिखा है?

राधा जी कौन थीं? क्या राधा जी माता लक्ष्मी का अवतार थीं? शास्त्रों में क्या लिखा है?

राधा रानी केवल भगवान श्रीकृष्ण की परम भक्त ही नहीं, बल्कि अनेक वैष्णव परंपराओं में उन्हें भगवान की **आनंद शक्ति (ह्लादिनी शक्ति)** का साक्षात् स्वरूप माना गया है। वहीं कुछ शास्त्रीय परंपराएं उन्हें माता लक्ष्मी से अभिन्न या उनका दिव्य स्वरूप भी बताती हैं। इस लेख में जानें राधा जी कौन थीं, क्या वे वास्तव में माता लक्ष्मी का अवतार थीं, तथा **ब्रह्मवैवर्त पुराण, देवी भागवत, गौड़ीय वैष्णव ग्रंथों और अन्य शास्त्रीय संदर्भों** में उनके स्वरूप का क्या वर्णन मिलता है।

06 Aug 202654
भगवान जगन्नाथ का परिचय | इतिहास, पौराणिक कथा, स्वरूप एवं महत्व

भगवान जगन्नाथ का परिचय | इतिहास, पौराणिक कथा, स्वरूप एवं महत्व

भगवान जगन्नाथ भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य स्वरूप माने जाते हैं और ओडिशा के पुरी में स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर विश्वभर के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है।

02 Jul 2026334
माँ धूमावती उत्पत्ति कथा

Dhumavati Utpatti Katha | माँ धूमावती उत्पत्ति कथा

धूमावती उत्पत्ति कथा, पाठ विधि और लाभों को जानकर आप इस देवी के रहस्यमय स्वरूप को समझ सकते हैं और जीवन की बाधाओं से मुक्ति पा सकते हैं। संपूर्ण कथा, विधि और लाभों का विस्तृत विवरण आपको माँ धूमावती की कृपा प्राप्त करने का मार्ग दिखाएगा।

23 Jun 2026131
कालाष्टमी व्रत – अध्याय 5: भक्ति का फल और सीख

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कालाष्टमी व्रत का अध्याय 5 — भक्ति का फल और सीख। यह अंतिम अध्याय बताता है कि कालाष्टमी व्रत रखने से प्राप्त होने वाले परिणाम और इससे मिली सीख क्या है।

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कालाष्टमी व्रत का अध्याय 4 — दिव्य हस्तक्षेप और आशीर्वाद। अध्याय चार में, भगवान भैरव भक्त की अटूट भक्ति से प्रसन्न होते हैं और उसे अपना आशीर्वाद देते हैं।

08 Jun 2026114

🕉 पंचांग ज्ञान

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पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कालगणना की प्राचीन पद्धति है, जो तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण — इन पाँच अंगों पर आधारित है। इससे शुभ मुहूर्त, व्रत-त्योहार और दैनिक ग्रह स्थिति का पता चलता है।

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तिथि क्या है?

तिथि चंद्रमा और सूर्य के बीच के कोणीय अंतर से तय होती है। एक माह में 30 तिथियाँ होती हैं — 15 शुक्ल पक्ष और 15 कृष्ण पक्ष में। व्रत-पूजा के लिए सही तिथि जानना आवश्यक है।

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नक्षत्र क्या है?

नक्षत्र आकाश में चंद्रमा के पथ के 27 भाग हैं। चंद्रमा प्रतिदिन एक नक्षत्र बदलता है, और प्रत्येक नक्षत्र का अपना देवता व स्वभाव होता है जो दिन की ऊर्जा को प्रभावित करता है।

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राहु काल क्या है?

राहु काल दिन का वह अशुभ समयखंड है जब नया कार्य, विवाह, यात्रा या महत्वपूर्ण निर्णय नहीं लेने चाहिए। यह हर दिन और हर शहर में अलग समय पर आता है।

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शुभ मुहूर्त क्या है?

शुभ मुहूर्त वह समय है जब तिथि, नक्षत्र, योग और करण अनुकूल स्थिति में हों। ब्रह्म मुहूर्त, अभिजित और गोधूलि मुहूर्त इसके प्रमुख उदाहरण हैं।

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चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया दिन और रात को 8-8 भागों में बाँटकर शुभ-अशुभ समय बताने की पद्धति है। अमृत, शुभ और लाभ चौघड़िया सबसे शुभ माने जाते हैं।

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