ग्रंथ

सुंदरकांड – अध्याय 1: हनुमान की विशाल छलांग

Tilak Kathayein13 Apr 2026102 views📖 1 min read
सुंदरकांड
सुंदरकांड का अध्याय 1 — हनुमान की विशाल छलांग। जामवंत के प्रोत्साहन से हनुमान लंका की ओर विशाल छलांग लगाते हैं।

हनुमान की विशाल छलांग

राम और रावण की सेनाएँ आमने-सामने खड़ी थीं, मानो प्रलय आने को हो। लंका पर चढ़ाई करने के लिए समुद्र को पार करना एक असंभव कार्य लग रहा था। चिंता और निराशा का वातावरण था, हर वानर योद्धा अपनी शक्ति पर संदेह कर रहा था। किसकी भुजाओं में इतनी शक्ति है जो इस विशाल सागर को लाँघ सके?

जामवंत का हनुमान को कर्तव्यबोध कराना

सागर तट पर, वानर सेना निराशा में डूबी हुई थी। जामवंत, जो बुद्धि और अनुभव में सबसे श्रेष्ठ थे, ने सबकी उदासी को भाँप लिया। उन्होंने धीरे से हनुमान की ओर देखा। हनुमान, जो गुमसुम से एक किनारे बैठे थे, अपनी अद्भुत क्षमता से बेखबर थे। उनकी आँखें शून्य में खोई हुई थीं, मानो किसी गहन चिंतन में डूबे हों। जामवंत का हृदय हनुमान के लिए स्नेह और चिंता से भर गया। उन्हें पता था कि केवल हनुमान ही इस असंभव कार्य को संभव कर सकते हैं।

जामवंत ने कोमल स्वर में कहा, "हनुमान! तुम कौन हो, यह तुम भूल गए हो। तुम पवनपुत्र हो, अंजनी के लाल हो। तुम्हारे भीतर असीम शक्ति है, जिसका तुम्हें अनुमान भी नहीं। तुम्हें याद है, बचपन में सूर्य को फल समझकर तुम उसे खाने के लिए आकाश में उड़ चले थे? तुममें वह शक्ति है जो इस समुद्र को लांघ सकती है और राम के कार्य को सिद्ध कर सकती है।" जामवंत के शब्द हनुमान के हृदय में गूंज उठे।

हनुमान का महेन्द्र पर्वत पर आरोहण

जामवंत के वचनों ने हनुमान में नई ऊर्जा का संचार कर दिया। उन्हें अपनी शक्ति, अपने कर्तव्य का स्मरण हो आया। उनकी आँखों में चमक आ गई। उन्होंने गर्जना करते हुए महेन्द्र पर्वत की ओर रुख किया। पर्वत मानो हनुमान का स्वागत करने के लिए अपनी ऊँची चोटियों को उठाए खड़ा था। हनुमान ने एक गहरी साँस ली और 'जय श्री राम' का नारा लगाते हुए पर्वत पर छलांग लगा दी। उनके पदचिन्हों से पर्वत काँप उठा।

जैसे ही हनुमान ने पर्वत पर अपना भार रखा, देवताओं ने पुष्प वर्षा की। सिद्ध, ऋषि और मुनि हनुमान की स्तुति करने लगे। पवन देव प्रसन्न हो गए, क्योंकि उनका पुत्र एक महान कार्य करने जा रहा था। हनुमान की शक्ति और भक्ति से सारा वातावरण राममय हो गया। हनुमान जानता था कि राम का नाम ही उसका सबसे बड़ा बल है और उसी के सहारे वो सब कुछ कर सकता है।

सुरसा द्वारा परीक्षा

हनुमान ने महेन्द्र पर्वत से विशाल छलांग लगाई। आकाश में उड़ते हुए, सुरसा नामक नागमाता ने उनकी परीक्षा लेने का निश्चय किया। उसने विशालकाय मुख फैलाकर हनुमान को रोकने का प्रयास किया। सुरसा का मुख इतना बड़ा था कि वह पूरे आसमान को निगलने की क्षमता रखता था। उसने हनुमान से कहा, "यह देवताओं का आदेश है कि मैं तुम सबको निगल जाऊँ। इसलिए मेरे मुख में प्रवेश करो।"

