कथाएँ

दुर्वासा मुनि कथा – अध्याय 3: अम्बरीष और विष्णु कृपा

Tilak Kathayein13 Apr 2026125 views📖 1 min read
दुर्वासा मुनि कथा
दुर्वासा मुनि कथा का अध्याय 3 — अम्बरीष और विष्णु कृपा। दुर्वासा मुनि अम्बरीष राजा को शाप देने का प्रयास करते हैं, किन्तु विष्णु की कृपा से असफल हो जाते हैं और उन्हें विष्णु के सुदर्शन चक्र का पीछा करना पड़ता है।

अम्बरीष और विष्णु कृपा

पिछले अध्याय में हमने देखा कि किस प्रकार देवताओं और मनुष्यों की परीक्षा ली गई। अब हम आगे बढ़ते हैं राजा अम्बरीष की कथा की ओर, जो भगवान विष्णु के परम भक्त थे और जिनकी भक्ति के कारण दुर्वासा मुनि को भी विष्णु कृपा का महत्व समझ आया।

द्वादशी व्रत का पारण

राजा अम्बरीष एकादशी का व्रत बड़ी श्रद्धा से रखते थे। द्वादशी के दिन, व्रत पारण का समय जैसे ही निकट आया, वे ब्राह्मणों को भोजन कराने की तैयारी में व्यस्त थे। वातावरण में शांति थी, यज्ञशाला से उठती धूप की सुगंध हवा में फैली हुई थी और पक्षी मधुर स्वर में गा रहे थे। राजा अम्बरीष, अपनी प्रजा के कल्याण के लिए सदैव तत्पर रहने वाले, आज विशेष रूप से प्रसन्न थे क्योंकि उन्होंने भगवान विष्णु की आराधना में एक और व्रत पूर्ण किया था। उनके चेहरे पर भक्ति का तेज और सेवा का भाव स्पष्ट दिखाई दे रहा था। अचानक, एक अप्रत्याशित घटना घटी।

राजा अम्बरीष ने मन में सोचा, "भोजन का समय हो रहा है, यदि ब्राह्मणों को भोजन कराने से पहले मैंने कुछ खा लिया तो व्रत भंग हो जाएगा। परन्तु, यदि भोजन कराने में विलम्ब हुआ तो भी उचित नहीं होगा। क्या करूँ?" फिर उन्होंने निर्णय लिया कि वे केवल जल का पान करेंगे, जो न तो भोजन है और न ही पूर्ण उपवास का उल्लंघन।

दुर्वासा मुनि का आगमन और सुदर्शन चक्र का पीछा

ठीक उसी समय, दुर्वासा मुनि अपने शिष्यों के साथ वहां पहुंचे। अम्बरीष ने उन्हें प्रणाम किया और भोजन के लिए आमंत्रित किया। दुर्वासा मुनि ने राजा का आतिथ्य स्वीकार किया, लेकिन वे स्नान करने के लिए नदी की ओर चले गए। राजा अम्बरीष प्रतीक्षा करते रहे, लेकिन मुनि वापस नहीं लौटे। द्वादशी का पारण मुहूर्त बीतता जा रहा था। राजा धर्म संकट में पड़ गये। उन्होंने ब्राह्मणों से परामर्श किया। ब्राह्मणों ने उन्हें मुहूर्त की समाप्ति से पहले जल ग्रहण करने की अनुमति दी। जैसे ही राजा ने जल ग्रहण किया, दुर्वासा मुनि लौट आए। उन्होंने राजा को जल पीते हुए देखा और क्रोध से आग बबूला हो उठे।

“दुष्ट! तुमने मेरा अपमान किया है! मेरे आगमन से पहले ही तुमने भोजन कर लिया? मैं तुम्हें अपने तप के बल से भस्म कर दूंगा!” दुर्वासा मुनि ने क्रोधित होकर कहा और अपनी एक जटा उखाड़कर जमीन पर फेंकी। उस जटा से एक भयंकर कृत्या उत्पन्न हुई और अम्बरीष को मारने के लिए दौड़ी। उसी क्षण, भगवान विष्णु का सुदर्शन चक्र वहां प्रकट हुआ और कृत्या को पल भर में भस्म कर दिया। फिर चक्र दुर्वासा मुनि का पीछा करने लगा। दुर्वासा मुनि भयभीत होकर तीनों लोकों में भागे, परन्तु सुदर्शन चक्र उनका पीछा छोड़ने को तैयार नहीं था। उन्हें समझ आ गया कि अम्बरीष की भक्ति और विष्णु के प्रति उनकी निष्ठा के कारण ही यह सब हो रहा है।

