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नवमी तिथि
नवमी तिथि हिंदू पंचांग की एक चंद्र तिथि है। नीचे शुक्ल और कृष्ण दोनों पक्ष की नवमी तिथि का स्वामी देव, व्रत, धार्मिक महत्व और इस दिन क्या करें–क्या न करें दिया गया है।
शुक्ल पक्ष
स्वामी देव
माँ सिद्धिदात्री / श्रीराम
व्रत / त्योहार
राम नवमी, दुर्गा नवमी, महानवमी
महत्व
नवमी नवरात्र की सर्वोच्च तिथि है। यह सिद्धि और मोक्ष प्रदान करने वाली तिथि है। कन्या भोज इस तिथि का विशेष महत्व है।
क्या करें
माँ दुर्गा की पूजा, कन्या भोज, हवन, रामायण पाठ
क्या न करें
तामसिक भोजन, क्रोध, कठोर वाणी
पूजा मंत्र
ॐ ह्रीं क्लीं सिद्धये नमः
कृष्ण पक्ष
स्वामी देव
माँ दुर्गा
व्रत / त्योहार
नवमी श्राद्ध, पितृ तर्पण
महत्व
कृष्ण नवमी पितृ पक्ष में विशेष श्राद्ध तिथि है। पूर्वजों का तर्पण करने से परिवार में सुख-शांति आती है।
क्या करें
पितृ श्राद्ध, ब्राह्मण भोजन, दान
क्या न करें
शोक में डूबे रहना
पूजा मंत्र
ॐ पितृभ्यः स्वधायिभ्यः स्वधा नमः
⚠️ यह जानकारी पारंपरिक पंचांग गणना पर आधारित है और सामान्य मार्गदर्शन के लिए है। विवाह, गृह प्रवेश जैसे महत्वपूर्ण कार्यों के लिए योग्य पंडित या आचार्य से मुहूर्त की पुष्टि अवश्य करें। शहर के अनुसार सूर्योदय-सूर्यास्त बदलने से समय थोड़ा आगे-पीछे हो सकता है।