
Bhagavad Gita – Chapter 6: Self-Control and Meditation
भगवद गीता का अध्याय 6 — आत्म-नियंत्रण और ध्यान। कृष्ण एकाग्रता, ध्यान के अभ्यास और मन पर नियंत्रण पाने के महत्व का वर्णन करते हैं, एक स्थिर बुद्धि बनाने पर जोर देते हैं।

भगवद गीता का अध्याय 6 — आत्म-नियंत्रण और ध्यान। कृष्ण एकाग्रता, ध्यान के अभ्यास और मन पर नियंत्रण पाने के महत्व का वर्णन करते हैं, एक स्थिर बुद्धि बनाने पर जोर देते हैं।

महाभारत का अध्याय 4 — कृष्ण और पांडव। कृष्ण और पांडवों के बीच पनपते संबंध और हस्तिनापुर के राजनीतिक परिदृश्य का परिचय इसमें है।

श्रीमद भागवत पुराण का अध्याय 2 — वराह अवतार: पृथ्वी का उद्धार। हिरण्याक्ष द्वारा पृथ्वी को हरण करने पर भगवान विष्णु वराह अवतार लेकर उसका उद्धार करते हैं।

भगवद गीता का अध्याय 5 — संन्यास योग: सच्ची स्वतंत्रता। कृष्ण कर्म त्याग और कर्म योग के बीच के सही तात्पर्य को समझाते हैं, और बताते हैं कि कैसे दोनों ही परम लक्ष्य तक ले जा सकते हैं।

रघुनाथ मंदिर जम्मू, जम्मू कश्मीर 2026: आरती समय, दर्शन समय, प्रवेश शुल्क, कैसे पहुंचें, इतिहास और यात्रा गाइड। सम्पूर्ण जानकारी हिंदी में।

महाभारत का अध्याय 3 — कृष्ण का मथुरा प्रस्थान। अक्रूर के साथ कृष्ण का मथुरा प्रस्थान और कंस के अंत की ओर ले जाने वाली घटनाओं का वर्णन इसमें है।

श्रीमद भागवत पुराण का अध्याय 1 — सृष्टि का आरंभ और विष्णु। यह अध्याय सृजन की शुरुआत और भगवान विष्णु के महत्व को स्थापित करता है, जिसमें विभिन्न अवतारों की उत्पत्ति का वर्णन है।

भगवद गीता का अध्याय 4 — ज्ञान योग: ज्ञान का मार्ग। कृष्ण ज्ञान के मार्ग, आत्म-साक्षात्कार की प्रकृति और कैसे भक्ति और ज्ञान एक साथ मुक्ति की ओर ले जा सकते हैं, इसका वर्णन करते हैं।

महाभारत का अध्याय 2 — कृष्ण की वृंदावन लीलाएँ। यह अध्याय कृष्ण के वृंदावन में गोपियों के साथ बिताए गए रमणीय समय और उनकी दिव्य लीलाओं का वर्णन करता है।

भगवद गीता का अध्याय 3 — कर्म योग: कर्म का मार्ग। कृष्ण अर्जुन को फल की अपेक्षा किए बिना अपने कर्तव्य को निभाने के महत्व पर जोर देते हैं, इसलिए कर्म योग को निष्काम कर्म की आवश्यकता होती है।

महाभारत का अध्याय 1 — कृष्ण जन्म और प्रारंभिक जीवन। यह अध्याय कृष्ण के जन्म, उनके प्रारंभिक जीवन, और कंस के अत्याचारों से उनकी सुरक्षा पर केंद्रित है।

भगवद गीता का अध्याय 2 — सांख्य योग: सच्चा ज्ञान। कृष्ण शाश्वत आत्मा की प्रकृति, कर्म के परिणामों और ज्ञान के मार्ग की व्याख्या करते हैं, अर्जुन को कर्तव्यपरायणता के बारे में शिक्षित करते हैं।