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Omkareshwar Mandir | ओंकारेश्वर मंदिर 2026 – दर्शन समय, इतिहास, कैसे पहुंचें | संपूर्ण जानकारी

Tilak Kathayein02 Apr 2026393 views📖 1 min read
ओंकारेश्वर मंदिर - Khandwa, Madhya Pradesh
ओंकारेश्वर मंदिर, मध्य प्रदेश 2026: आरती समय, दर्शन समय, प्रवेश शुल्क, कैसे पहुंचें, इतिहास और यात्रा गाइड। सम्पूर्ण जानकारी हिंदी में।

ओंकारेश्वर मंदिर – परिचय

ओंकारेश्वर मंदिर मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में स्थित एक प्रमुख हिंदू तीर्थ स्थल है। यह पवित्र नर्मदा नदी के किनारे ओंकार पर्वत पर स्थित है, जिसके कारण इसका नाम ओंकारेश्वर पड़ा। यह मंदिर भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है, जो इसे देश भर के श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बनाता है। अपनी प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक वातावरण के कारण यह मंदिर भक्तों को आकर्षित करता है।

ओंकारेश्वर मंदिर में दर्शन करने से भक्तों को मोक्ष और शांति की प्राप्ति होती है, ऐसी मान्यता है। यहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु भगवान ओंकारेश्वर के दर्शन के लिए आते हैं, विशेषकर सावन के महीने में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। नर्मदा नदी में स्नान और भगवान ओंकारेश्वर के दर्शन एक अद्वितीय आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करते हैं, जिससे भक्तों का मन शांत और प्रसन्न होता है।

इस मंदिर की अनूठी विशेषता यह है कि यह ओंकार पर्वत पर 'ॐ' के आकार में बना हुआ है, जो इसे भारत के अन्य मंदिरों से अलग करता है। नर्मदा नदी इस पर्वत के चारों ओर बहती है, जिससे मंदिर का दृश्य और भी मनोरम हो जाता है। इसके अतिरिक्त, यहां ममलेश्वर मंदिर भी स्थित है, जिसे ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग का ही एक भाग माना जाता है।

इतिहास और पौराणिक कथा

ओंकारेश्वर मंदिर का उल्लेख स्कंद पुराण और शिव पुराण जैसे प्राचीन ग्रंथों में मिलता है, जिससे इसकी प्राचीनता का पता चलता है। माना जाता है कि यह मंदिर कई सदियों पुराना है और प्राचीन काल से ही यह ऋषि-मुनियों और तपस्वियों के लिए एक महत्वपूर्ण स्थान रहा है। विभिन्न ऐतिहासिक अभिलेखों में भी इस मंदिर का उल्लेख मिलता है, जिससे इसकी ऐतिहासिक महत्ता सिद्ध होती है।

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार देवताओं और दानवों के बीच युद्ध हुआ, जिसमें देवताओं की हार हुई। तब देवताओं ने भगवान शिव की आराधना की, जिससे प्रसन्न होकर भगवान शिव ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए और देवताओं को दानवों पर विजय प्राप्त करने में मदद की। इस कथा से ओंकारेश्वर मंदिर की महिमा और भी बढ़ जाती है, और भक्त यहां आकर भगवान शिव की कृपा प्राप्त करते हैं।

मध्यकालीन इतिहास में, इस मंदिर का कई बार पुनर्निर्माण हुआ। इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने इस मंदिर के जीर्णोद्धार में महत्वपूर्ण योगदान दिया, जिससे मंदिर को वर्तमान स्वरूप प्राप्त हुआ। मराठा शासनकाल में भी इस मंदिर का विकास हुआ और इसे धार्मिक गतिविधियों का केंद्र बनाया गया।

