
Ashapura maa vrat – आशापुरा माँ का व्रत
यह व्रत किसी भी मंगलवार को किया जा सकता है। व्रत वाले दिन सुबह जल्दी उठें, नहाएं नहीं, आशापुरा मां की तस्वीर को कंडे या पाटले पर रखें, घी का…
Tilak Kathayein TilakKathayein की संपादकीय टीम है, जो प्रामाणिक शास्त्रों पर आधारित हिंदू कथाएँ, आरती, चालीसा, मंत्र और पंचांग प्रकाशित करती है।

यह व्रत किसी भी मंगलवार को किया जा सकता है। व्रत वाले दिन सुबह जल्दी उठें, नहाएं नहीं, आशापुरा मां की तस्वीर को कंडे या पाटले पर रखें, घी का…

प्राचीन काल में एक सेठजी के सात पुत्र थे। सातों के विवाह हो चुके थे। सबसे छोटे पुत्र की पत्नी श्रेष्ठ चरित्र की विदूषी और सुशील थी, परंतु उसके भाई…
वट सावित्री व्रत कथा – वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ मास की अमावस्या के साथ आज मनाया जा रहा है। आज सुहागिन महिलाएं व्रत रखने के साथ…

श्रीगणेश को धूप-दीप, फूल, दूर्वा आदि चढ़ाएं। गुड़-धनिए का प्रसाद अर्पित करें। इसके बाद गणेशजी के सामने बैठकर पन्ना या हरे हकीक की माला से (ऊँ गं गणपतये नमः मंत्र…)

हर वर्ष भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के दिन इस व्रत को धारण किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार स्त्रियों को रसवालाममें पूजा पाठ और धार्मिक…

॥ दोहा॥ विष्णु सुनिए विनय सेवक की चितलाय । कीरत कुछ वर्णन करूं दीजै ज्ञान बताय । ॥ चौपाई ॥ नमो विष्णु भगवान खरारी । कष्ट नशावन अखिल बिहारी ॥ प्रबल…

दोहा श्री शनि चालीसा एक प्रसिद्ध हिन्दू धार्मिक ग्रंथ है। यह चालीसा 40 श्लोकों का समूह है जो शनिवार के दिन उनकी पूजा के अवसर पर उतारा जाता है। ||…

तिलक लगाना हिंदू परंपरा में इस्तेमाल की जाने वाली एक विशेष रस्म है। बिना तिलक लगाए न तो पूजा करने की अनुमति मिलती है और न ही पूजा पूरी होती…

रावण ने अपनी भक्ति और समर्पण के साथ शिव तांडव स्तोत्र को रचा था। यह स्तोत्र एक उत्कृष्ट काव्य है जिसमें शिव की महिमा, शक्ति और विनाशकारी स्वरूप का वर्णन है।

माँ अन्नपूर्णा माता का महाव्रत मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष पंचमी से प्रारम्भ होता है और मार्गशीर्ष शुक्ल षष्ठी को समाप्त होता है। यह उत्तमोत्तम व्रत सत्रह दिनों का होता है…

छोटी छोटी गैया, छोटे छोटे ग्वाल । छोटो सो मेरो मदन गोपाल ॥ छोटी छोटी गैया, छोटे छोटे ग्वाल । छोटो सो मेरो मदन गोपाल ॥ आगे आगे गैया पीछे पीछे…

धृतराष्ट्र उवाच: धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः । मामकाः पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत सञ्जय ।। धृतराष्ट्र बोले- हे संजय ! धर्मभूमि कुरुक्षेत्रमें एकत्रित, युद्धकी इच्छावाले मेरे और पाण्डुके पुत्रोंने क्या किया ? ॥१॥…