विक्रम संवत क्या है
परिचय
विक्रम संवत भारत की सबसे प्रचलित पारंपरिक कालगणना है। मान्यता है कि इसे उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य ने शकों पर विजय के उपलक्ष्य में 57 ईसा पूर्व में आरंभ किया। हिंदू पंचांग, पर्व-तिथियाँ और शुभ मुहूर्त इसी संवत के अनुसार गिने जाते हैं।
ग्रेगोरियन वर्ष से संबंध
विक्रम संवत ग्रेगोरियन वर्ष से लगभग 57 वर्ष आगे रहता है। उत्तर भारत में यह चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (गुड़ी पड़वा) को नए वर्ष के साथ बदलता है, जबकि गुजरात में कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा (दीपावली के अगले दिन) से।
शक संवत और कलियुग
शक संवत 78 ईस्वी में आरंभ हुआ और भारत का राष्ट्रीय कैलेंडर इसी पर आधारित है — यह ग्रेगोरियन से लगभग 78 वर्ष पीछे है। कलियुग संवत की गणना 3102 ईसा पूर्व से होती है, इसलिए यह ग्रेगोरियन वर्ष में लगभग 3101 जोड़कर मिलता है।
⚠️ यह जानकारी पारंपरिक पंचांग गणना पर आधारित है और सामान्य मार्गदर्शन के लिए है। विवाह, गृह प्रवेश जैसे महत्वपूर्ण कार्यों के लिए योग्य पंडित या आचार्य से मुहूर्त की पुष्टि अवश्य करें। शहर के अनुसार सूर्योदय-सूर्यास्त बदलने से समय थोड़ा आगे-पीछे हो सकता है।