मंदिर की वास्तुकला

ओंकारेश्वर मंदिर नागर शैली में बना हुआ है, जो उत्तर भारतीय मंदिरों की प्रमुख वास्तुशैली है। मंदिर का शिखर काफी ऊंचा है और इसकी वास्तुकला अत्यंत सुंदर और आकर्षक है। मंदिर के निर्माण में पत्थर और अन्य प्राकृतिक सामग्रियों का उपयोग किया गया है, जो इसे एक प्राचीन और भव्य रूप प्रदान करते हैं। मंदिर का क्षेत्रफल लगभग वर्ग फीट है।

गर्भगृह में भगवान ओंकारेश्वर का शिवलिंग स्थापित है, जो स्वयंभू माना जाता है। सभामंडप में सुंदर नक्काशी की गई है, जो मंदिर की कलात्मकता को दर्शाती है। द्वार पर विभिन्न देवी-देवताओं की मूर्तियां स्थापित हैं, जो मंदिर के प्रवेश को और भी आकर्षक बनाती हैं। शिवलिंग के ऊपर चांदी का छत्र है, जो इसकी शोभा बढ़ाता है।

ओंकारेश्वर मंदिर परिसर में कई अन्य छोटे मंदिर और कुंड भी स्थित हैं। यहां एक प्राचीन कुंड है, जिसे अमृत कुंड कहा जाता है। मंदिर में कई शिलालेख भी हैं, जो इसके इतिहास और महत्व को दर्शाते हैं। मंदिर परिसर में एक धर्मशाला भी है, जो तीर्थयात्रियों के लिए आवास की सुविधा प्रदान करती है।

दर्शन और आरती का समय

ओंकारेश्वर मंदिर के द्वार सुबह 5:00 बजे खुलते हैं और रात्रि 10:00 बजे बंद हो जाते हैं। इस दौरान भक्त भगवान ओंकारेश्वर के दर्शन कर सकते हैं और अपनी मनोकामनाएं पूर्ण कर सकते हैं। मंदिर में प्रवेश निःशुल्क है, लेकिन विशेष पूजा और अभिषेक के लिए शुल्क देना होता है।

आरती / सेवासमयविशेषता
मंगला आरतीप्रातः 5:00 बजेदिन की पहली आरती, जिसमें भगवान को जगाया जाता है।
अभिषेक/पूजाप्रातः 6:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तकशिवलिंग का जलाभिषेक और विशेष पूजा।
भोग आरतीदोपहर 12:15 बजेभगवान को दोपहर का भोजन अर्पित किया जाता है।
संध्या आरतीसायं 7:30 बजेशाम की आरती, जिसमें दीपक और मंत्रों से भगवान की आराधना की जाती है।
शयन आरतीरात्रि 9:30 बजेदिन की अंतिम आरती, जिसमें भगवान को शयन के लिए तैयार किया जाता है।

ओंकारेश्वर मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले भक्तों को शालीन और सभ्य कपड़े पहनने चाहिए। मंदिर परिसर में फोटोग्राफी की अनुमति नहीं है, इसलिए इसका ध्यान रखें। मोबाइल फोन को साइलेंट मोड पर रखें और जूते-चप्पल मंदिर के बाहर उतार दें।

कैसे पहुँचें

🚗 सड़क मार्ग

ओंकारेश्वर मंदिर खंडवा से लगभग 70 किलोमीटर दूर स्थित है। इंदौर से ओंकारेश्वर की दूरी लगभग 80 किलोमीटर है। यह मंदिर राष्ट्रीय राजमार्ग NH52 से जुड़ा हुआ है। खंडवा और इंदौर से ओंकारेश्वर के लिए नियमित बसें और टैक्सी सेवाएं उपलब्ध हैं।

🚂 रेल मार्ग

ओंकारेश्वर का निकटतम रेलवे स्टेशन ओंकारेश्वर रोड है, जो मंदिर से लगभग 12 किलोमीटर दूर स्थित है। रेलवे स्टेशन से मंदिर तक पहुंचने के लिए रिक्शा और टैक्सी आसानी से मिल जाते हैं, जिनमें लगभग 20-30 मिनट लगते हैं। कई प्रमुख ट्रेनें ओंकारेश्वर रोड स्टेशन पर रुकती हैं।

