Mohini Ekadashi | मोहिनी एकादशी – व्रत कथा, विधि और लाभ 2026

📋 विषय सूची
मोहिनी एकादशी – परिचय
वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोहिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। यह एकादशी अत्यंत पुण्यदायिनी मानी जाती है। वर्ष 2026 में मोहिनी एकादशी 29 अप्रैल, मंगलवार को पड़ रही है। इस एकादशी को 'मोहिनी' इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस दिन भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण कर असुरों को मोहित कर अमृत कलश छीन लिया था, जिससे देवताओं का कल्याण हुआ। यह कथा स्वयं भगवान शिव ने मां पार्वती को सुनाई थी, जो इसके महत्व को दर्शाती है।
सभी एकादशियों में मोहिनी एकादशी का विशेष स्थान है। इसे सभी पापों का नाश करने वाली और मोक्ष प्रदान करने वाली एकादशी माना जाता है। मान्यता है कि इस व्रत के पुण्य से मनुष्य जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्त हो जाता है और भगवान विष्णु के परम धाम को प्राप्त होता है। यह एकादशी विशेष रूप से धन, संतान और सुख-समृद्धि की कामनाओं को पूर्ण करने वाली भी मानी जाती है।
मोहिनी एकादशी की व्रत कथा
प्राचीन काल में सरस्वती नदी के किनारे भद्रावती नामक एक सुंदर नगरी थी। वहां राजा धृतिमान राज्य करते थे। उसी राज्य में एक वैश्य रहता था, जिसका नाम धनपाल था। वह अत्यंत धर्मात्मा और विष्णु भक्त था। एक बार उसके नगर में भयंकर अकाल पड़ा, जिससे प्रजा त्राहि-त्राहि करने लगी। धनपाल भी इस संकट से पीड़ित था।
धनपाल ने इस संकट से मुक्ति पाने के लिए मोहिनी एकादशी का व्रत रखने का संकल्प लिया। उसने दशमी के दिन से ही संयम बरतना शुरू कर दिया। एकादशी के दिन वह स्नान आदि से निवृत्त होकर भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा की। उसने निर्जल रहकर व्रत का पालन किया और रात्रि जागरण किया। इस प्रकार उसने पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ मोहिनी एकादशी का व्रत पूरा किया।
एकादशी के व्रत के प्रभाव से भगवान विष्णु प्रसन्न हुए और उन्होंने धनपाल को दर्शन दिए। भगवान ने कहा, "तुम्हारे इस व्रत के पुण्य से तुम्हारे राज्य का अकाल समाप्त हो जाएगा और प्रजा सुख-समृद्धि से रहेगी। यह व्रत सभी कष्टों का निवारण करने वाला है।" ऐसा कहकर भगवान विष्णु अंतर्धान हो गए। धनपाल के व्रत के प्रभाव से शीघ्र ही राज्य में वर्षा हुई और अकाल समाप्त हो गया।
व्रत विधि
मोहिनी एकादशी व्रत की तैयारी दशमी की रात्रि से ही आरंभ हो जाती है। दशमी के दिन व्यक्ति को सात्विक भोजन करना चाहिए और ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। रात में जमीन पर शयन करना उत्तम माना जाता है।
एकादशी के दिन प्रात:काल उठकर नित्यक्रियाओं से निवृत होकर स्नान करें। स्वच्छ वस्त्र धारण कर भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र के समक्ष आसन पर बैठें। व्रत का संकल्प लें और भगवान विष्णु की षोडशोपचार विधि से पूजा करें। तुलसी दल अवश्य अर्पित करें। "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप करते रहें।
| समय | करने का कार्य |
|---|---|
| सूर्योदय से पूर्व | नित्य क्रियाओं से निवृत होकर स्नान करें। |
| प्रातःकाल | भगवान विष्णु की पूजा करें, मंत्र जाप करें। |
| दिन भर | निर्जल या फलाहार रहकर व्रत का पालन करें। कथा श्रवण करें। |
| रात्रि में | जगराता करें, भजन-कीर्तन करें। |
| द्वादशी के दिन | स्नान आदि से निवृत होकर भगवान विष्णु की पूजा कर ब्राह्मण को भोजन कराएं। |
द्वादशी के दिन, एकादशी व्रत का पारण किया जाता है। सूर्योदय के पश्चात स्नान आदि से निवृत होकर भगवान विष्णु की पूजा करें। इसके बाद किसी योग्य ब्राह्मण को भोजन कराएं और दक्षिणा दें। तत्पश्चात स्वयं सात्विक आहार ग्रहण कर व्रत खोलें। पारण का समय द्वादशी तिथि के सूर्योदय के बाद से लेकर दोपहर 12 बजे तक (या शुभ मुहूर्त में) होता है।
व्रत में क्या खाएं और क्या नहीं
मोहिनी एकादशी के व्रत में सात्विक आहार का सेवन किया जाता है। आप फल, दूध, दही, पनीर, मेवे, कुट्टू का आटा, साबूदाना आदि का सेवन कर सकते हैं। फलाहार कर रहे हैं तो दिन में एक बार ही भोजन करें। निर्जल व्रत रखना सबसे श्रेष्ठ माना जाता है।
इस व्रत में चावल का सेवन पूर्णतः वर्जित है। इसके अतिरिक्त, किसी भी प्रकार की दाल, बैंगन, सेम, कढ़ी, लहसुन, प्याज और तामसिक भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए। चावल वर्जित होने का कारण यह है कि ऐसी मान्यता है कि चावल में जल तत्व की प्रधानता होती है और इस दिन जल तत्व का सेवन भगवान विष्णु को अप्रिय होता है।
मोहिनी एकादशी व्रत के लाभ
- पाप-मोचन – इस व्रत के प्रभाव से मनुष्य के जाने-अनजाने में किए गए सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। पुराणों के अनुसार, यह व्रत समस्त पापों का क्षय कर व्यक्ति को पवित्र बनाता है।
- मोक्ष प्राप्ति – यह व्रत भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त कराता है और मृत्यु के उपरांत मोक्ष की प्राप्ति होती है। साधक को जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति मिल जाती है।
- सांसारिक लाभ – इस व्रत के रखने से धन, संपत्ति, सुख, समृद्धि और संतान की प्राप्ति होती है। घर में सुख-शांति बनी रहती है।
- स्वास्थ्य लाभ – उपवास के वैज्ञानिक फायदों के अनुसार, यह शरीर की शुद्धि करता है, पाचन तंत्र को आराम मिलता है और मेटाबॉलिज्म सुधरता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
2026 में मोहिनी एकादशी कब है?
वर्ष 2026 में मोहिनी एकादशी 29 अप्रैल, मंगलवार को पड़ रही है। इस दिन का शुभ मुहूर्त सूर्योदय से प्रारंभ होकर द्वादशी तिथि के सूर्योदय तक रहेगा, लेकिन पारण के लिए विशेष समय दोपहर तक उपयुक्त माना जाता है।
मोहिनी एकादशी व्रत में चावल क्यों नहीं खाते?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, चावल को अन्न की श्रेणी में नहीं बल्कि जल का अंश माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि एकादशी के दिन जल तत्व का सेवन भगवान विष्णु को अप्रिय होता है, इसलिए इस दिन चावल का सेवन वर्जित है। कुछ मान्यताओं के अनुसार, महर्षि मेधा के श्राप के कारण चावल को एकादशी पर वर्जित माना जाता है।
क्या बीमार व्यक्ति मोहिनी एकादशी व्रत रख सकता है?
बीमार, गर्भवती महिलाएं, वृद्ध या बहुत कमजोर व्यक्ति पूर्ण उपवास न रखकर केवल फलाहार या जल ग्रहण कर सकते हैं। वे दिन में एक बार सात्विक भोजन भी कर सकते हैं, लेकिन उन्हें व्रत का पुण्य अवश्य प्राप्त होता है।
निष्कर्ष
मोहिनी एकादशी का आध्यात्मिक महत्व अद्वितीय है। यह वह पावन तिथि है जब भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण कर सृष्टि के कल्याण का मार्ग प्रशस्त किया। इस एकादशी का व्रत रखने से मनुष्य के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे भगवान विष्णु के परमधाम की प्राप्ति होती है। यह सभी एकादशियों में सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है क्योंकि यह भक्त को संसार के मोहपाश से मुक्त कर मोक्ष की ओर ले जाती है। भगवान विष्णु अपने भक्तों को इस व्रत के माध्यम से सभी सुख-समृद्धि और अंत में मुक्ति का वरदान प्रदान करते हैं।
हे भक्तजनों! पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ मोहिनी एकादशी का व्रत करें। इस पवित्र दिन भगवान विष्णु का स्मरण मात्र ही कल्याणकारी है। अपने मन को शुद्ध रखें, वाणी पर संयम रखें और तन-मन-धन से भगवान की सेवा करें। आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी और भगवान की असीम कृपा आप पर बनी रहेगी। जय श्री हरि! जय एकादशी माता!
आज का पंचांग 25 जुलाई 2026
शुभ मुहूर्त, चोघड़िया, राशिफल और ग्रह स्थिति की पूरी जानकारी के लिए
संबंधित लेख

