
प्रह्लाद और हिरण्यकशिपु – अध्याय 7: प्रह्लाद का शासन और शांति
प्रह्लाद और हिरण्यकशिपु का अध्याय 7 — प्रह्लाद का शासन और शांति। नरसिंह भगवान के शांत होने पर प्रह्लाद उनकी स्तुति करते हैं और फिर वे राजा बनते हैं, जिससे जगत में शांति स्थापित होती है।
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प्रह्लाद और हिरण्यकशिपु का अध्याय 7 — प्रह्लाद का शासन और शांति। नरसिंह भगवान के शांत होने पर प्रह्लाद उनकी स्तुति करते हैं और फिर वे राजा बनते हैं, जिससे जगत में शांति स्थापित होती है।

प्रह्लाद और हिरण्यकशिपु का अध्याय 6 — नरसिंह अवतार का आगमन। जब हिरण्यकशिपु प्रह्लाद को मारने का अंतिम प्रयास करता है, तब भगवान विष्णु नरसिंह अवतार में प्रकट होकर उसका वध करते हैं।

प्रह्लाद और हिरण्यकशिपु का अध्याय 5 — हिरण्यकशिपु का क्रोध बढ़ता है। प्रह्लाद की विष्णु भक्ति से क्रोधित होकर हिरण्यकशिपु उसे मारने के कई असफल प्रयास करता है।

प्रह्लाद और हिरण्यकशिपु का अध्याय 4 — प्रह्लाद की अटूट भक्ति। प्रह्लाद, असुर कुल में जन्म लेने के बावजूद नारायण के परम भक्त होते हैं और गुरुकुल में भी नारायण का नाम जपते हैं।

प्रह्लाद और हिरण्यकशिपु का अध्याय 3 — प्रह्लाद: गर्भ में ज्ञान। हिरण्यकशिपु की पत्नी कयाधु, देवर्षि नारद के आश्रम में रहती हैं जहाँ गर्भ में पल रहे प्रह्लाद को विष्णु भक्ति का ज्ञान प्राप्त होता है।

प्रह्लाद और हिरण्यकशिपु का अध्याय 2 — कश्यप और दिति की संतान। महर्षि कश्यप और दिति के पुत्र हिरण्यकशिपु और हिरण्याक्ष के जन्म की कथा और उनकी विष्णु के प्रति शत्रुता का कारण बताया गया है।

प्रह्लाद और हिरण्यकशिपु का अध्याय 1 — हिरण्यकशिपु: वरदान और क्रोध। हिरण्यकशिपु, तपस्या से अमरता का वरदान पाकर तीनों लोकों पर अत्याचार करना शुरू कर देता है।