एकादशी व्रत कथा

Papamochani Ekadashi | पापमोचनी एकादशी – व्रत कथा, विधि और लाभ 2026

Tilak Kathayein19 May 2026120 views📖 1 min read
पापमोचनी एकादशी – Papamochani Ekadashi
पापमोचनी एकादशी 2026 – व्रत कथा, विधि, क्या खाएं, शुभ मुहूर्त और लाभ। भगवान विष्णु की कृपा पाएं।

पापमोचनी एकादशी – परिचय

चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को पापमोचनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। यह एकादशी पापों का नाश करने वाली मानी जाती है, इसीलिए इसका नाम 'पापमोचनी' एकादशी है। यह एकादशी विशेष रूप से अपने नाम के अनुरूप फल देने वाली है, क्योंकि यह भक्तों के सभी प्रकार के पापों को हर लेती है। 2026 में, पापमोचनी एकादशी 24 मार्च, सोमवार को पड़ रही है।

सभी एकादशियों में पापमोचनी एकादशी का अपना एक अनूठा और अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। इसे सभी एकादशियों में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है क्योंकि यह न केवल इस जन्म के बल्कि पिछले जन्मों के भी पापों को नष्ट करने की शक्ति रखती है। जो भक्त सच्चे हृदय से इस व्रत का पालन करते हैं, वे सभी प्रकार के दुखों और कष्टों से मुक्त हो जाते हैं।

पापमोचनी एकादशी की व्रत कथा

प्राचीन काल में चित्ररथ नामक एक अत्यंत सुंदर अप्सरा थी, जो अपने सौंदर्य और नृत्य कला के लिए विख्यात थी। एक बार वह देवर्षि नारद के नेतृत्व में तपस्या कर रहे ऋषियों के आश्रम में पहुंची। वहां उसने अपनी मोहक अदाओं से एक युवा ऋषि, मेधावी मुनि को मोहित कर लिया। मेधावी मुनि, जो अपनी तपस्या और ब्रह्मचर्य के लिए जाने जाते थे, चित्ररथ के मोहपाश में फंस गए और उन्होंने अपने ब्रह्मचर्य का उल्लंघन कर दिया।

इस कृत्य से मेधावी मुनि अत्यंत दुखी हुए और उन्हें अपने ऊपर लगे पाप का भान हुआ। वे चित्ररथ को कोसना चाहते थे, परंतु चित्ररथ ने प्रभु की शरण ली और पापमोचनी एकादशी का व्रत रखने का संकल्प लिया। विधि-विधान से व्रत का पालन करने पर, भगवान विष्णु की कृपा से मेधावी मुनि के सभी पाप नष्ट हो गए और उन्हें अपने पूर्व की अवस्था प्राप्त हुई।

चित्ररथ की तपस्या और व्रत के प्रभाव से सभी पाप नष्ट हो गए और वह पुनः स्वर्गलोक को प्राप्त हुई। भगवान विष्णु ने प्रसन्न होकर वरदान दिया कि इस एकादशी का व्रत करने वाले सभी भक्तों के सभी पाप नष्ट हो जाएंगे और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होगी। यह व्रत सभी प्रकार के पापों से मुक्ति दिलाता है।

व्रत विधि

दशमी की रात से ही व्रत की तैयारी शुरू हो जाती है। इस रात सादा और सात्विक भोजन करना चाहिए। लहसुन, प्याज और मांसाहार का सेवन पूर्णतः वर्जित है। ब्रह्मचर्य का पालन करें और जमीन पर शयन करें।

एकादशी के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र की स्थापना करें और पंचोपचार विधि से उनका पूजन करें। तुलसी दल, पुष्प, फल आदि से भगवान को अर्पण करें। 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का यथाशक्ति जाप करें।

समयकरने का कार्य
सूर्योदय से पूर्वउठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
प्रातःकालभगवान विष्णु का पूजन करें, मंत्र जाप करें।
दिन भरफलाहार करें या निर्जल रहें। विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें।
संध्याकालभगवान विष्णु की आरती करें, भजन-कीर्तन करें।
रात्रिजागरण करें और भगवान का स्मरण करें।

