ग्रंथ

सुंदरकांड – अध्याय 2: लंका में प्रवेश

Tilak Kathayein13 Apr 2026170 views📖 1 min read
सुंदरकांड
सुंदरकांड का अध्याय 2 — लंका में प्रवेश। हनुमान लंका पहुंचते हैं, लंकिनी से मुठभेड़ करते हैं, और शहर में प्रवेश करते हैं।

लंका में प्रवेश

पिछले अध्याय में हनुमान ने महेंद्र पर्वत से लंका तक की अद्भुत छलांग लगाई। सागर के ऊपर उड़ते हुए, उन्होंने देवताओं और राक्षसों द्वारा भेजी गई परीक्षाओं को पार किया। माता सीता की खोज के लिए संकल्पित, पवनपुत्र अब लंका नगरी के द्वार पर खड़े थे, जहाँ उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना था।

लंकापुरी के द्वार पर

लंकापुरी सोने की बनी थी, जो सूर्य की किरणों में जगमगा रही थी। ऊँची दीवारें, मजबूत किले, और असंख्य पहरेदार नगरी को सुरक्षित रखने के लिए तैनात थे। हनुमान ने ध्यान से देखा, चारों ओर राक्षसों की चहल-पहल थी। भय और संदेह का वातावरण छाया हुआ था, लेकिन हनुमान का हृदय प्रभु राम के प्रति प्रेम और भक्ति से भरा था। उन्हें अपने कार्य की गंभीरता का एहसास था और वह किसी भी बाधा को पार करने के लिए दृढ़ थे।

हनुमान ने सोचा, "यह नगरी अद्भुत और डरावनी दोनों है। मुझे माता सीता तक पहुंचने का रास्ता खोजना होगा, भले ही इसमें कितना भी खतरा क्यों न हो। प्रभु राम का नाम लेकर मैं हर मुश्किल को आसान कर दूंगा।"

लंकिनी से मुठभेड़

जैसे ही हनुमान ने लंका में प्रवेश करने का प्रयास किया, लंकिनी नामक एक राक्षसी ने उन्हें रोक लिया। वह लंकापुरी की द्वारपाल थी और उसे नगरी की रक्षा करने का आदेश था। उसका शरीर विशाल और शक्तिशाली था, और उसकी आंखें क्रोध से भरी हुई थीं। लंकिनी ने हनुमान को चुनौती दी और पूछा कि वह कौन है और कहां जा रहा है। हनुमान ने विनम्रता से उत्तर दिया कि वह एक वानर दूत है और माता सीता की खोज में आया है। लंकिनी को हनुमान की बात पर विश्वास नहीं हुआ और उसने उस पर हमला कर दिया।

दोनों के बीच भीषण युद्ध हुआ। हनुमान ने अपनी शक्ति और बुद्धि का उपयोग करते हुए लंकिनी को पराजित कर दिया। हनुमान के प्रहार से लंकिनी धरती पर गिर पड़ी। तब हनुमान ने उसे राम नाम का स्मरण दिलाया और उसे क्षमा कर दिया। लंकिनी ने अपनी हार स्वीकार की और हनुमान को नगरी में प्रवेश करने की अनुमति दे दी। हनुमान को पता था यह राम जी की कृपा है जिससे लंकिनी शांत हो गई और रास्ता दिया।

सूक्ष्म रूप में प्रवेश

लंका में प्रवेश करने के बाद, हनुमान ने महसूस किया कि विशाल रूप में नगरी में घूमना मुश्किल होगा। इसलिए, उन्होंने अपनी योगमाया से अपने शरीर को सूक्ष्म रूप में बदल लिया। एक छोटे से वानर के रूप में, हनुमान ने नगरी में प्रवेश किया और माता सीता की खोज में निकल पड़े। उन्होंने ध्यान से हर गली और हर घर में देखा, लेकिन उन्हें माता सीता का कोई पता नहीं चला। नगरी में राक्षसों की विचित्र वेशभूषा और भयानक व्यवहार देखकर हनुमान आश्चर्यचकित थे, परन्तु वे अपने लक्ष्य से नहीं भटके।

अब हनुमान को माता सीता को खोजने के लिए रावण के महल और अशोक वाटिका में प्रवेश करना होगा। उनका सूक्ष्म रूप उन्हें दुश्मनों से बचाने में सहायता करेगा और माता सीता तक पहुंचने में मदद करेगा। हनुमान को विश्वास था कि प्रभु राम की कृपा से वे अवश्य ही माता सीता को ढूंढ निकालेंगे और उन्हें राम का संदेश देंगे।

अध्याय 2 का सार: इस अध्याय में हनुमान लंका में प्रवेश करते हैं, लंकिनी से युद्ध करते हैं, और सूक्ष्म रूप धारण कर माता सीता की खोज प्रारंभ करते हैं। यह अध्याय हमें सिखाता है कि भक्ति और दृढ़ संकल्प से हर बाधा को पार किया जा सकता है, और प्रभु राम की कृपा से हर कार्य सफल होता है।

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आज का पंचांग 29 अगस्त 2026

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