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भस्मासुर वध कथा – अध्याय 3: विष्णु से सहायता की याचना

Tilak Kathayein12 Apr 2026143 views📖 1 min read
भस्मासुर वध कथा
भस्मासुर वध कथा का अध्याय 3 — विष्णु से सहायता की याचना। देवता और ऋषि भगवान विष्णु से भस्मासुर के आतंक से मुक्ति पाने के लिए प्रार्थना करते हैं।

विष्णु से सहायता की याचना

भस्मासुर के अत्याचारों से त्रस्त होकर, स्वर्ग लोक में हाहाकार मच गया था। देवगण अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर छिप रहे थे। भस्मासुर के भय से तीनों लोकों में अंधेरा छा गया था। स्वर्ग के राजा इंद्र भी सिंहासन छोड़कर भागने को विवश हो गए थे। अब केवल एक ही आशा बची थी: भगवान विष्णु।

देवताओं का बैकुंठ में आगमन

देवगण भयभीत होकर भगवान विष्णु के निवास, बैकुंठ धाम पहुंचे। बैकुंठ की स्वर्णिम आभा भी उस समय देवताओं के मन को शांति नहीं दे पा रही थी। उनके चेहरे पर चिंता की गहरी लकीरें उभर आई थीं। वे लंबी यात्रा कर के आए थे, पर उनके मन में विश्राम का कोई विचार नहीं था, वे बस नारायण के दर्शन कर अपनी विपदा सुनाने को व्याकुल थे। उनके हृदय भय से कांप रहे थे, और उनकी आँखों में केवल एक ही प्रश्न था: "क्या नारायण हमारी रक्षा करेंगे?"

इंद्र ने हाथ जोड़कर, नम्रता से कहा, "हे नारायण, हे पालनहार! भस्मासुर ने अपनी तपस्या से भगवान शिव को प्रसन्न करके ऐसा वरदान प्राप्त कर लिया है कि वह जिसे चाहे, अपनी उंगली से छूकर भस्म कर सकता है। अब वह तीनों लोकों पर राज करना चाहता है और सभी देवताओं को नष्ट करने पर तुला हुआ है। कृपया हमारी रक्षा करें!"

विष्णु द्वारा उपाय का वर्णन

भगवान विष्णु ने देवताओं की बात ध्यान से सुनी। उनका शांत और गंभीर मुखमंडल देवताओं को कुछ ढांढस बंधा रहा था। उन्होंने देवताओं को आश्वासन दिया कि वे उनकी रक्षा अवश्य करेंगे। फिर वे मंद-मंद मुस्कुराए, और बोले, “हे देवगण, चिंता मत करो। भस्मासुर का वरदान अवश्य ही शक्तिशाली है, परंतु सृष्टि में कोई भी शक्ति अविनाशी नहीं है। उसका अंत भी निश्चित है। मैं जानता हूँ कि उसे कैसे पराजित किया जा सकता है।”

विष्णु ने आगे कहा, “भस्मासुर को छल से ही मारा जा सकता है, क्योंकि वह सीधे युद्ध में पराजित नहीं किया जा सकता। मैं एक सुंदर अप्सरा का रूप धारण करूंगा, जो उसे मोहित कर लेगी। फिर मैं उसे ऐसा नृत्य करने के लिए कहूंगा जिसमें वह खुद को ही भस्म कर डाले।” उनके वचनों से देवताओं में आशा की किरण जाग उठी। उन्हें विश्वास हो गया कि अब उनकी रक्षा अवश्य होगी। देवताओं को लगा, शिव की कृपा से यदि भस्मासुर ने शक्ति पाई, तो विष्णु की माया से वह शक्ति हारेगा।

मोहिनी रूप धारण करने का निश्चय

भगवान विष्णु ने अपनी माया से मोहिनी का रूप धारण करने का निश्चय किया। मोहिनी इतनी सुंदर थी कि देवता भी मोहित हो गए। उसका रूप लावण्य से परिपूर्ण था, और उसकी चाल मनमोहक थी। मोहिनी के रूप में विष्णु ने देवताओं को आश्वस्त किया कि वे भस्मासुर को अवश्य ही अपने जाल में फंसा लेंगे और उसका वध कर देंगे। मोहिनी के सौंदर्य और बुद्धि पर देवताओं को पूर्ण विश्वास था।

मोहिनी रूप धारण करने के बाद, विष्णु धरती की ओर प्रस्थान करने के लिए तैयार हो गए। उनके मन में एक ही लक्ष्य था - भस्मासुर का वध करके तीनों लोकों को उसके आतंक से मुक्त कराना। अब आगे की कहानी मोहिनी के नृत्य और छल की है, जिसमें भस्मासुर अपने ही वरदान का शिकार बनेगा।

अध्याय 3 का सार: देवताओं ने भस्मासुर के आतंक से त्रस्त होकर भगवान विष्णु से सहायता की याचना की। विष्णु ने मोहिनी रूप धारण करके भस्मासुर का वध करने का उपाय बताया। इस अध्याय में यह संदेश है कि जब शक्ति का दुरुपयोग होता है, तो दैवीय शक्ति उसका निवारण अवश्य करती है।

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आज का पंचांग 29 अगस्त 2026

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