अन्य कथाएँ

रविवार का महत्व और सूर्य देव की पूजा

Tilak Kathayein06 Jan 2025297 views
Suryadev Vrat Katha: सूर्य देव की व्रत कथा
रविवार का दिन सूर्य देव को समर्पित है। मान्यता है कि अगर रविवार के दिन सूर्य देव की श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना की जाए तो मनुष्य के जीवन में सुख-समृद्धि और धन-संपत्ति…

रविवार का दिन सूर्य देव को समर्पित है। मान्यता है कि अगर रविवार के दिन सूर्य देव की श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना की जाए तो मनुष्य के जीवन में सुख-समृद्धि और धन-संपत्ति की कमी नहीं रहती है। साथ ही शत्रुओं से सुरक्षा भी होती है। सूर्य देव का व्रत करने के साथ-साथ अगर आप इनकी व्रत कथा सुनते हैं तो आपकी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं। तो चलिए पढ़ते हैं सूर्य देव की व्रत कथा।

प्राचीन काल की बात है। एक बुढ़िया थी जो नियमित तौर पर रविवार के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर नित्यकर्मों से निवृत्त होकर अपने आंगन को गोबर से लीपती थी जिससे वो स्वच्छ हो सके। इसके बाद वो सूर्य देव की पूजा-अर्चना करती थी। साथ ही रविवार की व्रत कथा भी सुनती थी। इस दिन वो एक समय भोजन करती थी और उससे पहले सूर्य देव को भोग भी लगाती थी। सूर्य देव उस बुढ़िया से बेहद प्रसन्न थे। यही कारण था कि उसे किसी भी तरह का कष्ट नहीं था और वो धन-धान्य से परिपूर्ण थी।

जब उसकी पड़ोसन ने देखा की वो बहुत सुखी है तो वो उससे जलने लगी। बढ़िया के घर में गाय नहीं थी इसलिए वो अपनी पड़ोसन के आंगन गोबर लाती थी। क्योंकि उसके यहां गाय बंधी रहती थी। पड़ोसन ने बुढ़िया को परेशान करने के लिए कुछ सोचकर गाय को घर के अंदर बांध दिया। अगले रविवार बुढ़िया को आंगन लीपने के लिए बुढ़िया को गोबर नहीं मिला। इसी के चलते उसने सूर्य देवता को भोग भी नहीं लगाया। साथ ही खुद भी भोजन नहीं किया और पूरे दिन भूखी-प्यासी रही और फिर सो गई।

अगले दिन जब वो सोकर उठी को उसने देखा की उसके आंगन में एक सुंदर गाय और एक बछड़ा बंधा था। बुढ़िया गाय को देखकर हैरान रह गई। उसने गाय को चारा खिलाया। वहीं, उसकी पड़ोसन बुढ़िया के आंगन में बंधी सुंदर गाय और बछड़े को देखकर और ज्यादा जलने की। तो वह उससे और अधिक जलने लगी। पड़ोसन ने उसकी गायब के पास सोने का गोबर पड़ा देखा तो उसने गोबर को वहां से उठाकर अपनी गाय के गोबर के पास रख दिया।

सोने के गोबर से पड़ोसन कुछ ही दिन में धनवान हो गई। ये कई दिन तक चलता रहा। कई दिनों तक बुढ़िया को सोने के गोबर के बारे में कुछ पता नहीं था। ऐसे में बुढ़िया पहले की ही तरह सूर्यदेव का व्रत करती रही। साथ ही कथा भी सुनती रही। इसके बाद जिस दिन सूर्यदेव को पड़ोसन की चालाकी का पता चला। तब उन्होंने तेज आंधी चला दी। तेज आंधी को देखकर बुढ़िया ने अपनी गाय को अंदर बांध दिया। अगले दिन जब बुढ़िया उठी तो उसने सोने का गोबर देखा। तब उसे बेहद आश्चर्य हुआ।

तब से लेकर आगे तक उसने गाय को घर के अंदर ही बांधा। कुछ दिन में ही बुढ़िया बहुत धनी हो गई। बुढ़िया की सुखी और धनी स्थिति देख पड़ोसन और जलने लगी। पड़ोसने उसने अपने पति को समझा-बुझाकर उसे नगर के राजा के पास भेजा। जब राजा ने उस सुंदर गाय को देखा तो वो बहुत खुश हुआ। सोने के गोबर को देखकर तो उसकी खुशी का ठिकाना न रहउसे नगर के राजा के पास भेज दिया। सुंदर गाय को देखकर राजा बहुत खुश हुआ। सुबह जब राजा ने सोने का गोबर देखा तो उसके आश्चर्य का ठिकाना न रहा।

