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शिव पार्वती विवाह कथा – अध्याय 5: कामदेव का हस्तक्षेप और अंत

Tilak Kathayein12 Apr 202666 views📖 1 min read
शिव पार्वती विवाह कथा
शिव पार्वती विवाह कथा का अध्याय 5 — कामदेव का हस्तक्षेप और अंत। देवताओं के कहने पर कामदेव शिव का ध्यान भंग करने की कोशिश करते हैं, जिसके कारण शिव क्रोधित होकर उन्हें भस्म कर देते हैं।

कामदेव का हस्तक्षेप और अंत

पार्वती की कठोर तपस्या और अटूट साधना से तीनों लोकों में हलचल मच गई थी। उनकी भक्ति की अग्नि ने शिव को लुभाने का मार्ग प्रशस्त कर दिया था, परंतु देवताओं को भय था कि कहीं शिव अपनी तपस्या में इतने लीन न हो जाएं कि सती के पुनर्जन्म को अस्वीकार कर दें। इसलिए, इंद्र ने कामदेव से हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया, जो प्रेम और वासना के देवता थे।

प्रेम के बाण

कामदेव, अपनी पत्नी रति के साथ, कैलाश पर्वत पर पहुंचे। वसंत ऋतु का आगमन हो चुका था; वृक्षों पर नए पत्ते खिल रहे थे, फूलों की सुगंध हवा में तैर रही थी, और पक्षियों ने मधुर गीत गाना शुरू कर दिया था। कामदेव ने सोचा कि यह शिव के ध्यान को भंग करने का सबसे उपयुक्त समय है। रति के मन में थोड़ा भय भी था कि कहीं भगवान शिव क्रोधित न हो जाएं, परंतु कामदेव अपने लक्ष्य के प्रति दृढ़ निश्चयी थे। उनके तरकस में सम्मोहन, शोषण, उन्मादन, तापन और स्तंम्भन नामक पाँच पुष्पों के बाण थे, जो किसी भी हृदय को प्रेम से विचलित करने की शक्ति रखते थे।

कामदेव ने रति से कहा, "प्रिये, चिंता मत करो। देवताओं का हित मेरे लिए सर्वोपरि है। मैं जानता हूँ कि शिव की तपस्या अटल है, परंतु प्रेम का बाण हर हृदय को भेद सकता है, चाहे वह कितना भी कठोर क्यों न हो।" फिर उन्होंने अपने धनुष पर सम्मोहन बाण चढ़ाया, जिससे शिव के मन में पार्वती के प्रति अनुराग उत्पन्न हो सके। उन्होंने धीरे से बाण खींचा और उसे शिव की ओर छोड़ दिया।

शिव का क्रोध

जैसे ही बाण शिव के हृदय को स्पर्श करने वाला था, उनकी तीसरी आँख खुल गई, जो उनके ललाट के मध्य में स्थित थी। उस आँख से अग्नि की प्रचंड ज्वाला निकली, जिसने पल भर में कामदेव को भस्म कर दिया। रति चीख उठी और अपने पति के भस्म को देखकर विलाप करने लगी। कैलाश पर्वत पर शांति भंग हो गई। सभी देवता भयभीत होकर छिप गए।

शिव का क्रोध शांत हो गया, लेकिन कामदेव की मृत्यु को देखकर उन्हें गहरा दुख हुआ। उन्होंने देवताओं की ओर देखा और गर्जना करते हुए कहा, "किसने इस दुस्साहस का कार्य किया है? किसने मेरी तपस्या को भंग करने का प्रयास किया?" इंद्र भय से कांप रहे थे, परंतु उन्होंने सत्य बताने का साहस जुटाया। शिव ने फिर अपनी आँखें बंद कर लीं, मानो इस घटना का कोई महत्व ही नहीं रहा। उनका ध्यान फिर से केंद्रित हो गया, परंतु कामदेव का बलिदान अमर हो गया।

रति का विलाप और अगले अध्याय की भूमिका

रति ने शिव के चरणों में गिरकर अपने पति के प्राणों की भीख मांगी। उसकी करुण पुकार सुनकर पार्वती का हृदय द्रवित हो गया, जो अभी भी तपस्या में लीन थीं, परंतु घटना से अनजान नहीं थीं। रति के विलाप ने पार्वती के मन में करुणा और प्रेम की भावनाएं जगाईं। शिव ने भी रति की पीड़ा को महसूस किया, और भविष्य में कामदेव के पुनर्जन्म का आश्वासन दिया, परंतु अभी, प्रेम के देवता का अंत हो चुका था। अब, देवताओं को प्रत्यक्ष रूप से शिव को पार्वती से विवाह का प्रस्ताव भेजने का मार्ग खोजना था, क्योंकि काम की सहायता से तपस्या भंग करने का प्रयास विफल हो चुका था।

अध्याय 5 का सार: इस अध्याय में कामदेव ने शिव की तपस्या भंग करने का प्रयास किया, जिसके परिणामस्वरूप वे शिव के क्रोध से भस्म हो गए। यह घटना दिखाती है कि वासना और बाहरी आकर्षण से आध्यात्मिक मार्ग में बाधा आ सकती है और सच्ची भक्ति में लीन होना ही श्रेष्ठ है।

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