आज का नक्षत्र

1 सितम्बर 2026
अश्विनी
स्वामी देव: अश्विनी कुमार

नक्षत्र क्या है?

नक्षत्र आकाश में चंद्रमा के मार्ग (क्रांतिवृत्त) के 27 बराबर भाग हैं। हर नक्षत्र लगभग 13°20′ का होता है और चंद्रमा उसमें करीब एक दिन रहता है। जिस नक्षत्र में चंद्रमा स्थित हो, वही उस दिन का नक्षत्र कहलाता है।

आज का नक्षत्र कैसे तय होता है?

सूर्योदय के समय चंद्रमा की सायन-निरयन (सिडरियल) स्थिति देखकर आज का नक्षत्र निकाला जाता है। चूँकि चंद्रमा गतिशील है, नक्षत्र दिन में बदल भी सकता है — तब पंचांग में दोनों नक्षत्र और बदलने का समय दिया जाता है।

नक्षत्र का उपयोग

नक्षत्र मुहूर्त निर्धारण, नामकरण संस्कार में नाम का पहला अक्षर, यात्रा, विवाह और मांगलिक कार्यों में देखा जाता है। हर नक्षत्र का अपना स्वामी ग्रह, देवता और गुण-स्वभाव होता है।

नक्षत्र के चार चरण

प्रत्येक नक्षत्र चार चरणों (पादों) में बँटा होता है, हर चरण लगभग 3°20′ का। चरण के अनुसार ही नामकरण में नाम का अक्षर तय होता है।

27 नक्षत्र और उनके स्वामी देव

#नक्षत्रस्वामी देव
1अश्विनीअश्विनी कुमार
2भरणीयम
3कृत्तिकाअग्नि
4रोहिणीब्रह्मा
5मृगशिराचंद्रमा
6आर्द्रारुद्र
7पुनर्वसुअदिति
8पुष्यबृहस्पति
9आश्लेषासर्प
10मघापितर
11पूर्वा फाल्गुनीभग
12उत्तरा फाल्गुनीअर्यमा
13हस्तसावित्र
14चित्रात्वष्टा
15स्वातीवायु
16विशाखाइंद्र-अग्नि
17अनुराधामित्र
18ज्येष्ठाइंद्र
19मूलनिर्ऋति
20पूर्वाषाढ़ाजल
21उत्तराषाढ़ाविश्वेदेव
22श्रवणविष्णु
23धनिष्ठाअष्टवसु
24शतभिषावरुण
25पूर्वा भाद्रपदअजैकपाद
26उत्तरा भाद्रपदअहिर्बुध्न्य
27रेवतीपूषा

⚠️ यह जानकारी पारंपरिक पंचांग गणना पर आधारित है और सामान्य मार्गदर्शन के लिए है। विवाह, गृह प्रवेश जैसे महत्वपूर्ण कार्यों के लिए योग्य पंडित या आचार्य से मुहूर्त की पुष्टि अवश्य करें। शहर के अनुसार सूर्योदय-सूर्यास्त बदलने से समय थोड़ा आगे-पीछे हो सकता है।