
Purushottam Maas Katha | पुरुषोत्तम मास माहात्म्य
पुरुषोत्तम मास, जिसे मलमास के नाम से जाना जाता था, श्रीकृष्ण के वरदान से विशेष महत्व प्राप्त करता है। इस माह में तप, पूजा, दान, कथा श्रवण से अनंत पुण्य…
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पुरुषोत्तम मास, जिसे मलमास के नाम से जाना जाता था, श्रीकृष्ण के वरदान से विशेष महत्व प्राप्त करता है। इस माह में तप, पूजा, दान, कथा श्रवण से अनंत पुण्य…

अधिमास, शरणागत होकर भगवान विष्णु से अपने तिरस्कार और कष्ट की व्यथा कहता है। करुणा से द्रवित भगवान विष्णु अधिमास को स्वीकारते हैं और उसे आश्वासन देते हैं। श्रीनारायण बोले, …

दुर्वासा मुनि ने कन्या को पुरुषोत्तम मास का महत्व बताया, लेकिन उसने उसे नकारा। फिर दुर्वासा ने उसे शाप देने के बजाय, शिव की तपस्या करने की सलाह दी। नारद…

कथा में एक तपस्विनी कन्या ने भगवान शिव की कठोर तपस्या की। शिवजी ने उसे पाँच पति का वर दिया, लेकिन कन्या ने इसे अस्वीकार कर दिया, और पुरुषोत्तम मास…

सुदेव शर्मा ब्राह्मण ने भगवान विष्णु से पुत्र की प्रार्थना की। उनकी भक्ति से प्रभावित होकर भगवान विष्णु ने गरुड़ के माध्यम से उसे सुंदर पुत्र प्रदान किया। श्रीनारायण बोले, …

राजा दृढ़धन्वा ने पूर्वजन्म की कथा सुनने के बाद बाल्मीकि से और सुनने की इच्छा जताई। बाल्मीकि ने सुदेव शर्मा के पुत्र शोक की कथा सुनाई, जिसमें पुत्र शुकदेव की…

नारद जी से दृढ़धन्वा ने पूर्वजन्म की कथा सुनी। बाल्मीकि ने पुत्र-शोक, पुरुषोत्तम मास की महिमा, और ब्राह्मण की तपस्या से श्रीहरि की कृपा का वर्णन किया। नारद जी बोले, …

श्रीसूत जी ने नारद मुनि द्वारा श्रीहरि से पूछे प्रश्न और सुदेव ब्राह्मण के पुरुषोत्तम मास सेवन से हुए अद्भुत फल का वर्णन किया। भगवान विष्णु ने सुदेव को इस...

पुरुषोत्तम मास में विधिपूर्वक स्नान, दान, व्रत, तिलक, पूजा और भगवान पुरुषोत्तम की आराधना से महान पुण्य प्राप्त होता है, जो मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है। सूतजी बोले –…

वाल्मीकि मुनि ने भगवान पुरुषोत्तम की प्रतिमा में प्राण-प्रतिष्ठा और भक्तिपूर्वक पूजन के महत्व का वर्णन किया, जिससे भक्त को सभी सुख और मोक्ष की प्राप्ति होती है। वाल्मीकि मुनि…

बाल्मीकि मुनि ने पुरुषोत्तम भगवान् की प्राण प्रतिष्ठा, षोडशोपचार पूजा, और भक्ति से किए गए पूजन के महत्व को बताया, जो परम सुख और मोक्ष का मार्ग है। बाल्मीकि मुनि…

राजा चित्रबाहु, पूर्व जन्म में शूद्र मणिग्रीव, ब्राह्मण उग्रदेव की सेवा कर पुण्य प्राप्त करते हैं। उनकी पतिव्रता स्त्री धर्मनिष्ठ थी, जिससे उनका भाग्योदय हुआ। दृढ़धन्वा राजा बोला- हे मुनियों…