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द्वितीया तिथि
द्वितीया तिथि हिंदू पंचांग की एक चंद्र तिथि है। नीचे शुक्ल और कृष्ण दोनों पक्ष की द्वितीया तिथि का स्वामी देव, व्रत, धार्मिक महत्व और इस दिन क्या करें–क्या न करें दिया गया है।
शुक्ल पक्ष
स्वामी देव
ब्रह्माजी
व्रत / त्योहार
भाई दूज (कार्तिक शुक्ल द्वितीया)
महत्व
द्वितीया तिथि सृष्टि के निर्माता ब्रह्माजी को समर्पित है। इस दिन नए कार्य का शुभारंभ और शिक्षा के कार्य शुभ होते हैं।
क्या करें
नए व्यापार का आरंभ, शिक्षा प्रारंभ, दान-पुण्य
क्या न करें
झूठ बोलना, कलह
पूजा मंत्र
ॐ ब्रह्मणे नमः
कृष्ण पक्ष
स्वामी देव
ब्रह्माजी
व्रत / त्योहार
भाई दूज (कार्तिक)
महत्व
कृष्ण द्वितीया शांत और स्थिर कार्यों के लिए उपयुक्त है। पारिवारिक मेल-मिलाप और ध्यान के लिए यह तिथि शुभ है।
क्या करें
पारिवारिक कार्य, ध्यान, पूजा-अर्चना
क्या न करें
विवाद, झूठ
पूजा मंत्र
ॐ ब्रह्मणे नमः
⚠️ यह जानकारी पारंपरिक पंचांग गणना पर आधारित है और सामान्य मार्गदर्शन के लिए है। विवाह, गृह प्रवेश जैसे महत्वपूर्ण कार्यों के लिए योग्य पंडित या आचार्य से मुहूर्त की पुष्टि अवश्य करें। शहर के अनुसार सूर्योदय-सूर्यास्त बदलने से समय थोड़ा आगे-पीछे हो सकता है।