विष्णु से क्षमा याचना और अम्बरीष की स्तुति

अंत में, दुर्वासा मुनि भगवान विष्णु के पास क्षमा मांगने पहुंचे। उन्होंने विष्णु से प्रार्थना की, "हे भगवान, मैं अपनी भूल स्वीकार करता हूँ। मुझे राजा अम्बरीष को कष्ट नहीं देना चाहिए था। मुझे इस अपराध से मुक्ति दिलाइये।" भगवान विष्णु ने कहा, "मैं अपने भक्तों के वश में हूँ। मेरे चक्र को रोकने की शक्ति मुझमें भी नहीं है। केवल राजा अम्बरीष ही तुम्हें बचा सकते हैं। उन्हीं से क्षमा मांगो।" दुर्वासा मुनि निराश होकर राजा अम्बरीष के पास लौटे और उनसे क्षमा याचना की। राजा अम्बरीष ने भगवान विष्णु से चक्र शांत करने की प्रार्थना की। राजा की प्रार्थना सुनकर सुदर्शन चक्र शांत हो गया और दुर्वासा मुनि का पीछा छोड़ दिया। दुर्वासा मुनि ने राजा अम्बरीष की भक्ति और दयालुता की स्तुति की और तब उन्हें विष्णु के भक्तों की महिमा समझ आई। अगली कथा में, हम शकुंतला के दुर्भाग्य के बारे में जानेंगे, जिसके कारण उन्हें अनेक कष्ट उठाने पड़े।

अध्याय 3 का सार: इस अध्याय में हमने देखा कि राजा अम्बरीष ने अपनी भक्ति और धैर्य से दुर्वासा मुनि के क्रोध को शांत किया। इससे हमें यह शिक्षा मिलती है कि भगवान विष्णु अपने भक्तों की रक्षा करते हैं और क्षमा सबसे बड़ा गुण है।

🕉

आज का पंचांग 29 अगस्त 2026

शुभ मुहूर्त, चोघड़िया, राशिफल और ग्रह स्थिति की पूरी जानकारी के लिए

शेयर करें:

संबंधित लेख

कालाष्टमी व्रत – अध्याय 5: भक्ति का फल और सीख
कथाएँ

कालाष्टमी व्रत – अध्याय 5: भक्ति का फल और सीख

कालाष्टमी व्रत का अध्याय 5 — भक्ति का फल और सीख। यह अंतिम अध्याय बताता है कि कालाष्टमी व्रत रखने से प्राप्त होने वाले परिणाम और इससे मिली सीख क्या है।

08 Jun 2026175
कालाष्टमी व्रत – अध्याय 4: दिव्य हस्तक्षेप और आशीर्वाद
कथाएँ

कालाष्टमी व्रत – अध्याय 4: दिव्य हस्तक्षेप और आशीर्वाद

कालाष्टमी व्रत का अध्याय 4 — दिव्य हस्तक्षेप और आशीर्वाद। अध्याय चार में, भगवान भैरव भक्त की अटूट भक्ति से प्रसन्न होते हैं और उसे अपना आशीर्वाद देते हैं।

08 Jun 2026140
कालाष्टमी व्रत – अध्याय 3: परीक्षा और कष्टों का सामना
कथाएँ

कालाष्टमी व्रत – अध्याय 3: परीक्षा और कष्टों का सामना

कालाष्टमी व्रत का अध्याय 3 — परीक्षा और कष्टों का सामना। इस अध्याय में, भक्त को भगवान की कृपा प्राप्त करने से पहले कई बाधाओं और परीक्षाओं का सामना करना पड़ता है।

08 Jun 2026143
कालाष्टमी व्रत – अध्याय 2: भक्त की विनती और भक्ति
कथाएँ

कालाष्टमी व्रत – अध्याय 2: भक्त की विनती और भक्ति

कालाष्टमी व्रत का अध्याय 2 — भक्त की विनती और भक्ति। इस अध्याय में, एक भक्त की सच्ची भक्ति और भगवान भैरव से उसकी पुकार का वर्णन किया गया है।

08 Jun 2026134
अंबरनाथ शिव मंदिर
मंदिर

Ambernath Shiv Mandir | अंबरनाथ शिव मंदिर

अंबरनाथ शिव मंदिर एक प्राचीन ऐतिहासिक धरोहर है, जहाँ दर्शन का समय सुबह 6 बजे से रात 9 बजे तक है; मुंबई से रेल द्वारा आसानी से पहुँचें और शिवरात्रि पर इसका विशेष महत्व है।

08 May 2026311