वहीं, बुढ़िया भूखी-प्यासी रहकर सूर्य भगवान से प्रार्थना कर रही थी। सूर्यदेव को उस पर करुणा आई। उसी रात सूर्यदेव राजा के सपने में आए और उससे कहा कि हे राजन, बुढ़िया की गाय व बछड़ा तुरंत वापस कर दो। अगर ऐसा नहीं किया तो तुम पर परेशानियों का पहाड़ टूट पड़ेगा। सूर्यदेव के सपने ने राजा को बुरी तरह डरा दिया। इसके बाद राजा ने बुढ़िया को गाय और बछड़ा लौटा दिया।

राजा ने बुढ़िया को ढेर सारा धन दिया और क्षमा मांगी। वहीं, राजा ने पड़ोसन और उसके पति को सजा भी दी। इसके बाद राजा ने पूरे राज्य में घोषणा कराई की रविवार को हर कोई व्रत किया करे। सूर्यदेव का व्रत करने से व्यक्ति धन-धान्य से परिपूर्ण हो जाता है। साथ ही घर में खुशहाली भी आती है।  

🕉

आज का पंचांग 9 सितम्बर 2026

शुभ मुहूर्त, चोघड़िया, राशिफल और ग्रह स्थिति की पूरी जानकारी के लिए

शेयर करें:

संबंधित लेख

bhagwan-shiv-ke-12-jyotirlingon-ka-mahatva
अन्य कथाएँ

12 ज्योतिर्लिंग कौन-कौन से हैं? भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों का महत्व और कथा

हिंदू धर्म में भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण तीर्थस्थल माने जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन स्थानों पर भगवान शिव स्वयं ज्योतिर्लिंग स्वरूप में विराजमान हैं। सोमनाथ से लेकर रामेश्वरम तक प्रत्येक ज्योतिर्लिंग की अपनी अनोखी पौराणिक कथा, धार्मिक मान्यता और आध्यात्मिक विशेषता है। इस लेख में जानें 12 ज्योतिर्लिंगों के नाम, स्थान, पौराणिक कथाएं, धार्मिक महत्व और इनके दर्शन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी।

18 Aug 202683
धृष्टद्युम्न का जीवन परिचय: जन्म, द्रोणाचार्य वध, महाभारत युद्ध में भूमिका, मृत्यु और रोचक तथ्य
अन्य कथाएँ

धृष्टद्युम्न का जीवन परिचय: जन्म, द्रोणाचार्य वध, महाभारत युद्ध में भूमिका, मृत्यु और रोचक तथ्य

धृष्टद्युम्न महाभारत के महान योद्धा, पांचाल नरेश द्रुपद के पुत्र और पांडव सेना के सेनापति थे। इस लेख में उनके दिव्य जन्म, द्रोणाचार्य वध, महाभारत युद्ध में योगदान, मृत्यु, परिवार और उनसे मिलने वाली प्रेरणादायक शिक्षाओं का विस्तृत वर्णन पढ़ें।

01 Aug 202698
आचार्य द्रोणाचार्य का जीवन परिचय: जन्म, शिक्षा, अस्त्र-शस्त्र विद्या, महाभारत में भूमिका, मृत्यु और रोचक तथ्य
अन्य कथाएँ

आचार्य द्रोणाचार्य का जीवन परिचय: जन्म, शिक्षा, अस्त्र-शस्त्र विद्या, महाभारत में भूमिका, मृत्यु और रोचक तथ्य

आचार्य द्रोणाचार्य महाभारत के महान गुरु और अद्वितीय धनुर्विद्या आचार्य थे। इस लेख में उनके जन्म, शिक्षा, पांडव-कौरव के गुरु बनने की कथा, द्रुपद से शत्रुता, महाभारत युद्ध में योगदान, मृत्यु और जीवन से मिलने वाली शिक्षाओं का विस्तृत वर्णन पढ़ें।

31 Jul 2026129
नाग पंचमी कथा – Nag Panchami Katha
अन्य कथाएँ

नाग पंचमी कथा

प्राचीन काल में एक सेठजी के सात पुत्र थे। सातों के विवाह हो चुके थे। सबसे छोटे पुत्र की पत्नी श्रेष्ठ चरित्र की विदूषी और सुशील थी, परंतु उसके भाई…

23 Dec 2024162
वट सावित्री व्रत कथा – Vat Savitri Vrat Katha
अन्य कथाएँ

वट सावित्री व्रत कथा

वट सावित्री व्रत कथा – वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ मास की अमावस्या के साथ आज मनाया जा रहा है। आज सुहागिन महिलाएं व्रत रखने के साथ…

22 Dec 2024242