कथाएँ

सावित्री सत्यवान कथा – अध्याय 5: सावित्री यमराज का पीछा करती है

Tilak Kathayein12 Apr 2026125 views📖 1 min read
सावित्री सत्यवान कथा
सावित्री सत्यवान कथा का अध्याय 5 — सावित्री यमराज का पीछा करती है। यमराज सत्यवान के आत्मा को ले जाते हैं, और सावित्री दृढ़ता से उनका पीछा करती है, अपनी बुद्धि और भक्ति से यमराज को प्रभावित करती है।

सावित्री यमराज का पीछा करती है

यमराज की कठोर यात्रा

[सत्यवान का निष्प्राण शरीर भूमि पर निश्चल पड़ा था। सावित्री की आँखों में आँसुओं का सैलाब उमड़ रहा था, फिर भी उसने धीरज नहीं खोया। उसने देखा कि तेजस्वी यमराज, सत्यवान की आत्मा को लेकर दक्षिण दिशा की ओर बढ़ रहे हैं। यमराज का स्वरूप अत्यंत भयावह था, उनका तेज सूर्य के समान प्रखर था, और उनका रथ काल की गति से चल रहा था। सावित्री जानती थी कि यह एक असंभव कार्य है, फिर भी, हृदय में सत्यवान के प्रति अटूट प्रेम और विश्वास लेकर, वह यमराज के पीछे दौड़ी। उसका हर कदम उसके प्रेम की गवाही दे रहा था, उसकी हर साँस सत्यवान के नाम की माला जप रही थी।]

सावित्री मन ही मन प्रार्थना कर रही थी, "हे प्रभु, मुझे इतनी शक्ति देना कि मैं अपने पति को वापस ला सकूँ। मेरा जीवन सत्यवान के बिना अधूरा है, मैं उनके बिना जी नहीं सकती।" उसने अपने गुरुजनों की शिक्षाओं को याद किया, सत्य के मार्ग पर चलने का निश्चय किया, और यमराज का पीछा करती रही।

सावित्री और यमराज का संवाद

सावित्री ने शांत स्वर में उत्तर दिया, "हे यमराज, मैं अपने पति के साथ जा रही हूँ। जहाँ मेरे पति होंगे, वहीं मेरा जीवन है। धर्म कहता है कि पत्नी को पति का अनुसरण करना चाहिए, और मैं अपने धर्म का पालन कर रही हूँ। मैं आपसे प्रार्थना करती हूँ कि आप मुझे मेरे पति के साथ जाने दें।" यमराज उसकी भक्ति और निडरता से प्रभावित हुए, परन्तु उन्होंने अपने कर्तव्य का पालन करना था। उन्होंने कहा, "हे सावित्री, तुम्हारा प्रेम अद्भुत है, परन्तु मृत्यु अटल है। सत्यवान का जीवन समाप्त हो चुका है, और अब तुम उन्हें वापस नहीं ला सकती। मैं तुम्हें एक वरदान दे सकता हूँ, परन्तु सत्यवान का जीवन नहीं।"

सावित्री ने कहा, "हे यमराज, यदि आप मुझे वरदान देना ही चाहते हैं, तो मुझे यह वरदान दीजिए कि मेरे सास-ससुर की खोई हुई दृष्टि वापस आ जाए और उनका राज्य उन्हें पुन: प्राप्त हो।" यमराज ने तथास्तु कहा और आगे बढ़ गए। परन्तु सावित्री फिर भी उनके पीछे चलती रही, उसका प्रेम उसे विश्राम करने नहीं दे रहा था, उसका हर कदम एक प्रश्न था, उसकी हर साँस एक चुनौती थी।

प्रेम और मृत्यु का संघर्ष

अध्याय 5 का सार: इस अध्याय में, सावित्री यमराज का पीछा करती है, जो उसके सत्यवान के प्रति अटूट प्रेम और धर्म-निष्ठा को दर्शाता है। यह अध्याय प्रेम और मृत्यु के बीच के संघर्ष को उजागर करता है, और यह सिखाता है कि सच्ची श्रद्धा और विश्वास से किसी भी मुश्किल को पार किया जा सकता है।

🕉

आज का पंचांग 29 अगस्त 2026

शुभ मुहूर्त, चोघड़िया, राशिफल और ग्रह स्थिति की पूरी जानकारी के लिए

शेयर करें:

संबंधित लेख

कालाष्टमी व्रत – अध्याय 5: भक्ति का फल और सीख
कथाएँ

कालाष्टमी व्रत – अध्याय 5: भक्ति का फल और सीख

कालाष्टमी व्रत का अध्याय 5 — भक्ति का फल और सीख। यह अंतिम अध्याय बताता है कि कालाष्टमी व्रत रखने से प्राप्त होने वाले परिणाम और इससे मिली सीख क्या है।

08 Jun 2026175
कालाष्टमी व्रत – अध्याय 4: दिव्य हस्तक्षेप और आशीर्वाद
कथाएँ

कालाष्टमी व्रत – अध्याय 4: दिव्य हस्तक्षेप और आशीर्वाद

कालाष्टमी व्रत का अध्याय 4 — दिव्य हस्तक्षेप और आशीर्वाद। अध्याय चार में, भगवान भैरव भक्त की अटूट भक्ति से प्रसन्न होते हैं और उसे अपना आशीर्वाद देते हैं।

08 Jun 2026140
कालाष्टमी व्रत – अध्याय 3: परीक्षा और कष्टों का सामना
कथाएँ

कालाष्टमी व्रत – अध्याय 3: परीक्षा और कष्टों का सामना

कालाष्टमी व्रत का अध्याय 3 — परीक्षा और कष्टों का सामना। इस अध्याय में, भक्त को भगवान की कृपा प्राप्त करने से पहले कई बाधाओं और परीक्षाओं का सामना करना पड़ता है।

08 Jun 2026143
कालाष्टमी व्रत – अध्याय 2: भक्त की विनती और भक्ति
कथाएँ

कालाष्टमी व्रत – अध्याय 2: भक्त की विनती और भक्ति

कालाष्टमी व्रत का अध्याय 2 — भक्त की विनती और भक्ति। इस अध्याय में, एक भक्त की सच्ची भक्ति और भगवान भैरव से उसकी पुकार का वर्णन किया गया है।

08 Jun 2026134
पातंजल योगसूत्र
ग्रंथ

पातंजल योगसूत्र – अध्याय 5: विरासत: मिलन और मुक्ति

पातंजल योगसूत्र का अध्याय 5 — विरासत: मिलन और मुक्ति। यह अध्याय पतंजलि की विरासत, योग के माध्यम से मिलन और मुक्ति के मार्ग, और उनके दर्शन के शाश्वत महत्व को दर्शाता है।

13 Apr 2026173