गीता उपदेश
11 सुविचार
कर्म करो, फल की चिंता मत करो — यही जीवन जीने की सच्ची कला है।
— श्रीमद्भगवद्गीता
जिस प्रकार दीपक अंधकार को दूर करता है, उसी प्रकार ज्ञान अज्ञान को दूर करता है।
— श्रीमद्भगवद्गीता
परिवर्तन ही संसार का शाश्वत नियम है, इसे स्वीकार करना ही बुद्धिमानी है।
— श्रीमद्भगवद्गीता
आत्मा न कभी जन्मती है न मरती है — यह शाश्वत और अविनाशी है।
— श्रीमद्भगवद्गीता
जो हो रहा है अच्छा हो रहा है, जो होगा वो भी अच्छा ही होगा — इस विश्वास में ही शांति है।
— श्रीमद्भगवद्गीता
जो मनुष्य निष्काम भाव से कर्म करता है, वही वास्तव में योगी कहलाता है।
— श्रीमद्भगवद्गीता
सुख-दुख धूप-छाँव के समान हैं, दोनों में समभाव रखो।
— श्रीमद्भगवद्गीता
श्रद्धा और विश्वास से किया गया छोटा-सा कर्म भी महान फल देता है।
— श्रीमद्भगवद्गीता
जो हर प्राणी में ईश्वर देखता है, वही सच्चा भक्त है।
— श्रीमद्भगवद्गीता
जो निःस्वार्थ भाव से सेवा करता है, वह ईश्वर के सबसे निकट होता है।
— श्रीमद्भगवद्गीता
जीवन में संतुलन ही सच्ची सफलता की कुंजी है।
— श्रीमद्भगवद्गीता