आरती

Tulsi Mata Ki Aarti | तुलसी माता की आरती – बोल, विधि और महत्व

Tilak Kathayein12 Apr 2026112 views📖 1 min read
तुलसी माता की आरती – Tulsi Mata Ki Aarti
तुलसी माता की आरती – सम्पूर्ण आरती बोल, अर्थ और आरती करने की विधि। तुलसी माता की आरती हिंदी में।

तुलसी माता की आरती – परिचय

तुलसी माता की आरती एक भक्तिपूर्ण स्तुति है जो तुलसी के पौधे की पूजा में गाई जाती है, जिसे हिंदू धर्म में पवित्र माना जाता है। यह आरती विष्णु भगवान और अन्य देवताओं की आराधना में भी महत्वपूर्ण है। इसे आमतौर पर सुबह और शाम की पूजा के दौरान गाया जाता है। इस आरती की रचना कई भक्तों और संतों द्वारा की गई है, जो तुलसी माता के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं।

हिंदू पूजा पद्धति में आरती एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है, जो प्रकाश के माध्यम से श्रद्धा और समर्पण व्यक्त करने का एक तरीका है। तुलसी माता की आरती विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह पौधा पवित्रता, समृद्धि और कल्याण का प्रतीक है। यह आरती तुलसी माता के दिव्य गुणों का गुणगान करती है और भक्तों को आशीर्वाद प्राप्त करने में मदद करती है।

तुलसी माता की आरती के बोल

जय तुलसी माता, मैया जय तुलसी माता।
सब जग की माता, ओ मैया जय तुलसी माता।।

तुम्ह बिन सुख सम्पति, कौन ग्रहता।
तुम्ह बिन सुख सम्पति, कौन ग्रहता।
रोता है वह जो, छोड़ता है तुमको।
ओ मैया जय तुलसी माता।।

हरि ने अपने शीश, पर धारण किन्हा।
हरि ने अपने शीश, पर धारण किन्हा।
महिमा अगम है, नाम है तेरा।
ओ मैया जय तुलसी माता।।

कहाँ से आएं तुलसी, कहाँ तुम जाई हो।
कहाँ से आएं तुलसी, कहाँ तुम जाई हो।
बन के वृंदावन, गोकुल आई हो।
ओ मैया जय तुलसी माता।।

लाए तुलसी दल, राम कृष्ण पाए।
लाए तुलसी दल, राम कृष्ण पाए।
प्रेम से पावन, चरणन छुएं।
ओ मैया जय तुलसी माता।।

सब रोग मिटाओ, कष्ट निवारो।
सब रोग मिटाओ, कष्ट निवारो।
प्रेम से अर्पण, जीवन वारो।
ओ मैया जय तुलसी माता।।

जय तुलसी माता, मैया जय तुलसी माता।
सब जग की माता, ओ मैया जय तुलसी माता।।

आरती का अर्थ

पहले अंतरे का शब्दार्थ यह है कि तुलसी माता की जय हो, वे पूरे संसार की माता हैं। इसका भावार्थ यह है कि तुलसी माता सभी के लिए कल्याणकारी हैं और उनकी कृपा से ही सुख और समृद्धि प्राप्त होती है। यह तुलसी माता के वात्सल्य और सर्वव्यापीता का वर्णन करता है।

आरती का मुख्य भाव यह है कि भक्त तुलसी माता से कृपा, सुख, शांति और समृद्धि की कामना कर रहा है। वह तुलसी माता की महिमा का गुणगान करता है और उनसे अपने कष्टों को दूर करने की प्रार्थना करता है। आरती तुलसी माता के प्रति पूर्ण समर्पण और श्रद्धा का प्रतीक है।

आरती करने की विधि

आरती की थाली में दीपक (घी या तेल का), कपूर, फूल, धूप और कुछ चावल के दाने रखें। दीपक को जलाएं और थाली को सजाएं। कुछ लोग थाली में जल से भरा एक छोटा कलश भी रखते हैं।

आरती को तुलसी माता की मूर्ति या पौधे के सामने घड़ी की दिशा में घुमाएं। आमतौर पर, आरती को चार बार चरणों पर, दो बार नाभि पर और एक बार चेहरे पर घुमाया जाता है। आरती करते समय, तुलसी माता के नाम का जाप करें या आरती के बोल गाएं।

तुलसी माता की आरती आमतौर पर सुबह (मंगला आरती) और शाम (संध्या आरती) के समय की जाती है। कुछ लोग इसे शयन आरती के समय भी करते हैं, जो सोने से पहले की जाती है। प्रत्येक आरती का अपना महत्व है और यह दिन के एक विशेष समय में तुलसी माता के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का एक तरीका है।

आरती के लाभ

  • तुलसी माता की कृपा – तुलसी माता की आरती करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है, जिससे जीवन में सुख और समृद्धि आती है। यह आरती तुलसी माता के साथ एक गहरा संबंध स्थापित करने में मदद करती है।
  • घर में सुख-शांति – नियमित रूप से तुलसी माता की आरती करने से घर का वातावरण शुद्ध और सकारात्मक होता है, जिससे परिवार में सुख और शांति बनी रहती है। यह नकारात्मक ऊर्जा को दूर करती है।
  • मनोकामना पूर्ति – तुलसी माता की आरती सच्चे मन से करने पर भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और उन्हें जीवन में सफलता मिलती है। यह आरती भक्तों को अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करती है।

निष्कर्ष

तुलसी माता की आरती का दिव्य महत्व है, जो लाखों लोगों द्वारा प्रिय है। इसकी पवित्र उत्पत्ति और तुलसी माता की पूजा की परंपरा में इसकी विशिष्टता इसे विशेष बनाती है। यह आरती न केवल एक स्तुति है, बल्कि यह भक्तों और तुलसी माता के बीच एक अटूट बंधन का प्रतीक है।

सभी भक्तों को प्रेरित किया जाता है कि वे इस आरती को पूर्ण भक्ति के साथ प्रतिदिन गाएं। यह निश्चित रूप से आपके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाएगी। जय तुलसी माता!

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