शुभ मुहूर्त — कैसे चुना जाता है

किसी भी मांगलिक कार्य के लिए शुभ मुहूर्त पंचांग के पाँच अंगों — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण — के आधार पर निकाला जाता है। जब ये सभी अनुकूल हों और भद्रा तथा राहु काल से बचा जाए, वह समय शुभ माना जाता है।

शुभ मुहूर्त कैसे चुनें

पहले कार्य के लिए उपयुक्त तिथि और नक्षत्र देखें (हर कार्य के अपने शुभ नक्षत्र होते हैं)। फिर वार देखें, भद्रा (विष्टि करण) और राहु काल से बचें, और अंत में उस दिन का सटीक मुहूर्त समय (जैसे अभिजित) चुनें। विवाह के लिए वर-वधू की कुंडली मिलान भी आवश्यक है।

"मुहूर्त रहित" समय

चातुर्मास

देवशयनी एकादशी (आषाढ़ शुक्ल) से देवउठनी एकादशी (कार्तिक शुक्ल) तक — इन ~4 महीनों में विवाह, गृह प्रवेश जैसे बड़े मांगलिक कार्य नहीं किए जाते।

खरमास / मलमास

जब सूर्य धनु या मीन राशि में हो (साल में दो बार, लगभग एक-एक महीना), तब शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं।

गुरु / शुक्र तारा अस्त

जब बृहस्पति या शुक्र सूर्य के निकट होकर अस्त हो जाते हैं, तब विवाह और गृह प्रवेश टाले जाते हैं।

अधिक मास

जिस वर्ष अधिक (मल) मास आता है, उस अतिरिक्त महीने में मांगलिक कार्य नहीं होते।

⚠️ यह जानकारी पारंपरिक पंचांग गणना पर आधारित है और सामान्य मार्गदर्शन के लिए है। विवाह, गृह प्रवेश जैसे महत्वपूर्ण कार्यों के लिए योग्य पंडित या आचार्य से मुहूर्त की पुष्टि अवश्य करें। शहर के अनुसार सूर्योदय-सूर्यास्त बदलने से समय थोड़ा आगे-पीछे हो सकता है।