
राधा कृष्ण प्रेम कथा – अध्याय 6: मथुरा की यात्रा
राधा कृष्ण प्रेम कथा का अध्याय 6 — मथुरा की यात्रा। कृष्ण बलराम के साथ मथुरा जाते हैं, जहाँ वे कंस का वध करके मथुरावासियों को उसके अत्याचारों से मुक्त करते हैं।

राधा कृष्ण प्रेम कथा का अध्याय 6 — मथुरा की यात्रा। कृष्ण बलराम के साथ मथुरा जाते हैं, जहाँ वे कंस का वध करके मथुरावासियों को उसके अत्याचारों से मुक्त करते हैं।

गणेश चतुर्थी व्रत कथा का अध्याय 1 — गणेश जन्म और दिव्य शक्तियाँ। देवी पार्वती ने अपने शरीर के मैल से गणेश को बनाया और उन्हें द्वारपाल नियुक्त किया, जिससे भगवान शिव से उनका सामना हुआ और उनका सिर कट गया।

प्रह्लाद और हिरण्यकशिपु का अध्याय 4 — प्रह्लाद की अटूट भक्ति। प्रह्लाद, असुर कुल में जन्म लेने के बावजूद नारायण के परम भक्त होते हैं और गुरुकुल में भी नारायण का नाम जपते हैं।
नरसिंह अवतार कथा का अध्याय 2 — प्रह्लाद की भक्ति। हिरण्यकशिपु का पुत्र प्रह्लाद विष्णु का परम भक्त बनता है, जिससे हिरण्यकशिपु क्रोधित होता है।

सत्यनारायण कथा का अध्याय 1 — दरिद्र ब्राह्मण की कहानी। एक गरीब ब्राह्मण विष्णु से प्रार्थना करता है और सत्यनारायण व्रत के बारे में सुनता है, जो उसे दर्शाता है कि वह अपनी गरीबी पर कैसे विजय प्राप्त कर सकता है।

शिव पार्वती विवाह कथा का अध्याय 5 — कामदेव का हस्तक्षेप और अंत। देवताओं के कहने पर कामदेव शिव का ध्यान भंग करने की कोशिश करते हैं, जिसके कारण शिव क्रोधित होकर उन्हें भस्म कर देते हैं।

लंका विजय कथा का अध्याय 4 — सीता हरण कांड। रावण छल से सीता का हरण करता है और उन्हें लंका ले जाता है।

सावित्री सत्यवान कथा का अध्याय 2 — सावित्री का सत्यवान को चुनना। सावित्री सत्यवान को अपने पति के रूप में चुनती है, जो वन में लकड़हारा है, नारद मुनि के चेतावनी के बावजूद।

कुरुक्षेत्र युद्ध कथा का अध्याय 3 — सेनाओं का समागम। दोनों सेनाएँ कुरुक्षेत्र में इकट्ठी होती हैं, युद्ध के नियम निर्धारित किए जाते हैं, और योद्धा अपने-अपने पक्ष चुनते हैं।

राधा कृष्ण प्रेम कथा का अध्याय 5 — कंस वध की भविष्यवाणी। कंस को पता चलता है कि कृष्ण ही उसकी मृत्यु का कारण बनेंगे, जिससे वह उन्हें मारने के लिए अनेक प्रयास करता है।

समुद्र मंथन कथा का अध्याय 9 — सत्य की जीत। भगवान विष्णु देवताओं को अमृत पिलाते हैं, जिससे वे अमर हो जाते हैं और असुरों को पराजित करते हैं।

प्रह्लाद और हिरण्यकशिपु का अध्याय 3 — प्रह्लाद: गर्भ में ज्ञान। हिरण्यकशिपु की पत्नी कयाधु, देवर्षि नारद के आश्रम में रहती हैं जहाँ गर्भ में पल रहे प्रह्लाद को विष्णु भक्ति का ज्ञान प्राप्त होता है।