रामायण – अध्याय 7: अयोध्या वापसी एवं शासन | Tilak Kathayein - Tilak Kathayein
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रामायण – अध्याय 7: अयोध्या वापसी एवं शासन

Tilak Kathayein13 Apr 202698 views📖 1 min read
रामायण
रामायण का अध्याय 7 — अयोध्या वापसी एवं शासन। राम, सीता और लक्ष्मण अयोध्या लौटते हैं जहाँ उनका भव्य स्वागत होता है और राम एक आदर्श राजा बनते हैं।

अयोध्या वापसी एवं शासन

लंका युद्ध की समाप्ति के पश्चात, रावण के अन्याय का अंत हो चुका था। माता सीता की अग्नि परीक्षा ने उनकी पवित्रता को सिद्ध कर दिया था। अब, चौदह वर्ष का वनवास भी समाप्त होने को था, और प्रभु राम का अयोध्या वापस लौटकर प्रजा को सुख और शांति प्रदान करने का समय आ गया था।

भरत मिलाप

चौदह वर्षों से, भरत अपने भाई राम की चरण पादुकाओं को सिंहासन पर रखकर एक तपस्वी का जीवन जी रहे थे। उनकी आँखें हर पल राम के आगमन की प्रतीक्षा में थीं। प्रतीक्षा की घड़ियाँ समाप्त हुईं जब हनुमान, राम का संदेश लेकर नंदीग्राम पहुंचे। भरत का ह्रदय आनंद से भर गया।

भरत दौड़ पड़े, हनुमान को गले लगाया और पूछा, "हनुमान, मेरे राम कहाँ हैं? क्या वे सकुशल हैं? माता सीता और लक्ष्मण का क्या हाल है? मेरे ह्रदय की पीड़ा अब और सहन नहीं होती।" हनुमान ने उत्तर दिया, "प्रभु राम, माता सीता और लक्ष्मण तीनों ही सकुशल हैं और शीघ्र ही आपके दर्शन करने अयोध्या पहुंचेंगे।" भरत की ख़ुशी का ठिकाना न रहा। उन्होंने तुरंत अयोध्या को राम के स्वागत के लिए सजाने का आदेश दिया।

राम राज्य का राज्याभिषेक

शुभ मुहूर्त में, राम, सीता और लक्ष्मण पुष्पक विमान से अयोध्या पहुंचे। अयोध्या नगरी दीपों से जगमगा रही थी, और हर घर में उत्सव का माहौल था। भरत ने बड़े सम्मान से राम का स्वागत किया और उन्हें सिंहासन पर बिठाया। वशिष्ठ मुनि ने वैदिक मंत्रों के उच्चारण के साथ राम का राज्याभिषेक किया। चारों दिशाओं से जय जय कार की ध्वनि गूंज उठी। देवतागण पुष्प वर्षा कर रहे थे।

राम ने सिंहासन पर विराजमान होते ही प्रजा को सुख, शांति और समृद्धि का वचन दिया। उन्होंने सबको धर्म के मार्ग पर चलने और न्यायपूर्वक जीवन जीने की प्रेरणा दी। राम राज्य में कोई भी दुखी या दरिद्र नहीं था। सभी लोग आपस में प्रेम और सद्भाव से रहते थे। अपराध और अन्याय का नामोनिशान मिट गया था। राम का राज्य एक आदर्श राज्य बन गया, जिसकी कल्पना हर युग में की जाती है। हर व्यक्ति अपने धर्म का पालन करता था, झूठ और छल कपट का कहीं स्थान न था।

राम राज्य की स्थापना

राम राज्य में धर्म, न्याय और सत्य का बोलबाला था। प्रजा सुखी थी, समृद्ध थी और संतुष्ट थी। पृथ्वी हरी-भरी थी और नदियाँ निर्मल जल से बह रही थीं। राम ने एक आदर्श राजा बनकर दिखाया कि प्रजा को कैसे सुखी रखा जा सकता है। राम राज्य की कथा आज भी भारत में हर घर में सुनाई जाती है।

राम का हर कार्य, हर निर्णय प्रजा के हित में होता था। वे सदैव अपनी प्रजा की भलाई के लिए तत्पर रहते थे। राम ने अपने राज्य में हर व्यक्ति को समान अवसर प्रदान किया। किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं किया जाता था। यही कारण था कि उनकी प्रजा उनसे बहुत प्रेम करती थी। राम राज्य एक स्वर्णिम युग था, जो आज भी लोगों के दिलों में जीवित है। राम के प्रेम और न्याय के कारण, अयोध्या सचमुच में स्वर्ग बन गई थी।

अध्याय 7 का सार: इस अध्याय में राम के अयोध्या लौटने और राज्याभिषेक का वर्णन है। राम राज्य की स्थापना और प्रजा के सुखमय जीवन का चित्रण किया गया है। यह अध्याय हमें सिखाता है कि एक आदर्श राजा को कैसा होना चाहिए और धर्म, न्याय और सत्य के मार्ग पर चलकर कैसे एक सुखी और समृद्ध राज्य का निर्माण किया जा सकता है। राम का चरित्र हमें सदैव प्रेरणा देता रहेगा।

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