हनुमान ने बुद्धि और विनम्रता से काम लिया। उन्होंने कहा, "माता, मैं राम का दूत हूँ और उनके कार्य के लिए जा रहा हूँ। मुझे जाने दीजिए।" सुरसा नहीं मानी। तब हनुमान ने अपने शरीर को बढ़ाना शुरू कर दिया। सुरसा ने भी अपने मुख को और फैलाया। जब सुरसा का मुख बहुत बड़ा हो गया, तब हनुमान तुरंत बहुत छोटे हो गए और उसके मुख में प्रवेश करके तुरंत बाहर निकल आए। सुरसा समझ गई कि हनुमान वास्तव में शक्तिशाली हैं और उन्हें आशीर्वाद दिया कि उनका कार्य सिद्ध हो। इससे हनुमान की बुद्धि, शक्ति और भक्ति तीनों का परिचय मिलता है। वह राम के सच्चे सेवक थे और हर बाधा को पार करने में सक्षम थे।

अध्याय 1 का सार: इस अध्याय में हमने देखा कि कैसे जामवंत ने हनुमान को उनकी सोई हुई शक्ति का स्मरण कराया और उन्हें रावण के लंका तक छलांग लगाने के लिए प्रेरित किया। सुरसा की परीक्षा ने हनुमान की बुद्धिमत्ता और क्षमता को उजागर किया, यह दर्शाते हुए कि भक्ति और बुद्धि से हर बाधा को पार किया जा सकता है।

शेयर करें:

संबंधित लेख

कालाष्टमी व्रत – अध्याय 5: भक्ति का फल और सीख
कथाएँ

कालाष्टमी व्रत – अध्याय 5: भक्ति का फल और सीख

कालाष्टमी व्रत का अध्याय 5 — भक्ति का फल और सीख। यह अंतिम अध्याय बताता है कि कालाष्टमी व्रत रखने से प्राप्त होने वाले परिणाम और इससे मिली सीख क्या है।

08 Jun 2026112
कालाष्टमी व्रत – अध्याय 4: दिव्य हस्तक्षेप और आशीर्वाद
कथाएँ

कालाष्टमी व्रत – अध्याय 4: दिव्य हस्तक्षेप और आशीर्वाद

कालाष्टमी व्रत का अध्याय 4 — दिव्य हस्तक्षेप और आशीर्वाद। अध्याय चार में, भगवान भैरव भक्त की अटूट भक्ति से प्रसन्न होते हैं और उसे अपना आशीर्वाद देते हैं।

08 Jun 202680
कालाष्टमी व्रत – अध्याय 3: परीक्षा और कष्टों का सामना
कथाएँ

कालाष्टमी व्रत – अध्याय 3: परीक्षा और कष्टों का सामना

कालाष्टमी व्रत का अध्याय 3 — परीक्षा और कष्टों का सामना। इस अध्याय में, भक्त को भगवान की कृपा प्राप्त करने से पहले कई बाधाओं और परीक्षाओं का सामना करना पड़ता है।

08 Jun 202694
कालाष्टमी व्रत – अध्याय 2: भक्त की विनती और भक्ति
कथाएँ

कालाष्टमी व्रत – अध्याय 2: भक्त की विनती और भक्ति

कालाष्टमी व्रत का अध्याय 2 — भक्त की विनती और भक्ति। इस अध्याय में, एक भक्त की सच्ची भक्ति और भगवान भैरव से उसकी पुकार का वर्णन किया गया है।

08 Jun 202687
सांरगपुर हनुमान
मंदिर

Salangpur Hanuman Mandir | सांरगपुर हनुमान मंदिर

सांरगपुर हनुमान मंदिर एक ऐतिहासिक तीर्थस्थल है, जहाँ कष्टभंजन हनुमान भक्तों के दुःख दूर करते हैं; दर्शन समय सुबह 6 बजे से रात 9 बजे तक है, और यहाँ सड़क मार्ग से आसानी से पहुँचा जा सकता है, जिसका विशेष महत्व है। यह मंदिर अपनी अद्भुत वास्तुकला और हनुमान जी की चमत्कारिक मूर्ति के लिए प्रसिद्ध है, जो भक

08 May 2026210