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Vaishnav Jan To Tene Kahiye | वैष्णव जन तो तेने कहिये – बोल, अर्थ और महत्व

Tilak Kathayein11 Apr 2026171 views📖 1 min read
वैष्णव जन तो तेने कहिये – Vaishnav Jan To Tene Kahiye
वैष्णव जन तो तेने कहिये – सम्पूर्ण भजन बोल, हिंदी अर्थ और विष्णु की महिमा। भक्ति संगीत।

वैष्णव जन तो तेने कहिये – परिचय

वैष्णव जन तो तेने कहिये एक प्रसिद्ध भक्ति भजन है जो भगवान विष्णु के सच्चे भक्त के गुणों का वर्णन करता है। यह भजन नरसिंह मेहता द्वारा लिखा गया था, जो 15वीं शताब्दी के एक गुजराती कवि और संत थे। यह भजन सदियों से लोकप्रिय रहा है और महात्मा गांधी के पसंदीदा भजनों में से एक था।

हिंदी भक्ति संगीत में इस भजन का स्थान बहुत ऊंचा है। यह भजन भारत और विदेशों में व्यापक रूप से गाया जाता है और इसे भगवान विष्णु की स्तुति में सबसे महत्वपूर्ण भजनों में से एक माना जाता है। इसकी लोकप्रियता समय के साथ बढ़ती ही जा रही है, और यह आज भी भक्तों के दिलों में बसा हुआ है।

वैष्णव जन तो तेने कहिये के बोल (Lyrics)

वैष्णव जन तो तेने कहिये, जे पीर पराई जाणे रे।
पर दुःखे उपकार करे तोये, मन अभिमान न आणे रे।।
सकल लोकमां सहुने वंदे, निंदा न करे केनी रे।
वाच काछ मन निश्चल राखे, धन धन जननी तेनी रे।।
समदृष्टि ने तृष्णा त्यागी, पर स्त्री जेने माता रे।
जिह्वा थकी असत्य न बोले, पर धन नव झाले हाथ रे।।
मोह माया व्यापे नहि जेने, दृढ़ वैराग्य जेना मनमां रे।
राम नाम शुं ताली लागी, सकल तीरथ तेना तनमां रे।।
वण लोभी ने कपटरहित छे, काम क्रोध निवार्या रे।
भणे नरसैयो तेनुं दर्शन करतां, कुळ एकोतेर तार्या रे।।

भजन का अर्थ

मुखड़े का अर्थ है कि वैष्णव (विष्णु का भक्त) वह है जो दूसरों के दर्द को समझता है। वह दूसरों के दुखों को दूर करने के लिए उपकार करता है, लेकिन कभी भी अभिमान नहीं करता। भावार्थ यह है कि सच्चा भक्त हमेशा दूसरों के प्रति सहानुभूति रखता है और उनकी मदद करने के लिए तैयार रहता है, बिना किसी अहंकार के।

पहले अंतरे का भावार्थ यह है कि वैष्णव सभी लोगों का सम्मान करता है और किसी की निंदा नहीं करता। वह अपने वचन, कर्म और मन को स्थिर रखता है। ऐसे भक्त की माता धन्य है। यह विष्णु के सर्वव्यापी और समदर्शी होने का वर्णन करता है।

भजन का समग्र संदेश यह है कि एक सच्चा भक्त दूसरों के प्रति करुणा, विनम्रता और निस्वार्थ सेवा का प्रतीक होता है। भक्त इस भजन के माध्यम से भगवान विष्णु के गुणों को आत्मसात करने और एक बेहतर इंसान बनने की प्रेरणा प्राप्त करता है।

भजन का इतिहास

वैष्णव जन तो तेने कहिये 15वीं शताब्दी में नरसिंह मेहता द्वारा लिखा गया था। नरसिंह मेहता एक महान कवि और संत थे जिन्होंने अपना जीवन भगवान कृष्ण की भक्ति में समर्पित कर दिया था। वे वैष्णव भक्ति परंपरा के अनुयायी थे।

यह भजन मंदिरों में, त्योहारों पर और विशेष पूजा में गाया जाता है। इसे प्रार्थना सभाओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी गाया जाता है। यह भजन भगवान विष्णु के प्रति प्रेम और भक्ति व्यक्त करने का एक शक्तिशाली माध्यम है।

भजन के लाभ

  • आध्यात्मिक लाभ – यह भजन भगवान विष्णु से जुड़ने में मदद करता है और आध्यात्मिक उन्नति की ओर ले जाता है। यह मन को शांत करता है और भक्ति भाव को बढ़ाता है।
  • मानसिक लाभ – इस भजन को सुनने और गाने से शांति और सकारात्मकता का अनुभव होता है। यह तनाव और चिंता को कम करने में मदद करता है।
  • भक्ति का विकास – नियमित रूप से इस भजन का गायन करने से भक्ति में वृद्धि होती है और भगवान के प्रति प्रेम और समर्पण बढ़ता है। यह हृदय को शुद्ध करता है और आध्यात्मिक जागृति लाता है।

निष्कर्ष

वैष्णव जन तो तेने कहिये भगवान विष्णु के लिए सबसे महान भक्ति रचनाओं में से एक है। इसकी संगीतमय सुंदरता, यह जो भावनाएं जगाता है, और जिस तरह से यह भक्तों को जोड़ता है, वह अद्वितीय है। पीढ़ियों से भक्तों ने इसे प्यार किया है क्योंकि यह करुणा, विनम्रता और निस्वार्थ सेवा के मूल्यों को बढ़ावा देता है।

भक्तों के लिए प्रेरणादायक संदेश है कि वे इस भजन को प्रतिदिन प्रेम से गाएं। जय विष्णु!

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