अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) क्या है
अधिक मास क्या है
अधिक मास एक अतिरिक्त चंद्र मास है जो हिंदू पंचांग में लगभग हर 32.5 महीने (करीब हर तीसरे वर्ष) जोड़ा जाता है। चंद्र वर्ष सौर वर्ष से लगभग 11 दिन छोटा होता है; इस अंतर को संतुलित करने के लिए यह मास आता है, ताकि पर्व अपनी ऋतु में बने रहें।
यह कैसे तय होता है
जिस चंद्र मास में सूर्य की कोई संक्रांति (एक राशि से दूसरी में प्रवेश) नहीं होती, वह अधिक मास कहलाता है। इसके विपरीत जिस मास में दो संक्रांति आ जाएँ, वह क्षय मास कहलाता है (बहुत दुर्लभ)।
नाम और महत्व
भगवान विष्णु ने इस उपेक्षित मास को स्वयं अपनाकर इसे "पुरुषोत्तम मास" नाम दिया। इसे मलमास भी कहते हैं। इस मास में जप, दान, तीर्थ यात्रा, भागवत श्रवण और विष्णु उपासना का विशेष फल माना जाता है।
किन कार्यों से बचें
अधिक मास में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण, नए वाहन या संपत्ति की खरीद और अन्य मांगलिक शुभ कार्य नहीं किए जाते। नित्य पूजा, व्रत और पहले से चल रहे कार्य जारी रखे जा सकते हैं।
⚠️ यह जानकारी पारंपरिक पंचांग गणना पर आधारित है और सामान्य मार्गदर्शन के लिए है। विवाह, गृह प्रवेश जैसे महत्वपूर्ण कार्यों के लिए योग्य पंडित या आचार्य से मुहूर्त की पुष्टि अवश्य करें। शहर के अनुसार सूर्योदय-सूर्यास्त बदलने से समय थोड़ा आगे-पीछे हो सकता है।