
Shrimad Bhagwat Puran – Chapter 3: Hiranyakashipu and Narasimha Avatar
श्रीमद भागवत पुराण का अध्याय 3 — हिरण्यकशिपु और नरसिंह अवतार। हिरण्यकशिपु की तपस्या और अत्याचार, और भगवान विष्णु द्वारा नरसिंह अवतार लेकर उसका वध।
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श्रीमद भागवत पुराण का अध्याय 3 — हिरण्यकशिपु और नरसिंह अवतार। हिरण्यकशिपु की तपस्या और अत्याचार, और भगवान विष्णु द्वारा नरसिंह अवतार लेकर उसका वध।

श्रीमद भागवत पुराण का अध्याय 2 — वराह अवतार: पृथ्वी का उद्धार। हिरण्याक्ष द्वारा पृथ्वी को हरण करने पर भगवान विष्णु वराह अवतार लेकर उसका उद्धार करते हैं।

श्रीमद भागवत पुराण का अध्याय 1 — सृष्टि का आरंभ और विष्णु। यह अध्याय सृजन की शुरुआत और भगवान विष्णु के महत्व को स्थापित करता है, जिसमें विभिन्न अवतारों की उत्पत्ति का वर्णन है।
वराह अवतार कथा का अध्याय 5 — पुनर्स्थापन और शान्ति। पृथ्वी की पुनर्स्थापना होती है, देवता प्रसन्न होते हैं और वराह अवतार की महिमा का गान करते हैं, जिससे धर्म की स्थापना होती है।
कूर्म अवतार कथा का अध्याय 5 — अमृत और सीख। अमृत निकलता है, देवताओं और असुरों में युद्ध होता है, विष्णु मोहिनी रूप में अमृत वितरण करते हैं, और देवताओं को अमृत मिलता है।
मत्स्य अवतार कथा का अध्याय 5 — नई सृष्टि, नया युग। प्रलय समाप्त होने पर, मनु नई सृष्टि की शुरुआत करते हैं, और मत्स्य अवतार का उद्देश्य पूरा होता है।
वराह अवतार कथा का अध्याय 4 — बुराई पर विजय। भयंकर युद्ध में वराह भगवान हिरण्याक्ष का वध करते हैं और पृथ्वी को अपने दाँतों पर धारण कर ऊपर लाते हैं।
कूर्म अवतार कथा का अध्याय 4 — कूर्म अवतार का समर्थन। भगवान विष्णु कूर्म अवतार लेते हैं और अपनी विशाल पीठ पर मंदराचल पर्वत को धारण कर मंथन को सफल बनाते हैं।
मत्स्य अवतार कथा का अध्याय 4 — मत्स्य का मार्गदर्शन और वचन। मत्स्य अवतार नाव का मार्गदर्शन करते हैं, शेषनाग की रस्सी का उपयोग करते हैं, और वेदों का ज्ञान वापस दिलाते हैं।
वराह अवतार कथा का अध्याय 3 — पृथ्वी का उद्धार। वराह भगवान रसातल में प्रवेश करते हैं और अपनी शक्ति से हिरण्याक्ष को चुनौती देते हैं।
कूर्म अवतार कथा का अध्याय 3 — मंथन की प्रक्रिया। समुद्र मंथन जारी है और अनेक अद्भुत वस्तुएं निकलती हैं, लेकिन मंथन की तीव्रता से मंदराचल पर्वत डूबने लगता है।
मत्स्य अवतार कथा का अध्याय 3 — नाव, प्रलय और रक्षा। मनु नाव बनाते हैं, सभी जीवों को इकट्ठा करते हैं, और प्रलय के जल से रक्षा करते हैं।