ज्वाला जी माता कथा – अध्याय 3: ज्वाला की खोज

ज्वाला की खोज
विष्णु चक्र के प्रहार से धरती पर शक्ति पीठों का निर्माण हो चुका था। सती के अंग जहाँ-जहाँ गिरे, वह स्थान पवित्र हो गए। अब बारी थी ज्वाला जी के प्रकट होने की, जिसकी महिमा तीनों लोकों में गूंजने वाली थी। धरती माता अपने गर्भ में ज्वाला को छिपाकर उसके प्रकटीकरण के सही समय का इंतजार कर रही थीं।
चरवाहे की अद्भुत खोज
समय अपनी गति से आगे बढ़ रहा था। एक दिन, हिमाचल प्रदेश की शांत पहाड़ियों में, एक चरवाहा अपनी भेड़ें चरा रहा था। धूप तेज थी और वह थककर एक विशाल चट्टान के नीचे बैठ गया। आसपास हरियाली थी और पक्षियों का मधुर संगीत वातावरण को आनंदमय बना रहा था। अचानक, उसकी नजर एक अद्भुत दृश्य पर पड़ी। चट्टान के पास से आग की लपटें निकल रही थीं! वह डर गया, पर उसकी जिज्ञासा उसे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही थी।
उसने अपने मन में सोचा, "यह कैसा चमत्कार है? बिना किसी लकड़ी या ईंधन के आग कैसे जल सकती है? कहीं यह कोई दैवीय शक्ति तो नहीं?" डर और आश्चर्य के मिले-जुले भाव से वह आग के पास गया और हाथ जोड़कर प्रार्थना करने लगा, "हे देवी, जो भी हो, मुझे क्षमा करना। मैं अज्ञानी हूँ।"
राजा भूमि चंद तक संदेश
चरवाहे ने गाँव जाकर सभी को उस अद्भुत आग के बारे में बताया। लोगों ने पहले तो उसकी बातों पर विश्वास नहीं किया, पर चरवाहे के बार-बार जोर देने पर कुछ लोग उसके साथ उस स्थान पर गए। उन्होंने अपनी आँखों से आग की लपटें देखीं और आश्चर्यचकित रह गए। यह खबर जंगल में आग की तरह फैली और राजा भूमि चंद के कानों तक पहुँची। राजा भूमि चंद एक धार्मिक और न्यायप्रिय शासक थे। उन्होंने स्वयं उस स्थान पर जाने का निर्णय लिया। जब उन्होंने ज्वाला देखी, तो उनकी आँखें श्रद्धा से भर गईं।
राजा भूमि चंद समझ गए कि यह कोई साधारण अग्नि नहीं, बल्कि भगवती की शक्ति का प्रतीक है। उनके मन में ज्वाला जी के लिए गहरा सम्मान उत्पन्न हुआ। उन्होंने उसी क्षण निर्णय लिया कि वे इस पवित्र स्थान पर एक भव्य मंदिर का निर्माण करवाएंगे। ज्वाला जी की कृपा से उनके राज्य में सुख-समृद्धि का वास होगा।
मंदिर निर्माण का प्रयास
राजा भूमि चंद ने तुरंत मंदिर निर्माण का कार्य शुरू करवाया। उन्होंने कुशल कारीगरों और वास्तुकारों को बुलाया। कार्य तेज़ी से चल रहा था, परन्तु बार-बार कुछ ना कुछ बाधाएँ आ रही थीं। कभी नींव कमजोर हो जाती, तो कभी दीवारें गिर जातीं। राजा भूमि चंद निराश हो गए। उन्होंने पंडितों से परामर्श किया। पंडितों ने बताया कि माँ ज्वाला अभी मंदिर में स्थापित होने के लिए तैयार नहीं हैं। जब तक देवी स्वयं नहीं चाहेंगी, मंदिर का निर्माण सफल नहीं हो पाएगा। राजा भूमि चंद को अगले संकेत का इंतज़ार करना होगा। अगली परीक्षा अकबर की होने वाली है, जिससे ज्वाला जी की शक्ति सम्पूर्ण विश्व में फैलेगी।
अध्याय 3 का सार: इस अध्याय में एक चरवाहे द्वारा ज्वाला की खोज और राजा भूमि चंद द्वारा मंदिर निर्माण के असफल प्रयास का वर्णन है। इसका आध्यात्मिक संदेश यह है कि दैवीय शक्ति अपने समय और तरीके से प्रकट होती है, और हमें धैर्य और श्रद्धा के साथ उसकी प्रतीक्षा करनी चाहिए।
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