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नरसिंह अवतार कथा – अध्याय 4: होलिका का असफल प्रयास

Tilak Kathayein12 Apr 202680 views📖 1 min read
नरसिंह अवतार कथा
नरसिंह अवतार कथा का अध्याय 4 — होलिका का असफल प्रयास। हिरण्यकशिपु अपनी बहन होलिका को प्रह्लाद को अग्नि में भस्म करने के लिए भेजता है, लेकिन होलिका खुद जल जाती है।

होलिका का असफल प्रयास

पिछले अध्याय में हमने प्रह्लाद की कठोर परीक्षाओं और हिरण्यकशिपु के अत्याचारों का विवरण देखा। प्रह्लाद की विष्णु भक्ति अटूट थी, और हर प्रकार की यातनाएँ सहने के बाद भी, वह अपनी भक्ति से विचलित नहीं हुआ। अब, हिरण्यकशिपु ने अपनी बहन होलिका की सहायता लेने का निश्चय किया, जिसके पास अग्नि से न जलने का वरदान था।

अग्नि परीक्षा की तैयारी

राजमहल के प्रांगण में विशाल चिता तैयार की गई। लकड़ियों का ढेर आकाश को छू रहा था, और पूरे राज्य में भय और उत्सुकता का माहौल था। हिरण्यकशिपु का क्रोध चरम पर था, उसकी आँखें लाल थीं, और वह प्रह्लाद को विष्णु भक्ति से दूर करने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार था। प्रजा में कानाफूसी हो रही थी, सबके मन में प्रह्लाद की सलामती को लेकर चिंता थी। हवा में भय और अनिश्चितता की गंध व्याप्त थी, जो आने वाले संकट का संकेत दे रही थी।

हिरण्यकशिपु ने होलिका से कहा, "बहन, आज तुम्हें अपनी शक्ति का प्रदर्शन करना होगा। इस दुष्ट प्रह्लाद को अग्नि में जलाकर राख कर दो, ताकि यह विष्णु का नाम लेना भूल जाए! यह राज्य मेरा है, और यहाँ केवल मेरी आज्ञा चलेगी।" होलिका ने गर्व से उत्तर दिया, "चिंता मत करो, भैया। अग्नि मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकती। यह प्रह्लाद आज भस्म हो जाएगा।" प्रह्लाद, शांत और स्थिर, अपने नारायण का जाप कर रहा था।

अग्नि में प्रह्लाद की रक्षा

होलिका प्रह्लाद को गोद में लेकर धधकती हुई चिता पर बैठ गई। अग्नि प्रचंड रूप से जल रही थी, लपटें आकाश को चाट रही थीं। होलिका निश्चिंत थी कि अग्नि उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकती, क्योंकि उसे अग्नि से सुरक्षा का वरदान प्राप्त था। लेकिन, जैसे ही अग्नि अपनी चरम सीमा पर पहुँची, एक अद्भुत घटना घटी। होलिका का वरदान निष्फल हो गया, और वह स्वयं ही अग्नि में जलने लगी, जबकि प्रह्लाद पूर्णतया सुरक्षित रहा।

विष्णु भगवान की कृपा से, एक शीतल पवन चली। अग्नि की लपटें प्रह्लाद को स्पर्श भी नहीं कर पाईं, बल्कि उसे चारों ओर से घेर कर एक सुरक्षा कवच बना दिया। होलिका के वस्त्र जल गए, और वह चीखती चिल्लाती हुई भस्म हो गई। प्रह्लाद, अपने आराध्य विष्णु का नाम जपता हुआ, अग्नि में मुस्कुराता रहा, मानो वह किसी शीतल स्थान पर बैठा हो। यह दृश्य देखकर प्रजा आश्चर्यचकित रह गई और विष्णु भगवान की जय जयकार करने लगी।

भक्ति की विजय

होलिका का भस्म होना बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक था। यह घटना दिखाती है कि जो भगवान पर विश्वास रखते हैं, उन्हें किसी भी प्रकार का भय नहीं होता। हिरण्यकशिपु क्रोध और निराशा से भर गया, क्योंकि उसकी सारी योजनाएँ विफल हो चुकी थीं। अब वह समझ नहीं पा रहा था कि प्रह्लाद की भक्ति को कैसे रोका जाए। अगली बार, वह स्वयं प्रह्लाद से विष्णु के बारे में प्रश्न करने का निर्णय लेता है।

अध्याय 4 का सार: इस अध्याय में हमने देखा कि होलिका, अपने अग्नि प्रतिरोधी वरदान के बावजूद, प्रह्लाद की अटूट विष्णु भक्ति के कारण अग्नि में भस्म हो गई। यह घटना भक्ति की शक्ति और ईश्वर की कृपा का प्रमाण है, जो अपने भक्तों की रक्षा करते हैं।

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आज का पंचांग 30 जुलाई 2026

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