भगवान जगन्नाथ का परिचय | इतिहास, पौराणिक कथा, स्वरूप एवं महत्व
भगवान जगन्नाथ भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य स्वरूप माने जाते हैं और ओडिशा के पुरी में स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर विश्वभर के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है।

हवन के दौरान हम "स्वाहा" क्यों कहते हैं? | Why Do we Say " Swaha" during havan?
स्वाहा हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण मंत्र है, जो यज्ञ में आहुति की पूर्णता का प्रतीक है। यह देवी स्वधा का एक रूप है और पितरों को तृप्त करने व देवताओं को प्रसन्न करने के लिए प्रयोग किया जाता है।

काल भैरव और कुत्ते का संबंध | पौराणिक महत्व | काल भैरव और कुत्ते का संबंध | पौराणिक महत्व
कालभैरव का वाहन कुत्ता है, जो रक्षा और वफादारी का प्रतीक माना जाता है। हिंदू धर्म में, भैरव को शिव का रौद्र रूप और काशी का कोतवाल कहा जाता है, जिनकी पूजा अनिष्ट निवारण और सुरक्षा के लिए की जाती है।

What is Mangal Dosha? | मंगल दोष क्या है?
हिंदू धर्म में मंगल दोष का गहन महत्व है, जो विवाह और व्यक्तिगत जीवन को प्रभावित करता है। यह दोष ज्योतिषीय गणना पर आधारित है और इसके निवारण के उपाय भी बताए गए हैं।

श्री कार्तिकेय चालीसा | श्री कार्तिकेय चालीसा
श्री कार्तिकेय चालीसा का सम्पूर्ण पाठ, अर्थ सहित, पढ़ने के लाभ और महत्व को विस्तार से जानें। यह चालीसा भगवान कार्तिकेय की शक्ति, बुद्धि और विजय की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करती है।

Radha Chalisa | राधा चालीसा – संपूर्ण पाठ, अर्थ और लाभ 2026
राधा चालीसा – सम्पूर्ण पाठ, शब्दार्थ, विधि और लाभ। 2026 में राधा चालीसा हिंदी में पढ़ें।