✈️ वायु मार्ग

ओंकारेश्वर मंदिर का निकटतम हवाई अड्डा इंदौर का देवी अहिल्याबाई होल्कर हवाई अड्डा है, जो मंदिर से लगभग 90 किलोमीटर दूर स्थित है। हवाई अड्डे से ओंकारेश्वर तक पहुंचने के लिए टैक्सी सेवाएं उपलब्ध हैं, जिनमें लगभग 2-3 घंटे लगते हैं।

प्रमुख त्योहार और उत्सव

  • महाशिवरात्रि – – महाशिवरात्रि ओंकारेश्वर मंदिर का सबसे बड़ा त्योहार है, जिसमें लाखों श्रद्धालु भाग लेते हैं। इस दिन भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है और भव्य शोभायात्रा निकाली जाती है।
  • सावन सोमवार – – सावन के महीने में हर सोमवार को यहां विशेष पूजा-अनुष्ठान किए जाते हैं। इस दौरान भक्त नर्मदा नदी में स्नान करते हैं और भगवान ओंकारेश्वर का जलाभिषेक करते हैं।
  • नर्मदा जयंती – – नर्मदा जयंती पर नर्मदा नदी की विशेष पूजा की जाती है और भव्य आरती का आयोजन किया जाता है। इस दिन मंदिर में उत्सव का माहौल रहता है और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

ओंकारेश्वर मंदिर में कार्तिक पूर्णिमा पर विशाल मेला लगता है, जिसमें दूर-दूर से व्यापारी और श्रद्धालु आते हैं। इस मेले में विभिन्न प्रकार की दुकानें और मनोरंजन के साधन उपलब्ध होते हैं। कार्तिक पूर्णिमा का यह मेला धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

ओंकारेश्वर मंदिर के दर्शन का समय क्या है?

मंगला आरती सुबह 5:00 बजे होती है और शयन आरती रात्रि 9:30 बजे होती है। भक्त इस दौरान भगवान ओंकारेश्वर के दर्शन कर सकते हैं।

ओंकारेश्वर मंदिर कहाँ स्थित है?

ओंकारेश्वर मंदिर मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में स्थित है। यह नर्मदा नदी के किनारे ओंकार पर्वत पर स्थित है। खंडवा से मंदिर की दूरी लगभग 70 किलोमीटर है।

ओंकारेश्वर मंदिर जाने का सबसे अच्छा समय कौन सा है?

ओंकारेश्वर मंदिर जाने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च तक है, जब मौसम सुहावना होता है। महाशिवरात्रि और सावन के महीने में भी यहां जाना विशेष फलदायी होता है। इन महीनों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।

ओंकारेश्वर मंदिर में प्रवेश शुल्क कितना है?

ओंकारेश्वर मंदिर में प्रवेश निःशुल्क है। हालांकि, विशेष पूजा और अभिषेक के लिए शुल्क देना होता है। VIP दर्शन की कोई विशेष व्यवस्था नहीं है, सभी भक्त समान रूप से दर्शन कर सकते हैं।

निष्कर्ष

ओंकारेश्वर मंदिर प्रत्येक हिंदू के लिए एक अनिवार्य तीर्थस्थल है, क्योंकि यह भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इस मंदिर का अद्वितीय दिव्य महत्व है और यहां भगवान ओंकारेश्वर के दर्शन से भक्तों को आध्यात्मिक शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। नर्मदा नदी के किनारे स्थित यह मंदिर अपनी प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक वातावरण के कारण अन्य मंदिरों से अलग है।

यदि आप ओंकारेश्वर मंदिर की यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो शालीन कपड़े पहनें और श्रद्धा भाव से मंदिर में प्रवेश करें। नर्मदा नदी में स्नान करें और भगवान ओंकारेश्वर के दर्शन करें। आपको निश्चित रूप से दिव्य आशीर्वाद प्राप्त होगा और आपकी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी। जय महादेव!

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