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षष्ठी तिथि

षष्ठी तिथि हिंदू पंचांग की एक चंद्र तिथि है। नीचे शुक्ल और कृष्ण दोनों पक्ष की षष्ठी तिथि का स्वामी देव, व्रत, धार्मिक महत्व और इस दिन क्या करें–क्या न करें दिया गया है।

शुक्ल पक्ष

स्वामी देव
स्वामी कार्तिकेय
व्रत / त्योहार
स्कंद षष्ठी, छठ पूजा, सूर्य षष्ठी
महत्व
षष्ठी तिथि कार्तिकेय और षष्ठी माता को समर्पित है। माताएं संतान की कुशलता के लिए इस दिन विशेष व्रत रखती हैं।
क्या करें
कार्तिकेय पूजा, सूर्य अर्घ्य, संतान के लिए प्रार्थना
क्या न करें
मांसाहार, बुरी संगत
पूजा मंत्र
ॐ षण्मुखाय नमः

कृष्ण पक्ष

स्वामी देव
स्वामी कार्तिकेय
व्रत / त्योहार
षष्ठी व्रत
महत्व
कृष्ण षष्ठी माँ षष्ठी देवी की तिथि है। संतान की कुशलता और दीर्घायु के लिए माताएं व्रत रखती हैं।
क्या करें
संतान पूजा, देवी पूजा, सूर्य अर्घ्य
क्या न करें
तामसिक भोजन
पूजा मंत्र
ॐ षण्मुखाय नमः

⚠️ यह जानकारी पारंपरिक पंचांग गणना पर आधारित है और सामान्य मार्गदर्शन के लिए है। विवाह, गृह प्रवेश जैसे महत्वपूर्ण कार्यों के लिए योग्य पंडित या आचार्य से मुहूर्त की पुष्टि अवश्य करें। शहर के अनुसार सूर्योदय-सूर्यास्त बदलने से समय थोड़ा आगे-पीछे हो सकता है।