
पुरुषोत्तम मास कथा: अध्याय 18
नारद जी से दृढ़धन्वा ने पूर्वजन्म की कथा सुनी। बाल्मीकि ने पुत्र-शोक, पुरुषोत्तम मास की महिमा, और ब्राह्मण की तपस्या से श्रीहरि की कृपा का वर्णन किया। नारद जी बोले, …

नारद जी से दृढ़धन्वा ने पूर्वजन्म की कथा सुनी। बाल्मीकि ने पुत्र-शोक, पुरुषोत्तम मास की महिमा, और ब्राह्मण की तपस्या से श्रीहरि की कृपा का वर्णन किया। नारद जी बोले, …

श्रीसूत जी ने नारद मुनि द्वारा श्रीहरि से पूछे प्रश्न और सुदेव ब्राह्मण के पुरुषोत्तम मास सेवन से हुए अद्भुत फल का वर्णन किया। भगवान विष्णु ने सुदेव को इस...

पुरुषोत्तम मास में विधिपूर्वक स्नान, दान, व्रत, तिलक, पूजा और भगवान पुरुषोत्तम की आराधना से महान पुण्य प्राप्त होता है, जो मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है। सूतजी बोले –…

वाल्मीकि मुनि ने भगवान पुरुषोत्तम की प्रतिमा में प्राण-प्रतिष्ठा और भक्तिपूर्वक पूजन के महत्व का वर्णन किया, जिससे भक्त को सभी सुख और मोक्ष की प्राप्ति होती है। वाल्मीकि मुनि…

बाल्मीकि मुनि ने पुरुषोत्तम भगवान् की प्राण प्रतिष्ठा, षोडशोपचार पूजा, और भक्ति से किए गए पूजन के महत्व को बताया, जो परम सुख और मोक्ष का मार्ग है। बाल्मीकि मुनि…

गणेश चालीसा को भक्तिभाव से पढ़ने या गाने से व्यक्ति को सुख, समृद्धि, और समाधान की प्राप्ति होती है, साथ ही उनकी सभी मनोकामनाएँ पूरी होती हैं। इस चालीसा को…

भक्त अपने जीवन में पैदा हुई कठिनाइयों और बाधाओं को दूर करने के लिए श्री शिव चालीसा का नियमित पाठ करते हैं। श्री शिव चालीसा के पाठ से आप अपने...

राजा चित्रबाहु, पूर्व जन्म में शूद्र मणिग्रीव, ब्राह्मण उग्रदेव की सेवा कर पुण्य प्राप्त करते हैं। उनकी पतिव्रता स्त्री धर्मनिष्ठ थी, जिससे उनका भाग्योदय हुआ। दृढ़धन्वा राजा बोला- हे मुनियों…

यदि कन्या व्रत करती है तो गुणी चिरञ्जीयवी पति को प्राप्त करती है, स्त्री की इच्छा करने वाला पुरुष सुशीला और पतिव्रता स्त्री को प्राप्त करता है। मणिग्रीव बोला, ‘हे…

पुरुषोत्तम मास व्रत विधि में भगवान विष्णु की पूजा, अर्घ्य, दान, ब्राह्मण भोजन और जागरण द्वारा मोक्ष और सुखप्राप्ति का विधान बताया गया है। दृढ़धन्वा बोला, ‘हे ब्रह्मन्! हे मुने!…

उद्यापन व्रत के नियम त्याग में दान और विधिपूर्वक आचरण से भगवान की प्रसन्नता मिलती है। पाप नाशक और कल्याणकारी यह व्रत मोक्ष प्रदान करता है। अब उद्यापन के पीछे…

पुरुषोत्तम मास में तप और भक्ति से राजा दृढ़धन्वा और रानी गुणसुंदरी गोलोक पहुंचे। कथा स्वार्थी कदर्य ब्राह्मण के पापों, वानर योनि, और मोक्ष पर केंद्रित है। श्रीनारायण बोले, ‘इस…