
सावित्री सत्यवान कथा – अध्याय 4: वह दुर्भाग्यपूर्ण दिन
सावित्री सत्यवान कथा का अध्याय 4 — वह दुर्भाग्यपूर्ण दिन। जब सत्यवान लकड़ी काटने के लिए वन जाता है, तो सावित्री उसके साथ जाती है और सत्यवान की मृत्यु हो जाती है।

सावित्री सत्यवान कथा का अध्याय 4 — वह दुर्भाग्यपूर्ण दिन। जब सत्यवान लकड़ी काटने के लिए वन जाता है, तो सावित्री उसके साथ जाती है और सत्यवान की मृत्यु हो जाती है।

कुरुक्षेत्र युद्ध कथा का अध्याय 5 — भगवत गीता का सार। भगवान कृष्ण अर्जुन को भगवत गीता का ज्ञान देते हैं, कर्म, धर्म और मोक्ष के महत्व को समझाते हैं, अर्जुन का मोह भंग करते हैं।

राधा कृष्ण प्रेम कथा का अध्याय 7 — कृष्ण का राजनेता रूप। कृष्ण मथुरा के राजा बनते हैं और एक कुशल राजनेता के रूप में द्वारका की स्थापना करते हैं, जिससे वे धर्म की स्थापना करते हैं।

गणेश चतुर्थी व्रत कथा का अध्याय 2 — गजमुख और आशीर्वाद की प्राप्ति। भगवान शिव ने गणेश को जीवित करने के लिए पहले मिले हाथी का सिर लगाया और उन्हें सभी देवताओं में प्रथम पूज्य होने का आशीर्वाद दिया।

राम सेतु निर्माण कथा का अध्याय 1 — सीता की खोज का आरंभ। हनुमान लंका से लौटकर सीता माता के अपहरण और रावण की लंका का समाचार राम को देते हैं, जिससे राम सीता को वापस लाने के लिए वानर सेना के साथ लंका जाने का निश्चय करते हैं।

प्रह्लाद और हिरण्यकशिपु का अध्याय 5 — हिरण्यकशिपु का क्रोध बढ़ता है। प्रह्लाद की विष्णु भक्ति से क्रोधित होकर हिरण्यकशिपु उसे मारने के कई असफल प्रयास करता है।
नरसिंह अवतार कथा का अध्याय 3 — कठिनाइयाँ और परीक्षाएँ। हिरण्यकशिपु प्रह्लाद को मारने के कई प्रयास करता है, लेकिन विष्णु की कृपा से प्रह्लाद हर बार बच जाता है।

सत्यनारायण कथा का अध्याय 2 — लकड़हारे का व्रत करना। एक गरीब लकड़हारा ब्राह्मण से सत्यनारायण व्रत के बारे में सुनता है, उसका पालन करता है, और भगवान विष्णु की कृपा से धन्य होता है।

शिव पार्वती विवाह कथा का अध्याय 6 — विवाह प्रस्ताव और स्वीकृति। सप्तऋषि हिमवान के पास शिव का विवाह प्रस्ताव लेकर जाते हैं और पार्वती के माता-पिता इस प्रस्ताव को स्वीकार करते हैं।

लंका विजय कथा का अध्याय 5 — हनुमान की भक्ति। राम हनुमान से मिलते हैं, हनुमान सीता की खोज में राम की मदद करने का वचन देते हैं।

सावित्री सत्यवान कथा का अध्याय 3 — वन में जीवन। सावित्री और सत्यवान वन में सरल और प्रेमपूर्ण जीवन बिताते हैं, सावित्री सत्यवान की मृत्यु के दिन का बेसब्री से इंतजार करती है।

कुरुक्षेत्र युद्ध कथा का अध्याय 4 — अर्जुन का विषाद। अर्जुन अपने रिश्तेदारों और गुरुओं के खिलाफ लड़ने में हिचकिचाते हैं, जिससे उन्हें युद्ध का भय होता है।