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तृतीया तिथि
तृतीया तिथि हिंदू पंचांग की एक चंद्र तिथि है। नीचे शुक्ल और कृष्ण दोनों पक्ष की तृतीया तिथि का स्वामी देव, व्रत, धार्मिक महत्व और इस दिन क्या करें–क्या न करें दिया गया है।
शुक्ल पक्ष
स्वामी देव
माँ गौरी (पार्वती)
व्रत / त्योहार
हरितालिका तीज, गणगौर, सौभाग्य तृतीया
महत्व
तृतीया माँ गौरी की प्रिय तिथि है। सुहागिन महिलाओं के लिए यह विशेष पुण्यदायी है और सौभाग्य की रक्षा करती है।
क्या करें
माँ पार्वती की पूजा, सुहागिनें व्रत रखें, हरे वस्त्र पहनें
क्या न करें
मांसाहार, व्यसन
पूजा मंत्र
ॐ हीं गौरीशंकराभ्यां नमः
कृष्ण पक्ष
स्वामी देव
माँ गौरी
व्रत / त्योहार
अखा तीज (वैशाख शुक्ल, विशेष)
महत्व
कृष्ण तृतीया सौभाग्य की तिथि है। माँ गौरी की उपासना से घर में सुख-शांति और सौभाग्य बना रहता है।
क्या करें
पूजा-अर्चना, दान, माँ पार्वती स्तुति
क्या न करें
झगड़ा, कठोर वाणी
पूजा मंत्र
ॐ उमायै नमः
⚠️ यह जानकारी पारंपरिक पंचांग गणना पर आधारित है और सामान्य मार्गदर्शन के लिए है। विवाह, गृह प्रवेश जैसे महत्वपूर्ण कार्यों के लिए योग्य पंडित या आचार्य से मुहूर्त की पुष्टि अवश्य करें। शहर के अनुसार सूर्योदय-सूर्यास्त बदलने से समय थोड़ा आगे-पीछे हो सकता है।