आरती

Om Jai Jagdish Hare Aarti | ॐ जय जगदीश हरे आरती – बोल, विधि और महत्व

Tilak Kathayein11 Apr 2026159 views📖 1 min read
ॐ जय जगदीश हरे आरती – Om Jai Jagdish Hare Aarti
ॐ जय जगदीश हरे आरती – सम्पूर्ण आरती बोल, अर्थ और आरती करने की विधि। विष्णु की आरती हिंदी में।

ॐ जय जगदीश हरे आरती – परिचय

ॐ जय जगदीश हरे आरती भगवान विष्णु को समर्पित एक प्रसिद्ध और प्रिय प्रार्थना है। यह आरती आमतौर पर पूजा, त्योहारों और अन्य शुभ अवसरों पर गाई जाती है। माना जाता है कि इस आरती की रचना पंडित श्रद्धाराम फिल्लौरी ने की थी।

हिंदू पूजा पद्धति में आरती का महत्वपूर्ण स्थान है। यह भगवान के प्रति प्रेम और भक्ति व्यक्त करने का एक तरीका है। ॐ जय जगदीश हरे आरती अपनी मधुरता, सरल भाषा और गहरे अर्थ के कारण बहुत लोकप्रिय है। यह आरती भगवान विष्णु के गुणों और महिमा का वर्णन करती है और भक्तों को शांति और आनंद प्रदान करती है।

ॐ जय जगदीश हरे आरती के बोल

ॐ जय जगदीश हरे,
स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट,
दास जनों के संकट,
क्षण में दूर करे।।

जो ध्यावे फल पावे,
दुख बिनसे मन का।
स्वामी दुख बिनसे मन का।
सुख संपत्ति घर आवे,
कष्ट मिटे तन का।।

मात पिता तुम मेरे,
शरण गहूँ किसकी।
स्वामी शरण गहूँ किसकी।
तुम बिन और न दूजा,
आस करूँ जिसकी।।

तुम पूरण परमात्मा,
तुम अंतरयामी।
स्वामी तुम अंतरयामी।
पारब्रह्म परमेश्वर,
तुम सबके स्वामी।।

तुम करुणा के सागर,
तुम पालनकर्ता।
स्वामी तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख खल कामी,
कृपा करो भर्ता।।

तुम हो एक अगोचर,
सबके प्राणपति।
स्वामी सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूँ दयामय,
तुमको मैं कुमति।।

दीनबंधु दुखहर्ता,
तुम ठाकुर मेरे।
स्वामी तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ,
द्वार पड़ा तेरे।।

विषय विकार मिटाओ,
पाप हरो देवा।
स्वामी पाप हरो देवा।
श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ,
संतन की सेवा।।

ॐ जय जगदीश हरे,
स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट,
दास जनों के संकट,
क्षण में दूर करे।।

आरती का अर्थ

पहले अंतरे में भक्त भगवान विष्णु से प्रार्थना करते हुए कहते हैं कि हे जगदीश हरे, आप भक्तों के सभी कष्टों को पल भर में दूर करने वाले हैं। आप ही स्वामी हैं और आप ही रक्षक हैं। यह विष्णु के करुणामय और सर्वशक्तिमान होने का वर्णन है।

आरती का मुख्य भाव भगवान विष्णु के प्रति पूर्ण समर्पण और विश्वास व्यक्त करना है। भक्त भगवान से सुख, शांति, समृद्धि और मोक्ष की कामना करते हैं। यह आरती भगवान विष्णु की महिमा का बखान करती है और भक्तों को उनके प्रति प्रेम और श्रद्धा से भर देती है।

आरती करने की विधि

आरती की थाली में दीपक (घी या तेल का), कपूर, फूल, धूप, अक्षत (चावल), कुमकुम और अन्य शुभ वस्तुएं रखें। कुछ लोग थाली में जल का पात्र और घंटी भी रखते हैं।

आरती करते समय, थाली को भगवान की मूर्ति के सामने घड़ी की दिशा में घुमाएं। आमतौर पर आरती को भगवान के चरणों पर चार बार, नाभि पर दो बार, मुख पर एक बार और फिर पूरे शरीर पर सात बार घुमाया जाता है। आरती करते समय, भक्त ॐ जय जगदीश हरे का जाप करते हैं या अन्य भजन गाते हैं।

विष्णु की आरती आमतौर पर संध्या आरती के समय की जाती है, लेकिन इसे मंगला आरती या शयन आरती के समय भी किया जा सकता है। महत्वपूर्ण यह है कि आरती भक्ति और श्रद्धा के साथ की जाए।

आरती के लाभ

  • विष्णु की कृपा – आरती करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों को आशीर्वाद देते हैं। यह माना जाता है कि नियमित रूप से आरती करने से विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
  • घर में सुख-शांति – आरती करने से घर का वातावरण शुद्ध होता है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। नियमित आरती से घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।
  • मनोकामना पूर्ति – भक्त मानते हैं कि सच्चे मन से आरती करने से उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यह भगवान के प्रति अपनी प्रार्थना और इच्छाओं को व्यक्त करने का एक शक्तिशाली माध्यम है।

निष्कर्ष

ॐ जय जगदीश हरे आरती एक दिव्य प्रार्थना है जो लाखों लोगों के दिलों में बसी हुई है। इसकी उत्पत्ति पवित्र है और यह विष्णु पूजा की परंपरा में विशेष महत्व रखती है। यह आरती भगवान विष्णु के प्रति प्रेम और भक्ति का प्रतीक है, और यह भक्तों को शांति, आनंद और आशीर्वाद प्रदान करती है।

भक्तों को प्रेरित किया जाता है कि वे इस आरती को प्रतिदिन पूर्ण भक्ति के साथ गाएं। यह उन्हें भगवान विष्णु के करीब लाएगी और उनके जीवन को धन्य करेगी। जय विष्णु!

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आज का पंचांग 29 अगस्त 2026

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