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रामायण – अध्याय 4: सीता का अपहरण

Tilak Kathayein13 Apr 2026153 views📖 1 min read
रामायण
रामायण का अध्याय 4 — सीता का अपहरण। रावण छल से सीता का अपहरण करता है, जिससे राम और लक्ष्मण सीता को खोजने के लिए व्याकुल हो जाते हैं।

सीता का अपहरण

वनवास के शांत जीवन में राम, लक्ष्मण और सीता पंचवटी में आनंदपूर्वक समय बिता रहे थे। प्रकृति की गोद में, उन्हें कुछ समय के लिए अयोध्या की राजसी ज़िंदगी और उसके दायित्वों से छुटकारा मिल गया था। लेकिन नियति को शायद कुछ और ही मंज़ूर था, और शांति भंग होने वाली थी।

शूर्पणखा का अपमान

पंचवटी के शांत वातावरण को चीरती हुई एक कर्कश आवाज़ गूंजी। वह राक्षसी शूर्पणखा थी, रावण की बहन, जिसकी क्रूरता और अहंकार उसकी विशालकाय देह से भी बढ़कर थे। उसकी आँखें लाल थीं, मानो क्रोध की ज्वाला से धधक रही हों, और उसकी वाणी विषैली तीर की तरह चुभने वाली थी। उसने राम को देखा, उनके तेजस्वी मुखमंडल और शांत स्वभाव ने उसे मोहित कर लिया, लेकिन उसका आकर्षण जल्द ही वासना में बदल गया।

“हे तपस्वी! तुम कौन हो और इस वन में क्या कर रहे हो? मैं शूर्पणखा हूँ, राक्षसों के राजा रावण की बहन। तुम मेरे योग्य हो, आओ मुझसे विवाह करो," शूर्पणखा ने अहंकार से कहा। राम ने मुस्कुराते हुए कहा, "देवी, मैं विवाहित हूँ, और यह मेरी पत्नी सीता हैं। परन्तु तुम मेरे छोटे भाई लक्ष्मण के पास जाओ, वे अविवाहित हैं।" लक्ष्मण ने शूर्पणखा की मंशा को भाँपते हुए उसे तिरस्कारपूर्वक ठुकरा दिया, और क्रोधित होकर उसने सीता पर आक्रमण कर दिया। अपने भक्तों की रक्षा के लिए तत्पर, लक्ष्मण ने शूर्पणखा की नाक और कान काट दिए, उसे अपमानित और क्रोधित कर दिया।

रावण द्वारा सीता का अपहरण

शूर्पणखा अपने अपमान का बदला लेने के लिए लंका पहुंची और अपने भाई रावण को राम और लक्ष्मण के पराक्रम तथा सीता के अद्भुत सौंदर्य का वर्णन किया। रावण, जो पहले से ही अपने अहंकार और शक्ति के मद में चूर था, सीता को पाने के लिए लालायित हो उठा। उसने मारीच নামক মায়াবী राक्षस की मदद ली, जिसने सुनहरे हिरण का रूप धारण कर सीता को मोहित कर लिया। सीता ने राम से उस हिरण को पकड़ने का आग्रह किया, और राम, अपनी पत्नी की इच्छा का सम्मान करते हुए, उसका पीछा करने निकल पड़े। लक्ष्मण को सीता की रक्षा के लिए छोड़कर गए।

जब राम हिरण का पीछा कर रहे थे, मारीच ने राम की आवाज़ में सहायता के लिए पुकारा। सीता व्याकुल हो उठीं और लक्ष्मण को राम की सहायता के लिए जाने के लिए कहा। लक्ष्मण, अपनी भाभी की सुरक्षा के प्रति कर्तव्यबद्ध थे, जाने से हिचकिचा रहे थे, लेकिन सीता के आंसुओं के आगे हार मान गए। जाते समय उन्होंने एक लक्ष्मण रेखा खींची और सीता को किसी भी परिस्थिति में उसे पार न करने की चेतावनी दी। जैसे ही लक्ष्मण चले गए, रावण, एक साधु के वेश में, सीता के सामने प्रकट हुआ और उनसे भिक्षा मांगी। अभिमानी सीता ने लक्ष्मण-रेखा पार की ओर रावण ने उनका अपहरण कर लिया।

जटायु का वध

सीता को हरण करके आकाश मार्ग से ले जाते समय, जटायु নামক शक्तिशाली गिद्धराज ने रावण को रोकने का प्रयास किया। उन्होंने रावण से युद्ध किया, लेकिन रावण के बल के आगे वे टिक न सके। रावण ने जटायु को बुरी तरह घायल कर दिया और उन्हें धरती पर गिरा दिया। राम और लक्ष्मण, हिरण का पीछा करके और सीता को ढूंढते हुए, जटायु के पास पहुंचे। जटायु ने राम को सीता के अपहरण की सूचना दी और रावण की दिशा बताई। अपने भक्त की रक्षा के लिए भगवान राम ने जटायु को अपने गोद में लिया और उन्हें मोक्ष प्रदान किया। रावण, सीता को लेकर लंका की ओर उड़ गया, जहाँ उन्हें अशोक वाटिका में बंदी बना लिया गया।

मैत्री और खोज

सीता के अपहरण के बाद, রাম और लक्ष्मण शोक और क्रोध से भर गए। वे सीता को ढूंढने के लिए व्याकुल थे। उनकी खोज उन्हें ऋष्यमूक पर्वत की ओर ले जाएगी, जहाँ उनकी मुलाकात हनुमान और सुग्रीव से होगी, जो सीता को ढूंढने में उनकी सहायता करेंगे। सीता के अपहरण ने राम के जीवन में एक नया अध्याय शुरू कर दिया था, जो उन्हें हनुमान जैसे भक्तों से मिलाएगा और रावण के विनाश की ओर ले जाएगा।

अध्याय 4 का सार: इस अध्याय में शूर्पणखा के अपमान और रावण द्वारा सीता के अपहरण की घटनाओं का वर्णन है। यह दिखाता है कि अहंकार और वासना विनाश का कारण बनते हैं, जबकि राम अपने भक्तों की रक्षा के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं। यह घटनाएँ राम और रावण के बीच युद्ध का कारण बनेंगी।

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आज का पंचांग 30 अगस्त 2026

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