देवी की कथाएँ

करणी माता कथा – अध्याय 6: चूहों की कथा

Tilak Kathayein13 Apr 2026147 views📖 1 min read
करणी माता कथा
करणी माता कथा का अध्याय 6 — चूहों की कथा। यहाँ करणी माता मंदिर में चूहों की उत्पत्ति और उनके महत्व की प्रसिद्ध कथा का वर्णन है।

चूहों की कथा

राठौड़ों से करणी माता का सम्बन्ध स्थापित होने के बाद, उनकी महिमा चारों ओर फैलने लगी। लोग उनके चमत्कारों को देखकर आश्चर्यचकित थे और उनका आशीर्वाद पाने के लिए व्याकुल रहते थे। इस अध्याय में हम जानेंगे कि कैसे देशनोक स्थित करणी माता के मंदिर में चूहों को इतना पवित्र माना जाता है और इसके पीछे क्या रहस्य है। यह कथा लक्ष्मण के पुनर्जन्म से जुड़ी है, जो करणी माता के भक्तों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

लक्ष्मण का पुनर्जन्म

एक बार, करणी माता ने अपने दत्तक पुत्र, पूंजा जी को गोद लिया था। पूंजा जी एक वीर और साहसी युवक थे। एक दिन, पूंजा जी का छोटा भाई, लक्ष्मण, तालाब में डूब गया और उसकी मृत्यु हो गई। पूरे परिवार में मातम छा गया। करणी माता का हृदय दुख से भर गया था। वे उस बालक को बहुत स्नेह करती थीं। शोक में डूबे हुए परिवार के सदस्य माता के चरणों में गिरकर प्रार्थना करने लगे।

करणी माता ने शांत स्वर में कहा, "रोओ मत। लक्ष्मण मरा नहीं है। वह अब मेरे साथ रहेगा।" उनकी बात सुनकर सब लोग हैरान रह गए। उन्होंने आगे कहा, "लक्ष्मण का पुनर्जन्म होगा, और वह मेरे मंदिर में एक चूहे के रूप में निवास करेगा। और सिर्फ लक्ष्मण ही नहीं, मेरे सभी चारण वंशज मृत्यु के बाद चूहे के रूप में मेरे मंदिर में जन्म लेंगे।"

चूहों का पवित्र स्थान

करणी माता के वचन के अनुसार, देशनोक स्थित मंदिर में चूहों का निवास हो गया। ये चूहे साधारण चूहे नहीं थे, इन्हें 'काबा' कहा जाता था और ये करणी माता के वंशजों के पुनर्जन्म माने जाते थे। मंदिर में हजारों की संख्या में काबा घूमते हैं, और भक्त उन्हें पवित्र मानते हैं। उन्हें दूध, मिठाई और अनाज खिलाया जाता है। काबा मंदिर में बिना किसी डर के घूमते हैं, और भक्तों का मानना है कि यदि कोई काबा उनके पैर को छू जाए, तो यह शुभ संकेत होता है।

मंदिर में काबा को मारना या उन्हें नुकसान पहुंचाना पाप माना जाता है। लोग यह सुनिश्चित करते हैं कि वे गलती से भी किसी काबा को न कुचलें। यह करणी माता की कृपा का ही परिणाम है कि चूहों को इतना सम्मान और पवित्रता मिली। भक्तों का मानना है कि इन चूहों में उनके पूर्वज निवास करते हैं, और उनकी सेवा करना, वास्तव में अपने पितरों का सम्मान करना है।

काबा का महत्व

करणी माता के मंदिर में काबा का महत्व अतुलनीय है। यह न केवल एक परंपरा है, बल्कि एक गहरा आध्यात्मिक विश्वास भी है। लोग दूर-दूर से इन चूहों का दर्शन करने आते हैं। वे मानते हैं कि काबा उनके जीवन में सुख, समृद्धि और शांति लाते हैं। करणी माता ने अपने भक्तों को यह समझाया कि मृत्यु जीवन का अंत नहीं है, बल्कि एक नया आरंभ है। उन्होंने यह भी सिद्ध किया कि हर जीव में परमात्मा का वास होता है, और हमें सभी प्राणियों का सम्मान करना चाहिए। इस रहस्यमय और प्रेरणादायक घटना के साथ, अब हम करणी माता की विदाई की कथा की ओर बढ़ेंगे, जहाँ उनके जीवन का अंतिम पड़ाव आता है, और वे अपने भक्तों को सदैव के लिए छोड़कर चली जाती हैं। अगला अध्याय उनकी विदाई की मार्मिक कहानी बताएगा।

अध्याय 6 का सार: इस अध्याय में हमने लक्ष्मण के पुनर्जन्म और देशनोक मंदिर में चूहों के पवित्र होने की कथा सुनी। करणी माता ने अपने वचन से मृत्यु को जीवन में परिवर्तित कर दिया और अपने भक्तों को यह सिखाया कि हर जीव में परमात्मा का वास होता है।

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आज का पंचांग 29 अगस्त 2026

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