देवी की कथाएँ

बगलामुखी माता कथा – अध्याय 2: वाक् स्तम्भन की शक्ति

Tilak Kathayein13 Apr 202679 views📖 1 min read
बगलामुखी माता कथा
बगलामुखी माता कथा का अध्याय 2 — वाक् स्तम्भन की शक्ति। इस अध्याय में देवी बगलामुखी की वाक् स्तम्भन शक्ति और उसके प्रभाव का विस्तार से वर्णन किया गया है।

वाक् स्तम्भन की शक्ति

पीताम्बरा देवी के प्राकट्य के साथ ही, ब्रह्मांड में व्याप्त हाहाकार कुछ शांत हुआ था। देवताओं के मुरझाए चेहरों पर आशा की एक किरण दौड़ गई थी, मानो अंधेरी रात के बाद सूर्योदय हुआ हो। अब, देवी बगलामुखी, अपनी शक्ति का प्रदर्शन करने और दानव को परास्त करने के लिए तत्पर थीं, यह सुनिश्चित करते हुए कि सत्य और धर्म की पुनर्स्थापना हो सके।

संहार काल की तैयारी

भगवती बगलामुखी का स्वर्ण वर्ण तेज अधिक प्रखर हो गया, उनकी तीसरी आँख से एक भयंकर ज्वाला निकली। वह ज्वाला दानव के निकट जाकर उसे भस्म करने के लिए व्याकुल हो उठी। दानव, जो अभी तक अपनी शक्ति के मद में चूर था, उस ज्वाला को देखकर आतंकित हो गया। उसने अनुमान नहीं लगाया था कि एक स्त्री शक्ति इतनी भयंकर हो सकती है। उसके मन में भय का संचार हुआ, और उसकी वाणी अवरुद्ध होने लगी।

दानव ने अपने आप से कहा, "ये क्या हो रहा है? मेरी जिह्वा क्यों लड़खड़ा रही है? मैं शक्तिहीन क्यों महसूस कर रहा हूँ?" उसने अपने अस्त्र-शस्त्र उठाने का प्रयास किया, परन्तु उसके हाथ सुन्न पड़ गए। वह देवी के सामने असहाय खड़ा था, मानो किसी ने उसके पैरों में बेड़ियाँ डाल दी हों।

दानव की जिह्वा का स्तम्भन

बगलामुखी माता ने अपने दिव्य हाथों से दानव की जीभ पकड़ ली। उनकी पकड़ इतनी मजबूत थी कि दानव चीख भी नहीं पाया। देवी ने दानव की जीभ को खींचकर अपने हाथों में पकड़ लिया, जो उस विशालकाय असुर का सबसे शक्तिशाली हथियार, उसकी वाक् शक्ति, थी। दानव के शरीर में कंपन होने लगा। उसने छटपटाने का प्रयत्न किया, पर देवी की शक्ति के आगे उसकी एक न चली। उसका सारा दर्प पल भर में धराशायी हो गया।

उसी क्षण, दानव स्तम्भित हो गया। उसकी सारी शक्ति, उसकी वाणी, उसका क्रोध, सब कुछ स्थिर हो गया था। यह बगलामुखी माता की वाक् स्तम्भन की शक्ति थी, जो न केवल दानव की वाणी को रोकती है, बल्कि उसकी चेतना को भी स्थिर कर देती है। यह एक अद्भुत और अद्वितीय शक्ति थी, जिससे धर्म की रक्षा और अन्याय का अंत संभव हो पाया। भक्तों को यह याद दिलाया गया कि माँ अपने भक्तों की रक्षार्थ किसी भी हद तक जा सकती है, और उनकी शक्ति हर संकट को दूर करने में सक्षम है। देवतागण जय-जयकार करने लगे, उनके मुख पर संतोष और कृतज्ञता के भाव थे।

भक्तों को वाक् सिद्धि का आशीर्वाद

दानव को परास्त करने के बाद, बगलामुखी माता ने अपने भक्तों की ओर देखा। उनके नेत्रों में करुणा और आशीर्वाद का भाव था। उन्होंने अपने भक्तों को वाक् सिद्धि का वरदान दिया, जिससे वे अपनी वाणी से सत्य का प्रचार कर सकें और अन्याय के खिलाफ आवाज उठा सकें। यह वरदान उन सभी भक्तों के लिए था जो माता की शरण में आते हैं और उनकी भक्ति में लीन रहते हैं। इस अद्भुत शक्ति की कथा आगे बढ़ेगी, जिससे हम जानेंगे कि कैसे माता अपने भक्तों की रक्षा करती हैं और उन्हें सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं।

अध्याय 2 का सार: इस अध्याय में हमने देखा कि कैसे बगलामुखी माता ने दानव की जिह्वा को खींचकर उसे स्तम्भित कर दिया, अपनी वाक् स्तम्भन की शक्ति से अन्याय का अंत किया और अपने भक्तों को वाक् सिद्धि का आशीर्वाद दिया। यह हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति और माँ की कृपा से वाणी में शक्ति आती है, जिससे हम सत्य का साथ दे सकते हैं और बुराई को परास्त कर सकते हैं।

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आज का पंचांग 1 अगस्त 2026

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