
Shiva Parvati Vivah Katha – Chapter 3: Parvati's Birth and Devotion
शिव पार्वती विवाह कथा का अध्याय 3 — पार्वती का जन्म और भक्ति। पार्वती का हिमवान और मैना के घर जन्म होता है और वे बचपन से ही शिव को पति रूप में पाने के लिए तपस्या करती हैं।
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शिव पार्वती विवाह कथा का अध्याय 3 — पार्वती का जन्म और भक्ति। पार्वती का हिमवान और मैना के घर जन्म होता है और वे बचपन से ही शिव को पति रूप में पाने के लिए तपस्या करती हैं।

लंका विजय कथा का अध्याय 2 — सीता स्वयंवर कथा। राम, सीता के स्वयंवर में शिव धनुष तोड़कर सीता से विवाह करते हैं।

राधा कृष्ण प्रेम कथा का अध्याय 3 — राधा का पहला दर्शन। कृष्ण और राधा की पहली मुलाकात गोकुल के वनों में होती है, जहाँ राधा कृष्ण के अद्भुत रूप से मोहित हो जाती हैं।

कुरुक्षेत्र युद्ध कथा का अध्याय 1 — युद्ध के बादल। कुरुक्षेत्र युद्ध की पृष्ठभूमि और पात्रों का परिचय दिया जाता है, जिसमें कौरवों और पांडवों के बीच बढ़ते हुए मतभेद शामिल हैं।

समुद्र मंथन कथा का अध्याय 7 — रत्नों का प्रकटीकरण। समुद्र मंथन से अनेक दिव्य रत्न और वस्तुएं प्रकट होती है, जैसे कामधेनु, उच्चैश्रवा और ऐरावत।

प्रह्लाद और हिरण्यकशिपु का अध्याय 1 — हिरण्यकशिपु: वरदान और क्रोध। हिरण्यकशिपु, तपस्या से अमरता का वरदान पाकर तीनों लोकों पर अत्याचार करना शुरू कर देता है।

शिव पार्वती विवाह कथा का अध्याय 2 — तारकासुर का आतंक और भविष्यवाणी। तारकासुर के अत्याचार से तीनों लोक त्रस्त हैं और देवताओं को यह भविष्यवाणी पता चलती है कि शिव पुत्र ही उसे मार सकता है।

लंका विजय कथा का अध्याय 1 — अयोध्या के राजकुमार, राम। राजा दशरथ के पुत्र राम का जन्म और उनके बचपन की कहानी बताई जाती है।

राधा कृष्ण प्रेम कथा का अध्याय 2 — गोकुल में बाल लीला। नंद और यशोदा के घर में कृष्ण का बचपन गोकुल में बीतता है, जहाँ वे अपनी अद्भुत लीलाओं से सबका मन मोह लेते हैं।

समुद्र मंथन कथा का अध्याय 6 — शिव का बलिदान। भगवान शिव हलाहल विष को पीकर ब्रह्मांड को बचाते हैं और नीलकंठ बनते हैं।

शिव पार्वती विवाह कथा का अध्याय 1 — सती का बलिदान और शोक। सती अपने पिता के अनादर से आहत होकर अग्नि में समाहित हो जाती हैं, जिससे शिव गहरे शोक में डूब जाते हैं।

राधा कृष्ण प्रेम कथा का अध्याय 1 — कृष्ण का दिव्य जन्म। इस अध्याय में, कंस के अत्याचारों से पीड़ित पृथ्वी माँ की प्रार्थना पर भगवान विष्णु कृष्ण रूप में जन्म लेते हैं, जो कारागार में देवकी और वासुदेव से प्रकट होते हैं।