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भस्मासुर वध कथा – अध्याय 2: भस्मासुर का आतंक प्रारम्भ

Tilak Kathayein12 Apr 2026130 views📖 1 min read
भस्मासुर वध कथा
भस्मासुर वध कथा का अध्याय 2 — भस्मासुर का आतंक प्रारम्भ। वरदान पाकर भस्मासुर तीनों लोकों में आतंक मचाता है और माता पार्वती को पाने की इच्छा करता है।

भस्मासुर का आतंक प्रारम्भ

पिछले अध्याय में हमने भस्मासुर की उत्पत्ति और भगवान शिव से मिले अविनाशी वरदान के बारे में जाना। वरदान प्राप्त करने के पश्चात, भस्मासुर का मन अहंकार से भर गया और उसमें देवताओं को भी पराजित करने की लालसा जाग उठी। उसे अपनी शक्ति का मद चढ़ गया और उसने निर्दोष प्राणियों पर अत्याचार करना शुरू कर दिया।

स्वर्ग पर आक्रमण

भस्मासुर की शक्ति का आतंक इतना बढ़ गया कि उसने स्वर्ग लोक पर आक्रमण करने का निश्चय किया। अपनी विशाल सेना के साथ, वह स्वर्ग के द्वार पर पहुँचा। स्वर्ग के नंदन वन में हाहाकार मच गया। अप्सराएँ डर के मारे छिप गईं, और देवदूत सहायता के लिए पुकारने लगे। इंद्र, जो देवताओं के राजा हैं, भस्मासुर की शक्ति को देखकर चिंतित हो उठे। उन्होंने तत्काल अपनी सेना को युद्ध के लिए तैयार होने का आदेश दिया, लेकिन उनके मन में एक अज्ञात भय समाया हुआ था।

"यह कैसा दैत्य है जिसके पास इतनी अपार शक्ति है?" इंद्र ने अपने सेनापति से पूछा। "क्या हम इसका सामना कर पाएंगे? भगवान शिव ने इसे यह वरदान क्यों दिया?" सेनापति ने उत्तर दिया, "महाराज, हम देवताओं की शक्ति से उसे रोकने का प्रयास करेंगे। लेकिन यदि वह वरदान सत्य है, तो हमें कोई और उपाय खोजना होगा।"

देवताओं में भय

भस्मासुर ने स्वर्ग में प्रवेश किया और देवताओं पर आक्रमण कर दिया। उसकी भयानक शक्ति के सामने देवता टिक नहीं पाए। भस्मासुर जिस पर भी हाथ रखता, वह भस्म हो जाता। स्वर्ग लोक में त्राहि-त्राहि मच गई। देवता अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। इंद्र भी देवताओं को बचाने का प्रयास करते हुए पीछे हट गए। देवताओं को समझ में आ गया कि वे अकेले भस्मासुर का सामना नहीं कर सकते। उनकी एकमात्र आशा भगवान विष्णु थे, जो संसार के रक्षक हैं।

देवताओं ने मिलकर भगवान विष्णु से प्रार्थना की, "हे भगवान, हमारी रक्षा करो! भस्मासुर के आतंक से हमें बचाओ। भगवान शिव ने उसे ऐसा वरदान दिया है कि वह जिस पर हाथ रखेगा, वह भस्म हो जाएगा। अब हमें आपकी शरण है।" भगवान विष्णु ने देवताओं की प्रार्थना सुनी और उन्हें आश्वासन दिया कि वे उनकी सहायता करेंगे। उन्होंने कहा, "भस्मासुर का अंत अवश्य होगा। तुम सब धैर्य रखो।"

पार्वती को पाने का प्रयास

स्वर्ग पर विजय प्राप्त करने के बाद, भस्मासुर का मद और बढ़ गया। उसने अपने मंत्रियों से कहा, "अब मुझे और कुछ नहीं चाहिए। मुझे केवल पार्वती चाहिए। मैंने सुना है कि वह सबसे सुंदर देवी हैं। मैं उनसे विवाह करना चाहता हूँ।" उसके मंत्री जानते थे कि पार्वती भगवान शिव की पत्नी हैं, लेकिन वे भस्मासुर के क्रोध से डरते थे। उन्होंने उसे पार्वती को पाने के लिए उकसाया। भस्मासुर पार्वती को पाने के लिए कैलाश पर्वत की ओर चल पड़ा, जिससे आगे एक भयंकर संकट आने वाला था। अब देखना यह है कि भगवान विष्णु देवताओं को कैसे बचाते हैं और भस्मासुर का अंत किस प्रकार होता है। अगले अध्याय में हम जानेंगे कि किस प्रकार देवतागण भगवान विष्णु से सहायता की याचना करते हैं और भगवान विष्णु क्या योजना बनाते हैं।

अध्याय 2 का सार: इस अध्याय में हमने देखा कि भस्मासुर अपने वरदान के अहंकार में चूर होकर स्वर्ग पर आक्रमण करता है और देवताओं को भयभीत कर देता है। देवताओं के शरण मांगने पर भगवान विष्णु उन्हें आश्वासन देते हैं। भस्मासुर पार्वती को भी पाने की इच्छा रखता है, जिससे स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। इस अध्याय से हमें यह सीख मिलती है कि अहंकार विनाश का कारण बनता है और भगवान की शरण में ही सच्चा सुख है।

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आज का पंचांग 29 अगस्त 2026

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