आरती

Shani Dev Ki Aarti | शनि देव की आरती – बोल, विधि और महत्व

Tilak Kathayein12 Apr 2026148 views📖 1 min read
शनि देव की आरती – Shani Dev Ki Aarti
शनि देव की आरती – सम्पूर्ण आरती बोल, अर्थ और आरती करने की विधि। शनि की आरती हिंदी में।

शनि देव की आरती – परिचय

शनि देव की आरती भगवान शनि को समर्पित एक भक्तिमय स्तुति है। यह भगवान शनि को प्रसन्न करने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए गाई जाती है। शनि देव की आरती आमतौर पर शनिवार के दिन या शनि देव की पूजा के दौरान गाई जाती है। माना जाता है कि इस आरती की रचना प्राचीन ऋषियों ने की थी, जो शनि देव की महिमा और शक्ति से अवगत थे।

हिंदू पूजा पद्धति में आरती का विशेष महत्व है। यह एक प्रतीकात्मक क्रिया है जिसमें भक्त भगवान को प्रकाश और धूप अर्पित करते हैं, जो ज्ञान और भक्ति का प्रतीक है। शनि देव की आरती, विशेष रूप से, शनि के प्रकोप से बचाने और जीवन में स्थिरता लाने के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।

शनि देव की आरती के बोल

जय जय जय शनि देव महाराज,
करहुं नाथ मम संकट निवारण।
रवि नंदन, दुख भंजन देवा,
करहुं कृपा मम ऊपर देवा।
जय जय जय शनि देव महाराज...

श्याम अंग, वसन श्याम धारे,
नील मणि की माला धारे।
मस्तक मुकुट, शीश छत्र धारे,
करहुं कृपा मम ऊपर देवा।
जय जय जय शनि देव महाराज...

लोह पाद, कर में त्रिशूल धारे,
कंटक रूप, भयदायक भारी।
देवन, नर मुनि सब थर थर कांपे,
करहुं कृपा मम ऊपर देवा।
जय जय जय शनि देव महाराज...

तेल, उड़द, तिल, धूप चढ़ाऊं,
प्रेम सहित मैं आरती गाऊं।
जो कोई ध्यावे, प्रेम से नित गावे,
करहुं कृपा मम ऊपर देवा।
जय जय जय शनि देव महाराज...

शनि चालीसा, शनि स्तोत्र पाठ करे,
शनि देव की कृपा से दुख दूर करे।
मनवांछित फल पावे, सुख शांति आवे,
करहुं कृपा मम ऊपर देवा।
जय जय जय शनि देव महाराज...

आरती का अर्थ

पहले अंतरे में, भक्त भगवान शनि देव की स्तुति करते हुए उन्हें संकटों का निवारण करने वाला बताते हैं। 'रवि नंदन' कहकर उन्हें सूर्य देव का पुत्र बताया गया है और उनसे कृपा करने की प्रार्थना की गई है। यह शनि देव की शक्ति और उनके दयालु स्वभाव को दर्शाता है।

आरती का मुख्य भाव शनि देव की महिमा का वर्णन करना और उनसे आशीर्वाद की प्रार्थना करना है। भक्त शनि देव से अपने जीवन में सुख-शांति और समृद्धि लाने की कामना करते हैं और उनके प्रकोप से सुरक्षा की प्रार्थना करते हैं। यह आरती भक्ति और समर्पण का प्रतीक है।

आरती करने की विधि

आरती की थाली में दीपक, कपूर, घी, फूल, धूप, अक्षत (चावल), कुमकुम और चंदन रखें। कुछ लोग थाली में फल और मिठाई भी रखते हैं।

आरती घुमाने का सही तरीका यह है कि पहले भगवान के चरणों में चार बार, फिर नाभि के पास दो बार और अंत में मुख के सामने एक बार घुमाएं। आरती करते समय "जय शनि देव" या शनि देव के किसी भी मंत्र का जाप करें।

शनि देव की आरती संध्या आरती के समय करना सबसे उपयुक्त माना जाता है। सूर्यास्त के बाद का समय शनि देव की पूजा के लिए विशेष रूप से शुभ होता है।

आरती के लाभ

  • शनि की कृपा – शनि देव की आरती करने से शनि देव प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों पर कृपा बरसाते हैं। इससे जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।
  • घर में सुख-शांति – नियमित रूप से शनि देव की आरती करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और सुख-शांति बनी रहती है। नकारात्मकता दूर होती है।
  • मनोकामना पूर्ति – जो भक्त श्रद्धा और भक्ति भाव से शनि देव की आरती करते हैं, उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और उन्हें जीवन में सफलता मिलती है।

निष्कर्ष

शनि देव की आरती का दिव्य महत्व है। यह करोड़ों भक्तों द्वारा प्रिय है, जिसकी पवित्र उत्पत्ति है, और शनि पूजा की परंपरा में यह विशेष स्थान रखती है क्योंकि यह भक्तों को शनि के प्रकोप से बचाने और उन्हें आशीर्वाद प्रदान करने का एक शक्तिशाली माध्यम है। यह शनि देव के प्रति प्रेम और भक्ति का एक अद्भुत प्रमाण है।

भक्तों को प्रेरित किया जाता है कि वे इस आरती को पूरी श्रद्धा के साथ प्रतिदिन गाएं। यह निश्चित रूप से उनके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाएगी। जय शनि!

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