
Purushottam Maas Katha: Adhyaya 28 | पुरुषोत्तम मास कथा: अध्याय 28
श्री नारायण बोले- चित्रगुप्त धर्मराज के वचन को सुनकर अपने योद्धाओं से बोले- यह कदर्य प्रथम बहुत समय तक अत्यन्त लोभ से ग्रस्त हुआ, बाद चोरी करना शुरू किया। इसलिये यह…

श्री नारायण बोले- चित्रगुप्त धर्मराज के वचन को सुनकर अपने योद्धाओं से बोले- यह कदर्य प्रथम बहुत समय तक अत्यन्त लोभ से ग्रस्त हुआ, बाद चोरी करना शुरू किया। इसलिये यह…

सूर्यनारायण के अस्ताचल जाने के समय तीर्थ में जाकर अथवा गृह में ही पैर धोकर, पवित्र वस्त्र धारण कर, सायंसन्ध्या की उपासना करे। पुण्यशील-सुशील बोले, ‘हे विभो! गोलोक को चलो,…

रविवार का दिन सूर्य देव को समर्पित है। मान्यता है कि अगर रविवार के दिन सूर्य देव की श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना की जाए तो मनुष्य के जीवन में सुख-समृद्धि और धन-संपत्ति…

पुरुषोत्तम मास (Purushottam Maas) कथा के अध्याय 30 में, एक उत्कृष्ट रूप से योग्य और अधिक पुण्यवान व्यक्ति की कथा दी गई है। इस कथा में, एक राजा जिसका नाम…

तमिलनाडु में समुद्र तट पर स्थित इस मंदिर को रामायणकालीन माना जाता है। मान्यता है कि अयोध्या के राजा भगवान श्री राम ने लंकापति रावण से युद्ध करने से पहले…

यह त्योहार हिन्दू कैलेंडर के चैत्र मास की नवमी तिथि को मनाया जाता है। रामलीला का आयोजन भी किया जाता है, जिसमें भगवान राम की कथा को स्थानीय अभिनेताओं द्वारा...

केदारनाथ मंदिर भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। जानें मंदिर का इतिहास, यात्रा मार्ग, दर्शन, पूजा, खुलने और बंद होने की तिथि तथा धार्मिक महत्व।

यह व्रत भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से प्रारंभ होता है। यह व्रत सोलह दिनों तक किया जाता है। इस दिन स्नान करके सोलह बार हाथ, पैर और मुंह धोने के उपरांत...

यह व्रत किसी भी मंगलवार को किया जा सकता है। व्रत वाले दिन सुबह जल्दी उठें, नहाएं नहीं, आशापुरा मां की तस्वीर को कंडे या पाटले पर रखें, घी का…

प्राचीन काल में एक सेठजी के सात पुत्र थे। सातों के विवाह हो चुके थे। सबसे छोटे पुत्र की पत्नी श्रेष्ठ चरित्र की विदूषी और सुशील थी, परंतु उसके भाई…
वट सावित्री व्रत कथा – वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ मास की अमावस्या के साथ आज मनाया जा रहा है। आज सुहागिन महिलाएं व्रत रखने के साथ…

श्रीगणेश को धूप-दीप, फूल, दूर्वा आदि चढ़ाएं। गुड़-धनिए का प्रसाद अर्पित करें। इसके बाद गणेशजी के सामने बैठकर पन्ना या हरे हकीक की माला से (ऊँ गं गणपतये नमः मंत्र…)