द्वादशी के दिन, व्रत का पारण सूर्योदय के पश्चात किया जाता है। स्नान आदि से निवृत होकर भगवान विष्णु की पूजा करें और ब्राह्मणों को भोजन कराएं। उसके पश्चात स्वयं सात्विक भोजन ग्रहण कर व्रत का पारण करें।

व्रत में क्या खाएं और क्या नहीं

पापमोचनी एकादशी के व्रत में सात्विक आहार का सेवन करना चाहिए। इसमें फल, दूध, दही, कुट्टू का आटा (पूड़ी या पकौड़ी के रूप में), साबूदाना (खिचड़ी या खीर के रूप में), मेवे (बादाम, काजू, पिस्ता आदि) और सेंधा नमक का प्रयोग किया जा सकता है। फलाहार का सेवन विशेष रूप से उत्तम माना गया है।

इस व्रत में चावल का सेवन पूर्णतः वर्जित है। इसके अतिरिक्त, दालें, सामान्य नमक, लहसुन, प्याज और मांसाहार का सेवन भी नहीं करना चाहिए। चावल के वर्जित होने का कारण यह है कि मान्यतानुसार चावल की उत्पत्ति भगवान विष्णु के अंश से हुई है, इसलिए एकादशी के दिन इसका सेवन करना उनकी अवमानना माना जाता है।

पापमोचनी एकादशी व्रत के लाभ

  • पाप-मोचन – यह व्रत समस्त प्रकार के पापों, जैसे ब्रह्महत्या, सुवर्ण चोरी, मदिरापान आदि से मुक्ति दिलाता है। पद्म पुराण के अनुसार, इस व्रत के प्रभाव से मनुष्य अपने सभी पूर्वकृत पापों से मुक्त हो जाता है।
  • मोक्ष प्राप्ति – इस एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति को जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति मिलती है और वह भगवान विष्णु के धाम को प्राप्त होता है।
  • सांसारिक लाभ – यह व्रत धन, ऐश्वर्य, सुख-समृद्धि प्रदान करता है और जीवन की सभी बाधाओं को दूर करता है।
  • स्वास्थ्य लाभ – उपवास रखने से शरीर की पाचन क्रिया सुधरती है और शरीर के विषैले तत्व बाहर निकलते हैं, जिससे स्वास्थ्य उत्तम रहता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

2026 में पापमोचनी एकादशी कब है?

2026 में पापमोचनी एकादशी 24 मार्च, सोमवार को पड़ रही है। इस दिन व्रत का पारण 25 मार्च, मंगलवार को सुबह किया जाएगा।

पापमोचनी एकादशी व्रत में चावल क्यों नहीं खाते?

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, चावल की उत्पत्ति भगवान विष्णु के अंश से हुई है। इसलिए एकादशी के दिन चावल का सेवन भगवान विष्णु के प्रति अनादर माना जाता है और यह पाप का कारण बनता है।

क्या बीमार व्यक्ति पापमोचनी एकादशी व्रत रख सकता है?

बीमार, गर्भवती महिलाएं और वृद्ध व्यक्ति यदि पूर्ण उपवास नहीं रख सकते, तो वे फलाहार या एक समय सात्विक भोजन करके व्रत का पालन कर सकते हैं।

निष्कर्ष

पापमोचनी एकादशी का आध्यात्मिक महत्व अत्यंत अनूठा है। भगवान विष्णु अपने भक्तों से वादा करते हैं कि जो भी इस व्रत को पूर्ण श्रद्धा और निष्ठा से करेगा, उसके सभी पाप नष्ट हो जाएंगे और उसे मोक्ष की प्राप्ति होगी। इसी कारण इसे सभी एकादशियों में सबसे शक्तिशाली और कल्याणकारी माना जाता है।

सभी भक्तों से आग्रह है कि इस शुभ अवसर पर पूर्ण श्रद्धा के साथ पापमोचनी एकादशी का व्रत रखें और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करें। जय श्री हरि! जय एकादशी माता!

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आज का पंचांग 26 जुलाई 2026

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